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मौसम विभाग का बड़ा अपडेट! महाराष्ट्र में मानसून की चाल हुई धीमी, कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना

मौसम विभाग का बड़ा अपडेट! महाराष्ट्र में मानसून की चाल हुई धीमी, कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना
मौसम विभाग का बड़ा अपडेट! महाराष्ट्र में मानसून की चाल हुई धीमी, कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना

महाराष्ट्र में मानसून ने दक्षिण कोंकण में दस्तक दे दी है, लेकिन पूरे राज्य में इसकी रफ्तार फिलहाल धीमी बनी हुई है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में कई इलाकों में गर्मी और उमस बनी रह सकती है। किसानों को बुवाई को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

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Dipali Kumari
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Maharashtra Weather: महाराष्ट्र में मानसून ने दक्षिण कोंकण क्षेत्र में दस्तक दे दी है, लेकिन फिलहाल पूरे राज्य में इसके तेजी से आगे बढ़ने के संकेत नहीं हैं। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 15 जून तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक और संतोषजनक मानसूनी बारिश की संभावना कम है। ऐसे में किसानों को बुवाई को लेकर जल्दबाजी नहीं करने की सलाह दी गई है।

कई जिलों में  9 जून तक मध्यम से भारी बारिश की संभावना

मौसम विभाग के अनुसार, सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी जिलों के कुछ इलाकों में 9 जून तक मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। हालांकि इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने की संभावना है। विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक राज्य के अन्य हिस्सों में केवल छिटपुट बारिश ही देखने को मिल सकती है।

पूर्वानुमान के मुताबिक विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश और मध्य महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में दोपहर बाद बादल छाने और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। लेकिन यह बारिश व्यापक नहीं होगी और खेती या खरीफ फसलों की बुवाई के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

एक ओर बारिश तो दूसरी ओर गर्मी से हाहाकार

दूसरी ओर, राज्य के कई हिस्सों में गर्मी का असर अभी भी बना रहेगा। मौसम विभाग ने बताया है कि 12 जून तक विदर्भ और खानदेश के कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रह सकता है। वहीं मराठवाड़ा में तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। गर्मी और उमस के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

किसानों को सलाह

कृषि एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल संभावित बारिश के अनुमान के आधार पर बुवाई शुरू न करें। पर्याप्त और स्थिर बारिश होने के बाद ही खेती से जुड़े फैसले लेने की सलाह दी गई है।

साथ ही विभाग ने नागरिकों को भी सतर्क रहने को कहा है। गरज-चमक और बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों, टिन शेड, बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मरों और हाई-टेंशन तारों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम में बदलाव को देखते हुए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।