
भविष्य के जल संकट से निपटने के लिए नगर परिषदों को पहले से करनी होगी तैयारी Nagpur water supply plan municipal councils: नागपुर, 9 अप्रैल। पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नागपुर जिले की नगर परिषदों और नगरपालिकाओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जल आपूर्ति योजनाएं तैयार करते समय आने वाले 25 वर्षों की संभावित जनसंख्या को आधार बनाया जाए, तभी ये योजनाएं दीर्घकालिक रूप से प्रभावी होंगी। बैठक में पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नगराध्यक्षों को जल आपूर्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, ठोस कचरा प्रबंधन और

भविष्य के जल संकट से निपटने के लिए नगर परिषदों को पहले से करनी होगी तैयारी Nagpur water supply plan municipal councils: नागपुर, 9 अप्रैल। पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नागपुर जिले की नगर परिषदों और नगरपालिकाओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जल आपूर्ति योजनाएं तैयार करते समय आने वाले 25 वर्षों की संभावित जनसंख्या को आधार बनाया जाए, तभी ये योजनाएं दीर्घकालिक रूप से प्रभावी होंगी। बैठक में पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नगराध्यक्षों को जल आपूर्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, ठोस कचरा प्रबंधन और

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में नदियों के प्रदूषण का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। नाग नदी का दूषित पानी अब वैनगंगा नदी में मिलकर एक बड़े पर्यावरण और स्वास्थ्य संकट को जन्म दे रहा है। खास बात यह है कि वैनगंगा नदी का पानी भंडारा और गोंदिया जिलों में लाखों लोगों को पीने के लिए दिया जा रहा है। इसके अलावा चंद्रपुर और गढ़चिरोली जिलों में खेती के लिए भी इसी नदी का पानी इस्तेमाल होता है। लेकिन दुखद बात यह है कि इस पानी की कभी भी वैज्ञानिक तरीके से जांच नहीं की गई। विधान परिषद में

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में नदियों के प्रदूषण का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। नाग नदी का दूषित पानी अब वैनगंगा नदी में मिलकर एक बड़े पर्यावरण और स्वास्थ्य संकट को जन्म दे रहा है। खास बात यह है कि वैनगंगा नदी का पानी भंडारा और गोंदिया जिलों में लाखों लोगों को पीने के लिए दिया जा रहा है। इसके अलावा चंद्रपुर और गढ़चिरोली जिलों में खेती के लिए भी इसी नदी का पानी इस्तेमाल होता है। लेकिन दुखद बात यह है कि इस पानी की कभी भी वैज्ञानिक तरीके से जांच नहीं की गई। विधान परिषद में