Justice Nisha Bano: भारतीय न्यायपालिका की साख केवल उसके फैसलों से नहीं, बल्कि उसके भीतर अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं और अनुशासन से भी तय होती है। मद्रास हाईकोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. निशा बानो के केरल हाईकोर्ट में स्थानांतरण का मामला इसी कारण साधारण प्रशासनिक निर्णय से आगे बढ़कर एक संवैधानिक और संस्थागत विमर्श का विषय बन गया है। लगभग दो महीने तक पदभार ग्रहण न किए जाने के बाद राष्ट्रपति द्वारा 20 दिसंबर 2025 तक की अंतिम समयसीमा तय किया जाना इस बात का संकेत है कि अब यह विषय केवल व्यक्तिगत परिस्थितियों तक सीमित नहीं रह गया है।