राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से झटका! याचिका खारिज, हाई कोर्ट जाने की सलाह

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर उनकी याचिका अदालत ने खारिज कर दी। हालांकि कोर्ट ने उन्हें हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
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Meenakshi Natarajan: मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा चुनाव के लिए उनका नामांकन पत्र रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। हालांकि अदालत ने उन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन चाहें तो इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकती हैं। इसके साथ ही राज्यसभा चुनाव में उनके नामांकन को लेकर शुरू हुआ कानूनी विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है।
मैं पहले दिन से कह रही हूं कि चुनाव आयोग Compromised है।
ये बात आज फिर से साबित हो गई। यह मामला मध्य प्रदेश सरकार से जुड़ा नहीं था, फिर भी सुनवाई में प्रदेश सरकार की ओर से वकील खड़े दिखे।
हम राज्यों के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर के… pic.twitter.com/oXoiroSS7V
— Congress (@INCIndia) June 12, 2026
मीनाक्षी नटराजन की ओर से वकील ने दिए ये दलीलें
सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) के तहत किसी उम्मीदवार का नामांकन रद्द करने के लिए संबंधित मामले में आरोप तय होना जरूरी है। सिंघवी ने दलील दी कि मीनाक्षी नटराजन के मामले में अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं, ऐसे में उनका नामांकन रद्द किया जाना नियमों के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सिंघवी से पूछा कि क्या ऐसा कोई उदाहरण है, जहां नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को रद्द कर नामांकन स्वीकार करने का आदेश दिया हो। जवाब में सिंघवी ने कहा कि यदि तथ्य और परिस्थितियां उचित हों तो अदालत कानून के अनुसार फैसला कर सकती है।
भाजपा हुआ हमलावर
वहीं भाजपा उम्मीदवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि नामांकन पत्र रद्द होने से किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता, इसलिए संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं की जा सकती। रोहतगी ने यह भी तर्क दिया कि संविधान का अनुच्छेद 329 चुनावी प्रक्रिया के दौरान न्यायिक हस्तक्षेप पर रोक लगाता है और ऐसे मामलों का समाधान चुनाव संबंधी निर्धारित मंचों पर ही होना चाहिए।
मीनाक्षी नटराजन की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह केवल उनका व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों का समय पर जवाब नहीं दिया गया।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि मीनाक्षी नटराजन आगे हाई कोर्ट का रुख करती हैं या नहीं। यह मामला राज्यसभा चुनाव के बीच राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

