
नागपुर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध पेंच टाइगर रिजर्व में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की शुरुआत हो गई है। पेंच नदी पर अब आधुनिक सोलर बोट सेवा चालू कर दी गई है, जिससे पर्यटकों को बाघ दर्शन और प्रकृति का आनंद लेने में काफी सुविधा होगी। यह कदम न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला साबित होगा। सोलर बोट सेवा से बदलेगा सफर का अनुभव पेंच टाइगर प्रोजेक्ट से होकर बहने वाली पेंच नदी लगभग 20 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है। इस नदी में

नागपुर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध पेंच टाइगर रिजर्व में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की शुरुआत हो गई है। पेंच नदी पर अब आधुनिक सोलर बोट सेवा चालू कर दी गई है, जिससे पर्यटकों को बाघ दर्शन और प्रकृति का आनंद लेने में काफी सुविधा होगी। यह कदम न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला साबित होगा। सोलर बोट सेवा से बदलेगा सफर का अनुभव पेंच टाइगर प्रोजेक्ट से होकर बहने वाली पेंच नदी लगभग 20 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है। इस नदी में

Ashoka Statue Journey: केरल से नागपुर, दीक्षाभूमि पर धम्मदीक्षा में प्रस्तुति सम्राट अशोक, जिन्होंने भारत में धर्म और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में अमूल्य योगदान दिया, अब एक विशेष Ashoka Statue Journey के माध्यम से नागपुर आ रहे हैं। यह यात्रा केवल एक मूर्तिकला परिवहन नहीं है, बल्कि यह सम्राट अशोक द्वारा किए गए धम्म प्रचार और उनके आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रतीक है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति, दीक्षाभूमि के अध्यक्ष और धम्मसेना नायक भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई ने बताया कि यह प्रतिमा सोमवार, 29 सितंबर को नागपुर पहुँच चुकी है। इसके बाद 30 सितंबर को

Ashoka Statue Journey: केरल से नागपुर, दीक्षाभूमि पर धम्मदीक्षा में प्रस्तुति सम्राट अशोक, जिन्होंने भारत में धर्म और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में अमूल्य योगदान दिया, अब एक विशेष Ashoka Statue Journey के माध्यम से नागपुर आ रहे हैं। यह यात्रा केवल एक मूर्तिकला परिवहन नहीं है, बल्कि यह सम्राट अशोक द्वारा किए गए धम्म प्रचार और उनके आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रतीक है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति, दीक्षाभूमि के अध्यक्ष और धम्मसेना नायक भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई ने बताया कि यह प्रतिमा सोमवार, 29 सितंबर को नागपुर पहुँच चुकी है। इसके बाद 30 सितंबर को