Ghugghus Pollution Farmers Protest: प्रदूषण के खिलाफ किसानों का गुस्सा, एमपीसीबी कार्यालय में जताया विरोध

Environmental Pollution : घुग्घुस में लॉयड्स मेटल्स से कथित प्रदूषण को लेकर किसानों ने एमपीसीबी कार्यालय में विरोध जताया। किसानों का दावा है कि करीब 100 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई है। उन्होंने जांच, फसल नुकसान का पंचनामा और मुआवजे की मांग की है। समाधान नहीं होने पर 25 अगस्त को आत्मदाह की चेतावनी दी गई है।
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100 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित होने का दावा
Ghugghus Pollution Farmers Protest: चंद्रपुर के घुग्घुस स्थित मेसर्स लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड से कथित रासायनिक और वायु प्रदूषण को लेकर किसानों का आक्रोश सामने आया है। उसगांव क्षेत्र के किसानों ने आरोप लगाया है कि औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाले कथित रासायनिक द्रव्य और कचरे के कारण उनकी कृषि भूमि और फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। किसानों का दावा है कि प्रदूषण से उसगांव क्षेत्र की करीब 100 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई है। इसी मुद्दे को लेकर किसानों ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) के चंद्रपुर कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यालय परिसर में कीचड़ फेंककर किसानों ने अपना आक्रोश जताया और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
प्रदूषण की जांच की मांग
किसानों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से प्रदूषण की समस्या बनी हुई है, लेकिन उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। किसानों के अनुसार, कारखाने से निकलने वाले कथित रासायनिक पदार्थ और कचरे के कारण आसपास के नाले का पानी प्रदूषित हो रहा है। किसानों का यह भी दावा है कि नाले का पानी आगे वर्धा नदी में मिल रहा है। इससे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर संभावित खतरे की आशंका जताई गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। किसानों ने प्रभावित क्षेत्र की जांच कराने, कृषि भूमि और पानी के नमूने लेने तथा फसलों को हुए नुकसान का पंचनामा तैयार करने की मांग की है।
जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर पूरे मामले की जांच और प्रभावित किसानों को नुकसान की भरपाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में प्रदूषण के कारण कृषि भूमि और फसलों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर संबंधित कंपनी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। किसान मोहनदास राजुरकर ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी नियमों के कथित उल्लंघन की अनदेखी कर रहे हैं। किसानों ने एमपीसीबी के अधिकारियों पर मिलीभगत का भी गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि, इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
25 अगस्त को आत्मदाह की चेतावनी
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण की समस्या का तत्काल समाधान नहीं किया गया और उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे 25 अगस्त को आत्मदाह जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। किसानों की इस चेतावनी के बाद प्रशासन के सामने मामले को गंभीरता से लेकर समाधान निकालने की चुनौती है। ऐसी स्थिति में प्रशासन के लिए किसानों से बातचीत करने के साथ-साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराना महत्वपूर्ण होगा।
एमपीसीबी का पक्ष सामने नहीं आय
मामले में एमपीसीबी के संबंधित अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने इस विषय पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इसलिए किसानों द्वारा लगाए गए प्रदूषण और अधिकारियों की कथित मिलीभगत के आरोपों पर विभाग का आधिकारिक पक्ष फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
जांच से सामने आएगी असली तस्वीर
Ghugghus Pollution Farmers Protest: इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसानों के आरोपों और प्रदूषण के वास्तविक प्रभाव के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है। प्रभावित खेतों की मिट्टी, सिंचाई के पानी, नाले और नदी के पानी की जांच के साथ फसलों पर पड़े असर का भी वैज्ञानिक आकलन किया जाना चाहिए। यदि जांच में कंपनी की गतिविधियों से प्रदूषण फैलने और किसानों की भूमि या फसल को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई और प्रभावित किसानों को मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो उसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। फिलहाल इस पूरे मामले में किसानों के आरोप सामने हैं, जबकि एमपीसीबी या कंपनी की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही निकाला जाना उचित होगा।

