
कर संक्रांति का त्योहार हमारे देश में बड़े उल्लास और खुशी के साथ मनाया जाता है। इस दिन आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाना एक पुरानी परंपरा रही है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी इस खेल में बड़े उत्साह से भाग लेते हैं। छतों पर रंगीन पतंगें, काटो-काटो की आवाजें और खुशी की किलकारियां इस त्योहार की पहचान हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में इस खुशी के त्योहार पर एक काला साया मंडरा रहा है। नायलॉन मांजे के इस्तेमाल ने इस पवित्र उत्सव को खतरनाक बना दिया है। हर साल मकर संक्रांति के आसपास ऐसी दर्दनाक घटनाएं सामने आती हैं

कर संक्रांति का त्योहार हमारे देश में बड़े उल्लास और खुशी के साथ मनाया जाता है। इस दिन आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाना एक पुरानी परंपरा रही है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी इस खेल में बड़े उत्साह से भाग लेते हैं। छतों पर रंगीन पतंगें, काटो-काटो की आवाजें और खुशी की किलकारियां इस त्योहार की पहचान हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में इस खुशी के त्योहार पर एक काला साया मंडरा रहा है। नायलॉन मांजे के इस्तेमाल ने इस पवित्र उत्सव को खतरनाक बना दिया है। हर साल मकर संक्रांति के आसपास ऐसी दर्दनाक घटनाएं सामने आती हैं

नागपुर उच्च न्यायालय ने नायलॉन मांजा के बढ़ते खतरे को देखते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए कठोर दंड का प्रस्ताव रखा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई नाबालिग बच्चा नायलॉन मांजा से पतंग उड़ाते पाया जाता है तो उसके माता-पिता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह निर्णय उन लगातार घटनाओं के मद्देनजर आया है जिनमें नायलॉन मांजा के कारण पक्षियों की मौत के साथ-साथ मानव जीवन भी खतरे में पड़ा है। न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की खंडपीठ ने नायलॉन मांजा से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान यह गंभीर सवाल

नागपुर उच्च न्यायालय ने नायलॉन मांजा के बढ़ते खतरे को देखते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए कठोर दंड का प्रस्ताव रखा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई नाबालिग बच्चा नायलॉन मांजा से पतंग उड़ाते पाया जाता है तो उसके माता-पिता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह निर्णय उन लगातार घटनाओं के मद्देनजर आया है जिनमें नायलॉन मांजा के कारण पक्षियों की मौत के साथ-साथ मानव जीवन भी खतरे में पड़ा है। न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की खंडपीठ ने नायलॉन मांजा से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान यह गंभीर सवाल