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हिंगोली में ACB की बड़ी कार्रवाई, 15 हजार की रिश्वत लेते दो भूमि सर्वेक्षक रंगे हाथ गिरफ्तार

हिंगोली में ACB की बड़ी कार्रवाई, 15 हजार की रिश्वत लेते दो भूमि सर्वेक्षक रंगे हाथ गिरफ्तार
हिंगोली में ACB की बड़ी कार्रवाई, 15 हजार की रिश्वत लेते दो भूमि सर्वेक्षक रंगे हाथ गिरफ्तार

हिंगोली में एंटी करप्शन ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भूमि अभिलेख कार्यालय के दो सर्वेक्षकों को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। खेत की मापन शीट देने के बदले 15 हजार रुपये मांगे गए थे। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को रकम सहित धर दबोचा।

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Dipali Kumari
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Hingoli ACB Action: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उप अधीक्षक भूमि अभिलेख कार्यालय के दो भूमि सर्वेक्षकों को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया, जिनमें उमेश मधुकर राउत और अविनाश नंदकिशोर गोरे शामिल हैं. यह कार्रवाई कल यानि 22 मई को की गई। आरोपियों ने खेत की माप गिनती की शीट देने के बदले रिश्वत की मांग की थी।

क्या है पूरा मामला?

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता की बासंबा क्षेत्र में कृषि भूमि है। खेत के आकार का मापन कराने के लिए शिकायतकर्ता ने विधिवत आवेदन कर निर्धारित शुल्क भी जमा किया था। इसके बाद उप अधीक्षक भूमि अभिलेख कार्यालय हिंगोली की ओर से खेत का मापन किया गया। मापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि सर्वेक्षक उमेश मधुकर राउत और अविनाश नंदकिशोर गोरे ने शिकायतकर्ता से मापक शीट उपलब्ध कराने के बदले रिश्वत की मांग की।

इससे परेशान होकर शिकायतकर्ता ने 22 मई को एसीबी हिंगोली कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि आरोपी सर्वेक्षक मापन पत्र की प्रति देने के लिए 15 हजार रुपये मांग रहे हैं। एसीबी ने शिकायत की प्राथमिक जांच की, जिसमें मामला सही पाया गया। इसके बाद आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए योजना बनाई गई।

प्लानिंग के साथ हुई गिरफ्तारी

कल शुक्रवार दोपहर शिकायतकर्ता को गवाह क्रमांक-1 के साथ आरोपियों से मिलने भेजा गया। भूमि अभिलेख कार्यालय में हुई बातचीत के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे पहले ही शिकायतकर्ता से 4 हजार रुपये ले चुके हैं और बाकी 11 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। तय योजना के अनुसार जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपियों को रिश्वत की रकम सौंपी, वहां मौजूद एसीबी टीम ने दोनों को रकम सहित रंगे हाथ पकड़ लिया।

कई अहम दस्तावेज बरामद

कार्रवाई के दौरान उमेश राउत के पास से आधार कार्ड, पैन कार्ड, सरकारी पहचान पत्र, मोबाइल और नकदी बरामद हुई, जबकि अविनाश गोरे के पास से एटीएम कार्ड, लाइसेंस, मोबाइल, सरकारी पहचान पत्र और नकदी जब्त की गई। दोनों आरोपियों के मोबाइल जांच के लिए जब्त कर लिए गए हैं और उनके घरों की तलाशी की प्रक्रिया जारी है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।