
Tirupati Silk Dupatta Scam: पिछले कुछ समय से तिरुपति तिरुमला देवस्थानम मंदिर कई विवादों में घिरा है, कभी लड्डू घोटाला तो कभी परकमानी अनियमितताएं। परंतु इस बार जो खुलासा हुआ है, उसने मंदिर प्रशासन और लाखों श्रद्धालुओं दोनों को हिलाकर रख दिया है। ट्रस्ट ने पहली बार स्वीकार किया है कि पिछले एक दशक तक श्रद्धालुओं और दानदाताओं को दिए जाने वाले ‘रेशमी दुपट्टे’ असल में रेशम के नहीं, बल्कि 100% पॉलिएस्टर के थे। लगभग 55 करोड़ रुपये का यह घोटाला अब आंध्र प्रदेश एंटी-करप्शन ब्यूरो के दायरे में है। जाँच में कैसे खुली परतें तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के अध्यक्ष

Tirupati Silk Dupatta Scam: पिछले कुछ समय से तिरुपति तिरुमला देवस्थानम मंदिर कई विवादों में घिरा है, कभी लड्डू घोटाला तो कभी परकमानी अनियमितताएं। परंतु इस बार जो खुलासा हुआ है, उसने मंदिर प्रशासन और लाखों श्रद्धालुओं दोनों को हिलाकर रख दिया है। ट्रस्ट ने पहली बार स्वीकार किया है कि पिछले एक दशक तक श्रद्धालुओं और दानदाताओं को दिए जाने वाले ‘रेशमी दुपट्टे’ असल में रेशम के नहीं, बल्कि 100% पॉलिएस्टर के थे। लगभग 55 करोड़ रुपये का यह घोटाला अब आंध्र प्रदेश एंटी-करप्शन ब्यूरो के दायरे में है। जाँच में कैसे खुली परतें तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के अध्यक्ष

Tirupati Temple: तिरुपति मंदिर में भक्ति के नाम पर भ्रष्टाचार का खुलासा आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) में लड्डू प्रसाद को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। जांच एजेंसियों ने पाया है कि वर्ष 2019 से 2024 तक मंदिर में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद में नकली घी का उपयोग किया गया, जिसकी कुल मात्रा 68 लाख किलोग्राम और कीमत लगभग 250 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह खुलासा न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को झकझोरने वाला है, बल्कि मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। मंदिर प्रशासन के शीर्ष अधिकारी से

Tirupati Temple: तिरुपति मंदिर में भक्ति के नाम पर भ्रष्टाचार का खुलासा आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) में लड्डू प्रसाद को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। जांच एजेंसियों ने पाया है कि वर्ष 2019 से 2024 तक मंदिर में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद में नकली घी का उपयोग किया गया, जिसकी कुल मात्रा 68 लाख किलोग्राम और कीमत लगभग 250 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह खुलासा न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को झकझोरने वाला है, बल्कि मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। मंदिर प्रशासन के शीर्ष अधिकारी से