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नागपुर में सन्मित्र सभा द्वारा आयोजित बंधुत्व निर्माण करना आज की सबसे बड़ी जरूरत : डॉ. रमेश पांडव

नागपुर में सन्मित्र सभा द्वारा आयोजित बंधुत्व निर्माण करना आज की सबसे बड़ी जरूरत : डॉ. रमेश पांडव
Bandhutva Nirmaan: नागपुर में बंधुता परिषद में समाज में एकता और भाईचारे की जरूरत पर जोर

नागपुर में सन्मित्र सभा द्वारा आयोजित बंधुता परिषद में डॉ. रमेश पांडव ने समाज में बंधुत्व निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अतीत में उलझने के बजाय वर्तमान में एकता और भाईचारा बढ़ाना जरूरी है। डॉ. आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बंधुत्व को समाज की नींव बताया और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई।

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Asfi Shadab
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समाज में आज जिस तरह से आपसी तनाव, भेदभाव और अलगाव की भावना बढ़ती जा रही है, उससे निपटने के लिए बंधुत्व और भाईचारे का निर्माण समय की सबसे बड़ी मांग बन गया है। नागपुर में सन्मित्र सभा द्वारा आयोजित बंधुता परिषद में समरसता गतिविधि के अखिल भारतीय सेवावस्ती प्रमुख डॉ. रमेश पांडव ने इसी विषय पर गहन चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि हम चाहते हैं कि समाज में शांति, प्रगति और विकास हो, तो सबसे पहले हमें एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम का भाव जगाना होगा।

इस कार्यक्रम में मंच पर अरुण रारोकर, राजन भूत तथा डॉ. प्रा. सुधाकर इंगळे भी मौजूद थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए और इस विषय पर खुलकर चर्चा हुई। यह आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने और लोगों को एक साथ लाने के उद्देश्य से किया गया था।

बीते समय में उलझे रहने से बेहतर है वर्तमान पर ध्यान देना

डॉ. पांडव ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि अतीत में जो कुछ हुआ, उस पर अटके रहने से कोई लाभ नहीं है। कौन सही था और कौन गलत, इस पर बहस करने के बजाय आज की जरूरतों पर ध्यान देना अधिक उचित है। उन्होंने कहा कि समाज में जो दरारें पैदा हो गई हैं, उन्हें भरने के लिए ईमानदार और सच्चे प्रयास करने होंगे। आहत मनों को जोड़ने के लिए संवाद और समझदारी की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि यदि हम केवल अतीत की गलतियों को गिनाते रहेंगे, तो भविष्य की दिशा में कभी नहीं बढ़ पाएंगे। आज का समय मांग करता है कि हम आपसी मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे का हाथ थामें और मिलकर समाज के विकास की ओर बढ़ें।

Bandhutva Nirmaan: नागपुर में बंधुता परिषद में समाज में एकता और भाईचारे की जरूरत पर जोर
Bandhutva Nirmaan: नागपुर में बंधुता परिषद में समाज में एकता और भाईचारे की जरूरत पर जोर

समाज की प्रगति के लिए बंधुभाव अनिवार्य

डॉ. पांडव ने समाज की प्रगति और विकास के लिए बंधुभाव को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती उसकी एकता और भाईचारे में निहित होती है। यदि समाज में बंटवारा होगा, तो विकास की गति धीमी हो जाएगी। इसलिए हमें समान सूत्रों की खोज करनी चाहिए जो हमें जोड़ सकें।

उन्होंने कहा कि नए युग की शुरुआत के लिए हमें खुले मन से संवाद करना होगा। आमने-सामने बैठकर बात करने से ही सच्चा बंधुत्व विकसित हो सकता है। केवल औपचारिकताओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि दिल से एक-दूसरे को समझने और स्वीकार करने की जरूरत है।

Bandhutva Nirmaan: नागपुर में बंधुता परिषद में समाज में एकता और भाईचारे की जरूरत पर जोर
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डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों का संदर्भ

