Nepal China Border Lake Overflow: नेपाल-चीन सीमा पर प्राकृतिक झील का पानी ओवरफ्लो, बाढ़ प्रभावित इलाकों में फिर दहशत

Nepal Flood : नेपाल-चीन सीमा पर भूस्खलन से बनी प्राकृतिक झील का पानी बाहर निकलने से भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। खतरे को देखते हुए बचाव अभियान 90 मिनट रोकना पड़ा।
विषयसूची
सामान लेकर ऊंचे स्थानों की ओर भागे लोग
Nepal China Border Lake Overflow: नेपाल और चीन की सीमा पर भूस्खलन के बाद बनी एक प्राकृतिक झील का पानी शुक्रवार को किनारों से बाहर निकलने लगा। इससे दो दिन पहले आई विनाशकारी बाढ़ से तबाह इलाकों में फिर दहशत फैल गई। खतरे को देखते हुए नेपाल में बचाव अभियान करीब 90 मिनट तक रोकना पड़ा। बाद में हालात का आकलन करने के बाद अभियान फिर शुरू किया गया। शुक्रवार को झील में पानी की मात्रा 25 लाख घन मीटर से ज्यादा हो गई थी। एक दिन पहले यह मात्रा करीब 15 से 20 लाख घन मीटर आंकी गई थी। पानी झील से निकलकर भोटेकोशी नदी की ओर बढ़ने लगा, जिससे नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है।
झील ने अपने किनारे तोड़े
- नेपाल के बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले के वरिष्ठ अधिकारी नरेंद्र परियार ने बताया कि प्रशासन को सूचना मिली थी कि झील ने अपने किनारे तोड़ दिए हैं। हालांकि, उस समय यह साफ नहीं था कि झील का कितना हिस्सा टूटा है और वहां पानी का स्तर कितना है।
- अधिकारियों ने नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने को कहा। झील से पानी बाहर निकलने की खबर फैलते ही नदी के आसपास रहने वाले लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों को नदी से दूर रहने की चेतावनी दी गई। कई लोग अपना जरूरी सामान लेकर ऊंचे स्थानों की ओर भागने लगे।
- प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ इलाकों में सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित जगह जाने के लिए कहा गया। पुलिसकर्मी रस्सियों और स्ट्रेचर के साथ तैयार रहे, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।
- रसुवा की रहने वाली 40 वर्षीय शांति तामांग ने रॉयटर्स को बताया कि जब लोगों ने भागने के लिए कहा तो वह भी डरकर वहां से निकल गईं। उन्होंने बताया कि इलाके में सायरन बजने से लोगों में डर और बढ़ गया था। बचावकर्मियों को भी कुछ समय के लिए अपने उपकरणों के साथ सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया।
कैसे बनी यह प्राकृतिक झील?
26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के हिमालयी इलाके में ग्लेशियर का एक हिस्सा टूट गया था। इसके बाद बर्फ, चट्टान, मिट्टी और मलबे का भारी प्रवाह पहाड़ी नदियों में आ गया। इसी घटना के कारण बड़े पैमाने पर बाढ़ आई और कई इलाकों में भारी तबाही हुई। मलबे ने नदी का रास्ता भी रोक दिया। इसके पीछे पानी जमा होता गया और एक प्राकृतिक झील बन गई। इसे बैरियर झील कहा जाता है। यह कोई इंसानों द्वारा बनाया गया पक्का बांध नहीं है। झील को रोकने वाला हिस्सा चट्टानों, मिट्टी, बर्फ और मलबे से बना है। ऐसे प्राकृतिक अवरोध अचानक कमजोर पड़ सकते हैं। अगर उनका बड़ा हिस्सा टूट जाए तो जमा पानी तेज गति से नीचे की ओर बह सकता है और नई बाढ़ का कारण बन सकता है।
नेपाल में बचाव अभियान 90 मिनट रुका
झील के पानी के बाहर निकलने की खबर के बाद नेपाल में बचाव अभियान करीब 90 मिनट के लिए रोक दिया गया। सेना के एक अधिकारी के अनुसार, बचावकर्मियों और उनके उपकरणों को कुछ समय के लिए सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। चीन की ओर भी खतरे को देखते हुए बचावकर्मियों और वाहनों को सुरक्षित जगह पर हटाया गया। चीन के सरकारी प्रसारक CCTV के अनुसार, बाद में अधिकारियों ने आकलन किया कि ऊपर बनी झील से तत्काल खतरा संभालने योग्य है। इसके बाद बचाव अभियान फिर शुरू कर दिया गया।
बाढ़ में 489 लोगों की मौत, करीब 1,000 लापता
26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। नेपाल में 489 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। दोनों देशों में करीब 1,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें कम से कम 540 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इनमें कई भारतीय श्रद्धालु भी हैं, जो तिब्बत में कैलाश पर्वत और मानसरोवर की यात्रा पर गए थे। बाढ़ ने गांवों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। काठमांडू को तिब्बत के ल्हासा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता भी प्रभावित हुआ है। इस मार्ग का इस्तेमाल पर्यटक, ट्रेकिंग करने वाले लोग और तीर्थयात्री करते हैं।
