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Navratri Day 5

Navratri 2025: Uma Bharti in Jamsavli Hanuman Mandir, Chhindwara

Navratri 2025: साध्वी उमा भारती ने Jamsavli Hanuman Mandir में की पूजा-अर्चना, दिया सनातन संस्कृति को बचाने का संदेश

नवरात्रि 2025 का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के Chhindwara District स्थित चमत्कारिक Jamsavli Hanuman Mandir में एक विशेष दृश्य देखने को मिला, जब प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री Sadhvi Uma Bharti जी ने श्री हनुमान जी की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। वेब स्टोरी: उमाभारती का विशेष आगमन शनिवार की सुबह साध्वी उमा भारती जी मंदिर पहुंचीं, जहां मंदिर संस्थान के पदाधिकारियों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने उनका आत्मीय स्वागत किया। पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री राम” और “जय बजरंगबली” के जयकारों

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Athmalgola woman Manisha Devi becomes center of faith with nail bed fast in Bihar

अथमलगोला की मनीषा देवी – लोहे की कील के बिछावन पर कलश और निर्जला उपवास से बनीं आस्था का केंद्र

Manisha Devi News Patna: बिहार के पटना ज़िले के बाढ़ अनुमंडल के अथमलगोला प्रखंड के गंजपर गांव में इन दिनों आस्था और कौतूहल का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। गांव की महिला मनीषा देवी नवरात्रि के अवसर पर ऐसी तपस्या कर रही हैं, जिसने आसपास के इलाके में चर्चा और श्रद्धा दोनों को जन्म दिया है। मनीषा देवी बीते चार दिनों से iron nails के bed पर लेटी हुई हैं। उनके सीने पर एक पवित्र Kalash रखा है और वे बिना अन्न-जल यानी पूर्ण Nirjala fast का पालन कर रही हैं।  Manisha Devi: तपस्या का संकल्प ग्रामीणों

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Shardiya Navratri 2025 Day 5: Maa Skandamata Puja Vidhi, Bhog, Mantra & Significance

Shardiya Navratri 2025 Day 5: मां स्कंदमाता की पूजा विधि, प्रिय भोग और शुभ रंग

मां स्कंदमाता का महत्व (Significance of Maa Skandamata): Shardiya Navratri 2025 के पांचवें दिन (Shardiya Navratri 2025 Day 5) मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां को यह नाम उनके पुत्र कार्तिकेय (Skanda Kumar) की माता होने के कारण प्राप्त हुआ। मां स्कंदमाता की पूजा करने से संतान सुख, बुद्धि, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मां स्कंदमाता शेर पर सवार होती हैं और गोद में बाल रूप कार्तिकेय को धारण करती हैं। इनके चार हाथ होते हैं – दो हाथों में कमल, एक हाथ वरद मुद्रा और एक हाथ से कार्तिकेय को

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