राज्यसभा में केंद्र का संकल्प
Aravalli Range Protection: दिल्ली स्थित अपर हाउस यानी राज्यसभा में पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने अरावली हिल्स की सुरक्षा को लेकर सरकार पक्का इरादा रखती है। यादव ने कहा कि पर्यावरण मंजूरी मिलने को लेकर पहले करीब 3 साल का समय लग जाता था, जिसे नरेन्द्र मोदी सरकार ने घटाकर 3 महीने कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा और वहां हरियाली बढ़ाने को लेकर पूरी तरह से तैयार है तथा इस क्षेत्र में वह अवैध खनन नहीं होने देगी। अरावली में गैरकानूनी खनन के आरोपों को लेकर कांग्रेस के जयराम रमेश और उनके बीच कई बार तीखी बहस हुई।

3 प्रमुख चुनौतियां थीं
Aravalli Range Protection: यादव ने कहा कि देश के पर्यावरण क्षेत्र की तीन प्रमुख चुनौतियां थीं जिनमें पर्यावरण मंजूरी के विषय, वन और जैव विविधता के विषय और क्लाइमेट चेंज के विषय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन विषयों के समाधान के लिए सभी विभागों को समग्रता से लेकर अपना रवैया तय किया। मंत्री ने कहा कि सरकार ने पर्यावरण के क्षेत्र नियम तय करने की मांग को देखते हुए पिछले दो साल में कुछ गाइडलाइंस जारी किए हैं। इस बीच, आसन की अनुमति से बोलते हुए कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने मंत्री को याद दिलाया कि जब वह यह काम कर रहे थे तो मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्य सरकार ने उस पर आपत्ति की थी।

Supreme Court के निर्णय का जिक्र
Aravalli Range Protection: इससे पहले, चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के नीरज डांगी ने अरावली पर्वतमाला के बारे में उच्चतम न्यायालय के निर्णय का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इस मामले में सरकार ने जो कदम उठाये हैं, वह किसे मदद पहुंचाने के लिए उठाये गये थे। इस मामले में जनाक्रोष को देखते हुए सरकार को झुकना पड़ा और अपना रुख बदलना पड़ा। यह सोचकर आश्चर्य होता है कि यदि जनता ने विरोध नहीं किया होता तो इस मामले में क्या परिणाम होता। मंत्री ने कहा कि जब 2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार आयी थी, तब देश में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या 757 थी जो आज 2026 में बढ़कर 1134 हो गयी है। पिछले 50 सालों में बाघ सरंक्षण को लेकर सभी सरकारों ने अच्छे प्रयास किये। विश्व के 70 प्रतिशत वन क्षेत्रों में रहने वाले 75 प्रतिशत टाइगर भारत के पास है। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि सरकार ने देश में पहली बार नदी डॉल्फिन की संख्या का अनुमान लगवाया है और 2025 में यह संख्या करीब 6327 होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि देश में वन क्षेत्र का आकार भी बढ़ा है।

सोनिया गांधी ने चिंता जताई
Aravalli Range Protection: हाल में केंद्र सरकार ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में एक बड़ी निर्माण परियोजना को मंजूरी दी है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस क्षेत्र में वन एवं पर्यावरण को लेकर अत्यधिक चिंता व्यक्त की है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि सोनिया गांधी ने एक लेख लिखकर कहा है कि निकोबार परियोजना सरकार के उन सब गलत कामों में अग्रणी है तथा 72 हजार करोड़ रूपये की यह परियोजना द्वीप के आदिवासियों के वजूद को ही खतरे में डालता है। उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के लेख का हवाला देते हुए कहा कि यह निकोबार द्वीप के पेड़-पौधों एवं जीव-जंतुओं को भी खतरे में डाल देगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को बिना सोचे समझे आगे बढ़ाया गया है।