
रघुनाथपुर की सियासी जंग: विकास की नीति बनाम विरासत की राजनीति आकाश श्रीवास्तव(सबएडिटर राष्ट्र भारत,बिहार)। लोकतंत्र के इस महापर्व में रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर से राजनीतिक रणभूमि में तब्दील हो गया है। यहां का मुकाबला केवल दो प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं के बीच है — एक ओर विकास की राजनीति का प्रतीक बन चुके एनडीए प्रत्याशी विकास कुमार सिंह उर्फ जिशु सिंह हैं, तो दूसरी ओर विरासत की राजनीति का चेहरा माने जा रहे आरजेडी उम्मीदवार ओसामा शहाबुद्दीन। जनता का मूड: अब विकास चाहिए, वादे नहीं ग्रामीण चौपालों से लेकर नगर पंचायत के बाजारों तक,

रघुनाथपुर की सियासी जंग: विकास की नीति बनाम विरासत की राजनीति आकाश श्रीवास्तव(सबएडिटर राष्ट्र भारत,बिहार)। लोकतंत्र के इस महापर्व में रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर से राजनीतिक रणभूमि में तब्दील हो गया है। यहां का मुकाबला केवल दो प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं के बीच है — एक ओर विकास की राजनीति का प्रतीक बन चुके एनडीए प्रत्याशी विकास कुमार सिंह उर्फ जिशु सिंह हैं, तो दूसरी ओर विरासत की राजनीति का चेहरा माने जा रहे आरजेडी उम्मीदवार ओसामा शहाबुद्दीन। जनता का मूड: अब विकास चाहिए, वादे नहीं ग्रामीण चौपालों से लेकर नगर पंचायत के बाजारों तक,

रघुनाथपुर में विकास बनाम विरासत का संग्राम शुरू सिवान जिले की रघुनाथपुर विधानसभा सीट इस बार बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित रणक्षेत्र बन चुकी है। यह सिर्फ एक चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि दो पीढ़ियों की सोच, दो अलग विचारधाराओं और दो रास्तों की टक्कर है।एक तरफ हैं जदयू के वरिष्ठ नेता विकास कुमार सिंह उर्फ जीशू सिंह, जो विकास, सुशासन और आधुनिकता के प्रतीक के रूप में उभरे हैं।दूसरी तरफ हैं राजद प्रत्याशी ओसामा साहब, जो अपने पिता पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने मैदान में उतरे हैं। विरासत की राजनीति बनाम विकास की सोच

रघुनाथपुर में विकास बनाम विरासत का संग्राम शुरू सिवान जिले की रघुनाथपुर विधानसभा सीट इस बार बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित रणक्षेत्र बन चुकी है। यह सिर्फ एक चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि दो पीढ़ियों की सोच, दो अलग विचारधाराओं और दो रास्तों की टक्कर है।एक तरफ हैं जदयू के वरिष्ठ नेता विकास कुमार सिंह उर्फ जीशू सिंह, जो विकास, सुशासन और आधुनिकता के प्रतीक के रूप में उभरे हैं।दूसरी तरफ हैं राजद प्रत्याशी ओसामा साहब, जो अपने पिता पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने मैदान में उतरे हैं। विरासत की राजनीति बनाम विकास की सोच