अब पार्टी में परिवार की पकड़ और मजबूत
Sunetra Pawar NCP leadership: दिवंगत अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का पूरी तरह से नेतृत्व करेंगी । मुंबई के सम्मेलन में पार्टी ने साफ कह दिया है कि अब शरद पवार गुट का दबाव किसी तरह का असर नहीं रखता। अब पूरी पार्टी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में आगे बढ़ेगी। कई नेताओं का कहना है कि यह उनके लिए एक नई शुरुआत है। वे अपने तरीके से पार्टी चलाएंगी और अजित पवार की सोच और काम को आगे बढ़ाएंगी। सीधे शब्दों में कहें तो अब पूरी पार्टी सुनेत्रा पवार के हाथ में है।

विधायकों की संख्या मजबूत
Sunetra Pawar NCP leadership: माना जा रहा है कि अजित और सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार को राज्यसभा चुनाव में पार्टी का उम्मीदवार बनाया जाएगा। इससे साफ है कि अब पार्टी में परिवार की पकड़ और मजबूत हो गई है। क्योंकि पार्टी सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है और विधायकों की संख्या अच्छी-खासी है, इसलिए पार्थ पवार को राज्यसभा भेजना मुश्किल नहीं। वहीं, शरद पवार के पास केवल 10 विधायक हैं, इसलिए उन्हें राज्यसभा में बने रहने के लिए शिवसेना और कांग्रेस का समर्थन चाहिए।

मंच पर दमखम
Sunetra Pawar NCP leadership: सुनेत्रा पवार ने अध्यक्ष बनते ही अपना पहला भाषण दिया। मंच पर वे बहुत मजबूत और आत्मविश्वास से भरी दिखीं, लेकिन पति अजित पवार के जाने का दुख भी साफ था। उन्होंने कहा कि अजित पवार के अधूरे काम वे पूरा किए बिना चैन से नहीं बैठेंगी। भाषण के दौरान वे अजित पवार के बड़े पोस्टर के सामने खड़ी थीं और सीधे कार्यकर्ताओं से जुड़ने की कोशिश कर रही थीं।

शरद पवार गुट को घेरा
Sunetra Pawar NCP leadership: सम्मेलन में शरद पवार गुट पर भी निशाना साधा गया। प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि अब शरद पवार गुट यह तय नहीं करेगा कि पार्टी कैसे चलेगी। छगन भुजबल ने कहा कि अजित पवार के अंतिम संस्कार से पहले ही शरद गुट ने पार्टी विलय की बातें शुरू कर दी थीं। इसी वजह से सुनेत्रा पवार की शपथ जल्दी करानी पड़ी। उन्होंने कहा कि अब शरद गुट के पास सवाल उठाने का कोई हक नहीं है। प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे ने याद दिलाया कि 2004 में पार्टी सबसे बड़ी थी और अजित पवार मुख्यमंत्री बन सकते थे, लेकिन कांग्रेस की वजह से ऐसा नहीं हो पाया।
दोनों गुटों के बीच समझौते के रास्ते बंद
Sunetra Pawar NCP leadership: दोनों गुटों के कई नेताओं का कहना है कि हम कभी असली में अलग नहीं हुए थे, यह केवल कागज पर बंटवारा था। सबको लगता था कि वक्त के साथ सब फिर एक हो जाएगा। लेकिन अजित पवार के जाने के बाद यह उम्मीद खत्म हो गई। शरद पवार गुट के एक नेता ने कहा कि विलय की चर्चा सिर्फ अजित पवार की वजह से थी, लेकिन तय नहीं था कि शरद पवार इसमें खुद शामिल होंगे या नहीं। अजित पवार को विलय में जल्दी दो कारणों से थी-पहला, अपनी मां और शरद पवार के सामने विलय करके काका से अलग होने का दाग मिटाना, और दूसरा, पार्टी को स्वतंत्र बनाए रखते हुए भाजपा के खतरे को कम करना।