Meta Teen Safety Rules: रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक नहीं चलेगा इंस्टाग्राम-फेसबुक

Digital Bedtime : मेटा ने बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रात 12 से सुबह 6 बजे तक रोक, दो घंटे की स्क्रीन टाइम सीमा और नए सुरक्षा उपाय लागू करने पर सहमति जताई है।
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बच्चों को लेकर गंभीर हुआ मेटा
Meta Teen Safety Rules: सोशल मीडिया का इस्तेमाल आज बच्चों से लेकर बड़ों तक तेजी से बढ़ रहा है। खासकर इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर लगातार स्क्रॉलिंग के कारण स्क्रीन टाइम बढ़ने और बच्चों की नींद प्रभावित होने को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। अब मेटा ने बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अमेरिका के लगभग सभी राज्यों और क्षेत्रों के साथ एक बड़े समझौते के तहत इंस्टाग्राम और फेसबुक पर किशोरों के इस्तेमाल को सीमित करने और कई सुरक्षा सुविधाओं को डिफॉल्ट रूप से लागू करने पर सहमति जताई है।
नए नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव नाइट मोड है। 18 साल से कम उम्र के किशोरों के लिए इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक डिफॉल्ट रूप से रोक लगाई जाएगी। इस दौरान वे फीड, स्टोरीज, एक्सप्लोर और रील्स जैसे कंटेंट को देख या पोस्ट नहीं कर सकेंगे।
मेटा के मुताबिक, इसका उद्देश्य किशोरों को रात में सोशल मीडिया से दूर रखना और उन्हें पर्याप्त नींद लेने का समय देना है। इसके अलावा किशोरों के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम का कुल दैनिक इस्तेमाल दो घंटे तक सीमित किया जाएगा। दोनों ऐप पर बिताया गया समय इसी सीमा में जोड़ा जाएगा। हालांकि माता-पिता की अनुमति से इस सीमा को बदला जा सकेगा।
स्कूल के समय भी कम आएंगे नोटिफिकेशन
मेटा ने स्कूल के समय के लिए भी स्कूल मोड की घोषणा की है। सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक किशोरों को सामान्य पुश नोटिफिकेशन नहीं मिलेंगे। हालांकि निजी संदेश और सुरक्षा या अकाउंट से जुड़े जरूरी अलर्ट इससे बाहर रहेंगे। लगातार सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के दौरान ऐप हर 15 मिनट पर किशोरों को ब्रेक लेने के लिए भी याद दिलाएगा। इसके अलावा 60 और 90 मिनट का इस्तेमाल पूरा होने पर स्क्रीन टाइम को लेकर चेतावनी भी दी जाएगी।
लाइक और रिएक्शन की संख्या भी छिपाई जाएगी
बच्चों और किशोरों के बीच तुलना और लोकप्रियता के दबाव को कम करने की कोशिश भी की जा रही है। नए नियमों के तहत उनके पोस्ट और दूसरे पोस्ट पर लाइक और रिएक्शन की संख्या डिफॉल्ट रूप से छिपाई जाएगी। मेटा किशोरों के लिए कुछ ऐसे कॉस्मेटिक सर्जरी फिल्टर को भी रोकने की तैयारी कर रहा है, जिन्हें कंपनी बच्चों के लिए नुकसानदायक मानती है। इसके साथ ही एज एश्योरेंस तकनीक को मजबूत किया जाएगा, ताकि 13 साल से कम उम्र के बच्चों या गलत उम्र डालकर अकाउंट बनाने वाले नाबालिगों की पहचान बेहतर तरीके से की जा सके।
एल्गोरिदम से अलग फीड चुन सकेंगे किशोर