कार्यक्रम में डॉ. रमेश पांडव ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि बंधुत्व के बिना स्वतंत्रता और समानता का कोई मतलब नहीं है। डॉ. आंबेडकर ने हमेशा समाज में बंधुता को सर्वोच्च मूल्य माना था। उनका मानना था कि यदि समाज में आपसी सम्मान और प्रेम नहीं है, तो चाहे कितनी भी स्वतंत्रता हो या समानता हो, वह व्यर्थ है।

डॉ. पांडव ने कहा कि इस विचार को साकार करने के लिए सही संस्कार और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को भी यह संदेश देना होगा कि बंधुत्व ही समाज की नींव है। बचपन से ही बच्चों में सहिष्णुता, सम्मान और प्रेम के संस्कार डालने होंगे।

Bandhutva Nirmaan: नागपुर में बंधुता परिषद में समाज में एकता और भाईचारे की जरूरत पर जोर
Bandhutva Nirmaan: नागपुर में बंधुता परिषद में समाज में एकता और भाईचारे की जरूरत पर जोर

प्रश्नोत्तर सत्र में सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में एक प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित लोगों ने डॉ. पांडव से कई सवाल पूछे। लोगों ने समाज में बढ़ती दूरियों, जातिगत भेदभाव, धार्मिक तनाव और राजनीतिक विभाजन जैसे मुद्दों पर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। डॉ. पांडव ने सभी सवालों का धैर्य और समझदारी से जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि समस्याएं तो हैं, लेकिन समाधान भी हमारे पास ही है। हमें केवल सकारात्मक सोच और सच्ची इच्छाशक्ति की जरूरत है। यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास करे, तो बड़े बदलाव संभव हैं।

Bandhutva Nirmaan: नागपुर में बंधुता परिषद में समाज में एकता और भाईचारे की जरूरत पर जोर
Bandhutva Nirmaan: नागपुर में बंधुता परिषद में समाज में एकता और भाईचारे की जरूरत पर जोर

सम्मान और पुरस्कार वितरण

कार्यक्रम के दौरान समाजभूषण और नागरी पुरस्कारों से कई मान्यवरों को सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों के माध्यम से उन लोगों को मान्यता दी गई, जिन्होंने समाज में बंधुत्व, सेवा और सामाजिक समरसता की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया है। सम्मानित व्यक्तियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और कहा कि बंधुत्व समाज की असली ताकत है।

इस अवसर पर मंच पर मौजूद अरुण रारोकर और राजन भूत ने भी संक्षिप्त संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और लोगों में सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायक होते हैं।

बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति

इस कार्यक्रम में नागपुर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए। विभिन्न जाति, धर्म और समुदाय के लोग एक साथ एक मंच पर आए और बंधुत्व के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। यह दृश्य अपने आप में एक संदेश था कि यदि हम चाहें तो सभी भेदभाव मिटाकर एक साथ रह सकते हैं।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में बंधुत्व के मूल्यों को अपनाएंगे और समाज में शांति, सद्भाव और प्रेम का संदेश फैलाएंगे।

समरसता ही समाज की नींव

डॉ. रमेश पांडव के इस संबोधन ने उपस्थित सभी लोगों को गहराई से सोचने पर मजबूर किया। उन्होंने समाज में फैल रहे विभाजन और तनाव की जड़ों को समझाया और यह भी बताया कि हम कैसे छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव ला सकते हैं।

उन्होंने कहा कि समरसता और बंधुत्व केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि ये जीवन जीने का तरीका है। यदि हम दूसरों के दुख-सुख को अपना समझें, तो समाज में अपने आप ही सकारात्मक बदलाव आएंगे।

यह आयोजन नागपुर में समाज को एक नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। सन्मित्र सभा और डॉ. रमेश पांडव जैसे समाजसेवियों के प्रयास निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होंगे।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।