चीन में शी जिनपिंग ने बचाव अभियान तेज करने को कहा
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अध्यक्षता में शुक्रवार को पोलित ब्यूरो की बैठक हुई। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, बैठक में चीन और विदेशों के लापता लोगों की तलाश के लिए हर संभव प्रयास करने का निर्देश दिया गया। बैठक में ग्लेशियर झीलों, भूस्खलन और बैरियर झीलों से जुड़े खतरों की निगरानी मजबूत करने को कहा गया। प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने और नेपाल के साथ आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। चीन के प्रधानमंत्री ली च्यांग गुरुवार को तिब्बत के जिरोंग इलाके में पहुंचे थे। यह क्षेत्र बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल है।
नेपाल ने विदेशी बचाव दलों की मदद लेने से किया इनकार
नेपाल को कई देशों ने खोज और बचाव अभियान में मदद की पेशकश की है। भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने सहायता देने की इच्छा जताई है। हालांकि, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि फिलहाल उसे विदेशी खोज और बचाव दलों की जरूरत नहीं है। मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर क्षेत्री ने कहा कि नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां अपने स्तर पर राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। दक्षिण कोरिया की एक त्वरित प्रतिक्रिया टीम काठमांडू पहुंच चुकी है, लेकिन अभी उसे बचाव अभियान में शामिल नहीं किया गया है।
चीन की ओर भी बड़ी संख्या में लोग लापता
चीन के तिब्बत क्षेत्र के जिरोंग काउंटी में भी बाढ़ ने भारी नुकसान किया है। CCTV के मुताबिक, गुरुवार तक वहां 558 लोग लापता थे। इनमें 260 विदेशी नागरिक शामिल थे। चीन की ओर अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी। बाढ़ के बाद चीनी बचाव दल प्रभावित सीमा क्षेत्र तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मलबे के कारण सड़कें बंद होने से राहत दलों के लिए वहां पहुंचना मुश्किल हो गया है। बाढ़ का पानी और मलबा इतनी तेजी से आया कि सीमा क्षेत्र में कई इमारतें और दूसरी संरचनाएं कुछ ही पलों में बह गईं।
अपनों की तलाश में परेशान परिवार
इस आपदा के बाद नेपाल और चीन के अलावा भारत, अमेरिका और दूसरे देशों में भी लोग अपने परिवार और परिचितों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। कई भारतीय श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और बाढ़ के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया। अमेरिका के भी कई नागरिक लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों के परिवार लगातार अधिकारियों से उनके बारे में जानकारी मांग रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी नेपाल को मदद की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर नेपाल की सहायता के लिए तैयार है।
अभी भी बनी हुई है खतरे की स्थिति
Nepal China Border Lake Overflow: प्राकृतिक झील का पानी बाहर निकलने के बाद सबसे बड़ी चिंता भोटेकोशी नदी और उसके आसपास के इलाकों को लेकर है। नदी का जलस्तर बढ़ रहा है और ये इलाके पहले ही बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि झील से बाहर निकलने वाला पानी कितनी तेजी से नीचे जाएगा और उसका असर कितना बड़ा होगा। इसलिए प्रशासन लोगों को नदी से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दे रहा है। नेपाल और चीन में बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। साथ ही अधिकारी ग्लेशियर, भूस्खलन और प्राकृतिक झीलों से पैदा होने वाले नए खतरों पर नजर रख रहे हैं। 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद 28 अगस्त को प्राकृतिक झील का ओवरफ्लो होना राहत और बचाव अभियान के लिए एक नई चुनौती बन गया है। फिलहाल प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित रखना और प्रभावित इलाकों में किसी दूसरी बड़ी बाढ़ को रोकना है।

