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मुंबई/महाराष्ट्र में ऑटो परमिट बंद, पर ई-ऑटो को छूट? – चालक संघटना ने दी आंदोलन की चेतावनी

मुंबई/महाराष्ट्र में ऑटो परमिट बंद, पर ई-ऑटो को छूट? – चालक संघटना ने दी आंदोलन की चेतावनी
Maharashtra Auto Rickshaw Permit Ban: महाराष्ट्र में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने नए ऑटो रिक्शा परमिट बंद करने की घोषणा की। चालक संगठनों ने कहा कि यदि पारंपरिक ऑटो पर रोक है तो ई-ऑटो और ई-रिक्शा पर भी समान नियम लागू होने चाहिए। (PHOTO:AI)

Maharashtra Auto Rickshaw Permit Ban: महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने राज्य में ऑटो रिक्शा के नए परमिट बंद करने की घोषणा की है। इस फैसले का कुछ चालक संगठनों ने स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने मांग की है कि यदि पारंपरिक ऑटो रिक्शा पर रोक लगाई जाती है तो ई-ऑटो और ई-रिक्शा पर भी समान नियम लागू किए जाएं।

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Asfi Shadab
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महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा के नए परमिट बंद करने की घोषणा

Maharashtra Auto Rickshaw Permit Ban: मुंबई/महाराष्ट्र। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने शुक्रवार को घोषणा की कि अब पूरे महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा के नए परमिट जारी नहीं किए जाएंगे। इस फैसले का ऑटो रिक्शा चालक-मालिक संघटना संयुक्त कृती समिति ने स्वागत किया है — लेकिन साथ ही एक बड़ी शर्त भी रख दी है।

संघटना के सरचिटणीस विलास भालेकर ने स्पष्ट कहा कि यदि परंपरागत ऑटो रिक्शा के परमिट बंद कर केवल ई-ऑटो और ई-रिक्शा को छूट दी गई, तो यह चालकों के साथ सरासर अन्याय होगा।

भालेकर ने सवाल उठाया — “परिवहन मंत्री ने कहा कि ऑटो रिक्शा से यातायात में बाधा होती है। लेकिन यदि ई-ऑटो और ई-रिक्शा को अनुमति दी जाती है, तो क्या वे ट्रैफिक नहीं बढ़ाएंगे? सड़कों पर वाहन बढ़ेंगे तो जाम तो रहेगा ही।”

चालक संगठनों ने ई-रिक्शा पर भी समान नियम लागू करने की मांग उठाई

संघटना ने परिवहन मंत्री से विनम्र अपील की है कि यदि परमिट पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है, तो यह नियम ई-ऑटो और ई-रिक्शा पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए।

भालेकर ने चेतावनी दी कि अगर सरकार न्यायपूर्ण और समान निर्णय नहीं लेती, तो महाराष्ट्र भर के ऑटो चालक और मालिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए राज्यव्यापी आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

अब नजरें परिवहन विभाग की अगली अधिसूचना पर टिकी हैं, जिसमें स्पष्ट होगा कि ई-वाहनों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा जाएगा या नहीं।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।