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शंकराचार्य ने माघ मेला बीच में छोड़ा

शंकराचार्य ने माघ मेला बीच में छोड़ा, संगम में स्नान का संकल्प रह गया अधूरा

Shankaracharya: माघ मेला, जो आध्यात्मिक साधना और धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है, इस बार अचानक एक विवाद के कारण सुर्खियों में आ गया। प्रयागराज के संगम में मौनी अमावस्या और माघ मेला के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 11वें दिन अचानक मेला छोड़ने का फैसला किया। यह पहला मौका है जब माघ मेला में आने के बावजूद किसी शंकराचार्य ने संगम में स्नान किए बिना ही विदा लिया। शंकराचार्य का विरोध और विदाई शंकराचार्य ने माघ मेले से अचानक विदा लेने का निर्णय मंगलवार देर रात अपने समर्थकों से चर्चा करने के बाद लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि

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प्रयागराज माघ मेले में हंगामा

प्रयागराज माघ मेले में हंगामा, शंकराचार्य की पालकी लौटी, मौनी अमावस्या का स्नान टला

Magh Mela: प्रयागराज माघ मेले का हर साल का सबसे बड़ा आकर्षण मौनी अमावस्या का स्नान होता है। लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर संगम नगरी में इकठ्ठा होते हैं। इस साल भी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कसी हुई थी। लेकिन इस बार मामला तब गरमा गया जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान से इंकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी से अखाड़े से संगम नोज की ओर जा रहे थे, तभी उनके शिष्यों और यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। इसके बाद उन्होंने स्नान करने से मना कर दिया।

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प्रयागराज माघ मेले में हंगामा

Magh Mela 2026: प्रयागराज में माघ मेले की भव्य शुरुआत, पहले दिन ही उमड़ी भारी भीड़

Magh Mela 2026: प्रयागराज की धरती एक बार फिर आस्था, परंपरा और अनुशासन का अद्भुत दृश्य पेश कर रही है। पौष पूर्णिमा के साथ माघ मेला 2026 की विधिवत शुरुआत हो चुकी है और संगम तट पर श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान करने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच रहे हैं। माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण है। इसे देखते हुए प्रशासन ने इस बार सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर विशेष तैयारी

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