
इंडिया गेट पर मादवी हिडमा समर्थन के नारे और पुलिस कार्रवाई प्रदर्शन के बीच अचानक विवादास्पद नारेबाजी राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट, जहां आमतौर पर शांति और अनुशासन के बीच नागरिक विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते हैं, रविवार को अचानक हलचल का केंद्र बन गया। प्रदूषण के बढ़ते स्तर के खिलाफ आयोजित एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक तब विवादों में घिर गया जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने कुख्यात माओवादी कमांडर मादवी हिडमा के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए। ‘मादवी हिडमा अमर रहे’ जैसे नारे वहां मौजूद लोगों के बीच आश्चर्य और तनाव दोनों का कारण बने। मादवी हिडमा

इंडिया गेट पर मादवी हिडमा समर्थन के नारे और पुलिस कार्रवाई प्रदर्शन के बीच अचानक विवादास्पद नारेबाजी राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट, जहां आमतौर पर शांति और अनुशासन के बीच नागरिक विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते हैं, रविवार को अचानक हलचल का केंद्र बन गया। प्रदूषण के बढ़ते स्तर के खिलाफ आयोजित एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक तब विवादों में घिर गया जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने कुख्यात माओवादी कमांडर मादवी हिडमा के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए। ‘मादवी हिडमा अमर रहे’ जैसे नारे वहां मौजूद लोगों के बीच आश्चर्य और तनाव दोनों का कारण बने। मादवी हिडमा

माओवादी संगठन में केंद्रीय नेतृत्व और सबसे खतरनाक सैन्य कमांडरों में गिने जाने वाले मदवी हिड़मा की 18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के मरेडुमिल्ली जंगल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मौत हो गई। यह घटना न केवल उस क्षेत्र के लिए बल्कि पूरे देश में माओवादी विद्रोह के संदर्भ में एक निर्णायक मोड़ मानी जा रही है। हिड़मा कौन था और उसकी पहचान मदवी हिड़मा, जिन्हें आदिवासी कमांडर के रूप में जाना जाता था, का जन्म पुवर्ती गांव (वर्तमान छत्तीसगढ़) में हुआ था। उन्होंने माओवादी संगठन में अपनी शारीरिक क्षमता, रणनीतिक कौशल और

माओवादी संगठन में केंद्रीय नेतृत्व और सबसे खतरनाक सैन्य कमांडरों में गिने जाने वाले मदवी हिड़मा की 18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के मरेडुमिल्ली जंगल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मौत हो गई। यह घटना न केवल उस क्षेत्र के लिए बल्कि पूरे देश में माओवादी विद्रोह के संदर्भ में एक निर्णायक मोड़ मानी जा रही है। हिड़मा कौन था और उसकी पहचान मदवी हिड़मा, जिन्हें आदिवासी कमांडर के रूप में जाना जाता था, का जन्म पुवर्ती गांव (वर्तमान छत्तीसगढ़) में हुआ था। उन्होंने माओवादी संगठन में अपनी शारीरिक क्षमता, रणनीतिक कौशल और