Maharashtra Politics: ‘ऑपरेशन टाइगर’ से बढ़ी सियासी हलचल, शिंदे गुट का दावा- उद्धव गुट के 6 सांसद हुए शामिल

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे गुट के छह लोकसभा सांसद उनके साथ आ गए हैं। 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा के बीच इस दावे ने राज्य की सियासत को गर्मा दिया है।
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Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की चर्चा तेज हो गई है। शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसद शिंदे गुट के साथ आ गए हैं। इस दावे के बाद राज्य की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।
‘ऑपरेशन टाइगर’ सफल- चंद्रकांत रघुवंशी
आज गुरुवार को मीडिया से बातचीत करते हुए चंद्रकांत रघुवंशी ने कहा कि महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ सफल हुआ है और छह सांसदों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए शिवसेना में शामिल होने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी और गठबंधन के लिए सकारात्मक संकेत है। रघुवंशी ने इन नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि जो भी जनहित में काम करना चाहता है, उसे शिवसेना और भाजपा के गठबंधन के साथ जुड़ना चाहिए।
महाराष्ट्र की राजनीति दोहराएगी इतिहास ?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ लोकसभा सांसदों में से सात सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं और वे पाला बदलने पर विचार कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो महाराष्ट्र में एक बार फिर वैसी ही राजनीतिक स्थिति बन सकती है जैसी वर्ष 2022 में देखने को मिली थी। उस समय एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी बगावत हुई थी, जिसके बाद शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी और राज्य की सत्ता में बड़ा बदलाव आया था।
लोकसभा अध्यक्ष के हाथ में फैसला
‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए कथित पत्र पर भी राजनीतिक बहस जारी है। प्रतापराव जाधव ने कहा कि यह मामला अब लोकसभा अध्यक्ष के विचाराधीन है और अंतिम फैसला वही करेंगे। उन्होंने इसे शिवसेना (यूबीटी) का आंतरिक मामला बताया।
शिवसेना के स्थापना दिवस से ठीक पहले आए इन दावों ने महाराष्ट्र की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में उद्धव ठाकरे गुट से कितने नेता शिंदे गुट का दामन थामते हैं और इसका राज्य की सियासत पर क्या असर पड़ता है।

