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Maharashtra Politics: ‘ऑपरेशन टाइगर’ से बढ़ी सियासी हलचल, शिंदे गुट का दावा- उद्धव गुट के 6 सांसद हुए शामिल

Maharashtra Politics: ‘ऑपरेशन टाइगर’ से बढ़ी सियासी हलचल, शिंदे गुट का दावा- उद्धव गुट के 6 सांसद हुए शामिल
Maharashtra Politics: 'ऑपरेशन टाइगर' से बढ़ी सियासी हलचल, शिंदे गुट का दावा- उद्धव गुट के 6 सांसद हुए शामिल

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे गुट के छह लोकसभा सांसद उनके साथ आ गए हैं। 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा के बीच इस दावे ने राज्य की सियासत को गर्मा दिया है।

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Dipali Kumari
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Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की चर्चा तेज हो गई है। शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसद शिंदे गुट के साथ आ गए हैं। इस दावे के बाद राज्य की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।

‘ऑपरेशन टाइगर’ सफल- चंद्रकांत रघुवंशी

आज गुरुवार को मीडिया से बातचीत करते हुए चंद्रकांत रघुवंशी ने कहा कि महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ सफल हुआ है और छह सांसदों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए शिवसेना में शामिल होने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी और गठबंधन के लिए सकारात्मक संकेत है। रघुवंशी ने इन नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि जो भी जनहित में काम करना चाहता है, उसे शिवसेना और भाजपा के गठबंधन के साथ जुड़ना चाहिए।

महाराष्ट्र की राजनीति दोहराएगी इतिहास ?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ लोकसभा सांसदों में से सात सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं और वे पाला बदलने पर विचार कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो महाराष्ट्र में एक बार फिर वैसी ही राजनीतिक स्थिति बन सकती है जैसी वर्ष 2022 में देखने को मिली थी। उस समय एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी बगावत हुई थी, जिसके बाद शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी और राज्य की सत्ता में बड़ा बदलाव आया था।

लोकसभा अध्यक्ष के हाथ में फैसला

‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए कथित पत्र पर भी राजनीतिक बहस जारी है। प्रतापराव जाधव ने कहा कि यह मामला अब लोकसभा अध्यक्ष के विचाराधीन है और अंतिम फैसला वही करेंगे। उन्होंने इसे शिवसेना (यूबीटी) का आंतरिक मामला बताया।

शिवसेना के स्थापना दिवस से ठीक पहले आए इन दावों ने महाराष्ट्र की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में उद्धव ठाकरे गुट से कितने नेता शिंदे गुट का दामन थामते हैं और इसका राज्य की सियासत पर क्या असर पड़ता है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।