नागपुर में दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति का संदेश
Droupadi Murmu NADT convocation Nagpur: नागपुर, 15 अप्रैल: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि प्रशासन में “विनम्रता, संयम और संवेदनशीलता आदर्श कार्यप्रणाली के अभिन्न अंग हैं।” उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी जिम्मेदारी केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि जनता का प्रशासन पर विश्वास मजबूत करना भी है।
राष्ट्रपति मुर्मू नागपुर स्थित राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी (एनएडीटी) के 78वें बैच के दीक्षांत समारोह में बोल रही थीं। कार्यक्रम में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे और अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “न्याय, पारदर्शिता और ईमानदारी पर आधारित निर्णय शासन को सुदृढ़ करते हैं और देश के समग्र विकास में योगदान देते हैं।” राष्ट्रपति ने अधिकारियों को देश की आर्थिक प्रगति और सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।



नागपुर में दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति का संदेश
राष्ट्रपति ने डिजिटल अर्थव्यवस्था और कर प्रणाली की जटिलताओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनसे निपटने के लिए तकनीक जरूरी है, लेकिन “असली पहचान विवेक, ईमानदारी और नैतिकता से बनती है।”
उन्होंने यह भी बताया कि नए आयकर अधिनियम 2025 से कर प्रणाली अधिक सरल और पारदर्शी होगी। इस दौरान राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। वहीं मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने निर्णय लेते समय जनहित को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया।
नागपुर में आयोजित इस दीक्षांत समारोह में मौजूद अधिकारियों और प्रशिक्षुओं के लिए यह संदेश भविष्य की प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर मार्गदर्शक माना जा रहा है। आने वाले समय में नए आयकर अधिनियम के लागू होने के साथ इन सिद्धांतों की भूमिका और महत्वपूर्ण होगी।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र