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दिल्ली में गरीब परिवारों को बड़ी राहत, निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की आय सीमा बढ़ाकर 5 लाख की गई

EWS Income Limit Increased: दिल्ली में निजी अस्पतालों में इलाज के लिए आय सीमा 5 लाख रुपये हुई
EWS Income Limit Increased: दिल्ली में निजी अस्पतालों में इलाज के लिए आय सीमा 5 लाख रुपये हुई (File Photo)

दिल्ली सरकार ने निजी अस्पतालों में इलाज के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की आय सीमा 2.20 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये सालाना कर दी है। स्वास्थ्य निदेशालय ने 2 जनवरी को इस संबंध में आदेश जारी किया। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया यह निर्णय लाखों परिवारों को राहत देगा। सभी चिह्नित अस्पतालों को इसका पालन अनिवार्य है।

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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को एक बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज पाने के लिए आय सीमा में बड़ा बदलाव किया है। अब 5 लाख रुपये तक की सालाना कमाई वाले परिवार भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। पहले यह सीमा सिर्फ 2.20 लाख रुपये सालाना थी, जिसे अब दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा दिया गया है।

यह फैसला दिल्ली के मध्यम और निम्न आय वर्ग के लाखों परिवारों के लिए राहत भरा साबित होगा। महंगाई के इस दौर में जब इलाज का खर्च आसमान छू रहा है, यह कदम एक बड़ी मदद के रूप में सामने आया है। दिल्ली सरकार ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है।

आदेश की पूरी जानकारी

दिल्ली के स्वास्थ्य निदेशालय ने 2 जनवरी को इस बारे में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। इस आदेश में दिल्ली हाई कोर्ट के 2 सितंबर 2025 के निर्देश का भी जिक्र किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी चिह्नित निजी अस्पतालों को इस नई आय सीमा के अनुसार ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों का इलाज करना होगा।

आदेश में कहा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस श्रेणी के मरीजों के लिए आय की सीमा को 2 लाख 20 हजार रुपये सालाना से बढ़ाकर 5 लाख रुपये सालाना कर दिया गया है। यह बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।

किन परिवारों को मिलेगा फायदा

इस नए नियम से दिल्ली के उन परिवारों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जिनकी सालाना आय 2.20 लाख से 5 लाख रुपये के बीच है। पहले ये परिवार इस योजना के दायरे में नहीं आते थे, लेकिन अब वे भी निजी अस्पतालों में मुफ्त या रियायती दरों पर इलाज करवा सकेंगे।

दिल्ली में रहने वाले मजदूर, छोटे दुकानदार, ऑटो-टैक्सी चालक, निम्न स्तर के कर्मचारी और छोटे व्यवसायी इस फैसले से लाभान्वित होंगे। अनुमान है कि इस बदलाव से लगभग 10 लाख और परिवार इस योजना के दायरे में आ जाएंगे।

निजी अस्पतालों की जिम्मेदारी

दिल्ली में कई बड़े निजी अस्पताल सरकारी जमीन पर बने हुए हैं या उन्हें सरकार से रियायत मिली हुई है। इसके बदले में उन्हें अपने बिस्तरों का एक निश्चित हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए आरक्षित रखना होता है।

सरकार ने सभी चिह्नित निजी अस्पतालों को इन नए निर्देशों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। जो अस्पताल इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों को सख्त निर्देश

स्वास्थ्य निदेशालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस आदेश के पालन की नियमित निगरानी करें। अगर कोई अस्पताल इन नियमों की अनदेखी करता है तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा और जरूरी कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि पात्र मरीजों को इस सुविधा से वंचित न किया जाए। समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण किया जाएगा और शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

हाई कोर्ट के आदेश की भूमिका

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया था, जिसमें आय सीमा में संशोधन की बात कही गई थी। कोर्ट ने माना कि पुरानी आय सीमा वास्तविकता के अनुरूप नहीं है और इसे बढ़ाए जाने की जरूरत है।

कोर्ट के इस निर्देश को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने तेजी से काम करते हुए नई आय सीमा तय की है। यह दर्शाता है कि सरकार जनता की भलाई के लिए प्रतिबद्ध है।

महंगाई के दौर में राहत

आज के समय में जब चिकित्सा खर्च लगातार बढ़ रहा है, यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। निजी अस्पतालों में इलाज की लागत इतनी ज्यादा हो गई है कि मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए भी इलाज कराना मुश्किल हो गया है।

इस योजना के तहत पात्र मरीजों को ओपीडी, आईपीडी, सर्जरी, जांच और दवाओं में रियायत मिलती है। कई मामलों में तो पूरी तरह से मुफ्त इलाज की व्यवस्था है। अब अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

लोगों की प्रतिक्रिया

इस फैसले की दिल्लीवासियों ने सराहना की है। लोगों का कहना है कि यह कदम समय की मांग था। खासकर कोरोना काल के बाद जब लोगों की आय पर असर पड़ा है और स्वास्थ्य खर्च बढ़ गया है, यह राहत बहुत जरूरी थी।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस निर्णय को सराहा है। उनका मानना है कि यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक समावेशी बनाएगा।

आगे की राह

दिल्ली सरकार के इस फैसले से उम्मीद है कि अन्य राज्य भी इसी तरह की पहल करेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों की पहुंच में लाना हर सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि निजी अस्पताल इन नियमों का ईमानदारी से पालन करें और पात्र मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। सरकार को इसकी नियमित निगरानी करनी होगी।

यह फैस दिल्ली सरकार की जनकल्याणकारी सोच को दर्शाता है और आम लोगों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

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Asfi Shadab

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