एक और बड़ा बदलाव नॉन-पर्सनलाइज्ड फीड का विकल्प है। किशोर ऐसा फीड चुन सकेंगे जिसमें मेटा के सिफारिश करने वाले एल्गोरिदम उनकी पसंद के हिसाब से कंटेंट को लगातार तैयार नहीं करेंगे। इसका उद्देश्य उस इनफिनिट स्क्रॉल अनुभव को कम करना है, जिसमें उपयोगकर्ता बिना किसी स्पष्ट अंत के लगातार वीडियो और पोस्ट देखते रहते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मेटा का एल्गोरिदम आधारित फीड पूरी तरह खत्म हो जाएगा। किशोरों और उनके माता-पिता को नॉन-पर्सनलाइज्ड फीड चुनने का विकल्प दिया जाएगा।
मेटा करेगा अरबों डॉलर का भुगतान
इन बदलावों के पीछे एक बड़ा कानूनी विवाद भी है। 2023 में अमेरिका के कई राज्यों के एक बड़े द्विदलीय गठबंधन ने मेटा पर आरोप लगाया था कि इंस्टाग्राम और फेसबुक को इस तरह डिजाइन किया गया था, जिससे बच्चे और किशोर लंबे समय तक इन प्लेटफॉर्म पर बने रहें। राज्यों ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी को युवाओं पर पड़ने वाले संभावित नुकसान की जानकारी थी, फिर भी उसने पर्याप्त कदम नहीं उठाए। अब मेटा ने इस मामले में 17.1 अरब डॉलर तक के बहु-राज्यीय समझौते पर सहमति जताई है। यह रकम भारतीय मुद्रा में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये के बराबर बैठती है।
मेटा के अनुसार, समझौते की कुल व्यवस्था करीब 18 अरब डॉलर की है। इसमें लगभग 12.7 अरब डॉलर का भुगतान निश्चित है, जबकि बाकी रकम कुछ शर्तों पर निर्भर करेगी। इस अतिरिक्त रकम का संबंध इस बात से है कि टिकटॉक और यूट्यूब जैसे दूसरे बड़े प्लेटफॉर्म भी इसी तरह के सुरक्षा उपाय अपनाते हैं या नहीं।
पूर्व सुरक्षा इंजीनियर आर्टुरो बेजार की गवाही बनी अहम
इस मामले में मेटा के पूर्व सुरक्षा इंजीनियर आर्टुरो बेजार की गवाही भी काफी महत्वपूर्ण रही। उन्होंने अदालत में कहा कि उन्होंने युवा उपयोगकर्ताओं को होने वाले नुकसान और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को लेकर कंपनी के भीतर कई बार अपनी चिंता जताई थी। उनके मुताबिक, कंपनी के भीतर उपयोगकर्ता जुड़ाव और विकास को लेकर दबाव के कारण बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली। बेजार की गवाही के बाद मेटा पर यह सवाल और गंभीर हो गया कि कंपनी को बच्चों और किशोरों पर अपने प्लेटफॉर्म के संभावित प्रभाव की कितनी जानकारी थी और उसने उस जानकारी के आधार पर क्या कदम उठाए।
क्या भारत में भी लागू होंगे ये नियम?
Meta Teen Safety Rules: फिलहाल यह समझौता अमेरिका के राज्यों और क्षेत्रों से जुड़े मामले का हिस्सा है। इसलिए रात 12 से सुबह 6 बजे तक की रोक और दो घंटे की दैनिक सीमा भारत में बच्चों के इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट पर अपने आप लागू होगी, ऐसा कहना सही नहीं होगा। मेटा ने इन बदलावों को अमेरिकी समझौते के तहत लागू करने की बात कही है। फिर भी इसका असर दुनियाभर में देखने को मिल सकता है।
अगर टिकटॉक और यूट्यूब भी इसी तरह के नियम अपनाते हैं, तो बच्चों के लिए सोशल मीडिया के पूरे क्षेत्र में समय सीमा, उम्र की पुष्टि और माता-पिता के नियंत्रण को लेकर एक नया मानक बन सकता है।
कुल मिलाकर, मेटा का यह कदम सोशल मीडिया और बच्चों की सुरक्षा के बीच चल रही बहस में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। हालांकि कंपनी ने कई कड़े सुरक्षा उपायों पर सहमति जताई है, लेकिन केवल समय सीमा और रात में रोक लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। सिफारिश करने वाले एल्गोरिदम, हानिकारक सामग्री, उम्र की सही पहचान और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सवाल अभी भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

