
ऐतिहासिक भोंसले पैलेस में नवमी पूजन नागपुर – ऐतिहासिक विरासत और समृद्ध संस्कृति के प्रतीक, भोंसले राजवंश के सीनियर भोंसले पैलेस में इस वर्ष नवमी पूजन का भव्य आयोजन किया गया। यह धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान परंपरा के अनुसार संपन्न हुआ, जिसमें महाराज राजे मुधोजी महाराज भोसले जी ने प्रमुख भूमिका निभाई। इस समारोह में शस्त्र पूजन, अश्व पूजन तथा वाहन पूजन विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहे। भव्य आयोजन में परिवारजन, स्थानीय गणमान्य नागरिक और आम जनता ने भाग लिया। इस अवसर पर प्राचीन परंपराओं का निर्वाह करते हुए महाराज ने सभी पूजा विधियों का पालन किया। पूजा

ऐतिहासिक भोंसले पैलेस में नवमी पूजन नागपुर – ऐतिहासिक विरासत और समृद्ध संस्कृति के प्रतीक, भोंसले राजवंश के सीनियर भोंसले पैलेस में इस वर्ष नवमी पूजन का भव्य आयोजन किया गया। यह धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान परंपरा के अनुसार संपन्न हुआ, जिसमें महाराज राजे मुधोजी महाराज भोसले जी ने प्रमुख भूमिका निभाई। इस समारोह में शस्त्र पूजन, अश्व पूजन तथा वाहन पूजन विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहे। भव्य आयोजन में परिवारजन, स्थानीय गणमान्य नागरिक और आम जनता ने भाग लिया। इस अवसर पर प्राचीन परंपराओं का निर्वाह करते हुए महाराज ने सभी पूजा विधियों का पालन किया। पूजा

नागपुर का भोसला पैलेस: गणेशोत्सव में आस्था, परंपरा और इतिहास का अद्भुत संगम नागपुर – Nagpur Bhonsla Palace Ganeshotsav News: भोसला पैलेस का वातावरण आज एक बार फिर इतिहास और आस्था के रंगों से सराबोर हो उठा। लगभग 297 वर्षों से अपरिवर्तित परंपरा के अनुरूप इस वर्ष भी भगवान गणेश का आगमन और विसर्जन हुआ। गणेशजी सिरपेजतुरा पगड़ी से सुसज्जित होकर पालकी में पधारे और पालकी में ही विदा हुए। यह दृश्य केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नागपुर की उस जीवंत विरासत का प्रतीक है जो पीढ़ियों से यहां के समाज और संस्कृति को जोड़ती आई है। परंपरा और

नागपुर का भोसला पैलेस: गणेशोत्सव में आस्था, परंपरा और इतिहास का अद्भुत संगम नागपुर – Nagpur Bhonsla Palace Ganeshotsav News: भोसला पैलेस का वातावरण आज एक बार फिर इतिहास और आस्था के रंगों से सराबोर हो उठा। लगभग 297 वर्षों से अपरिवर्तित परंपरा के अनुरूप इस वर्ष भी भगवान गणेश का आगमन और विसर्जन हुआ। गणेशजी सिरपेजतुरा पगड़ी से सुसज्जित होकर पालकी में पधारे और पालकी में ही विदा हुए। यह दृश्य केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नागपुर की उस जीवंत विरासत का प्रतीक है जो पीढ़ियों से यहां के समाज और संस्कृति को जोड़ती आई है। परंपरा और