नागपुर में पारंपरिक चिकित्सा पर राष्ट्रीय मंथन बैठक आयोजित

नागपुर में हुई राष्ट्रीय बैठक में भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को वैश्विक पहचान दिलाने और पारंपरिक वैद्यों के ज्ञान को सुरक्षित रखने पर चर्चा हुई।
विषयसूची
‘गाथा’ के जरिए देशभर के पारंपरिक वैद्यों की जानकारी होगी एकत्र
प्राचीन भारतीय प्राकृतिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में पहल शुरू की गई है। इसके तहत देशभर में पारंपरिक तरीके से उपचार करने वाले वैद्यों के ज्ञान और उनकी उपचार पद्धतियों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है। यह बात राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने कही। विश्वविद्यालय के जमनालाल बजाज प्रशासनिक भवन में रविवार को देशभर के पारंपरिक प्राकृतिक उपचार करने वाले वैद्यों की राष्ट्रीय मंथन बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने की। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों और संगठनों से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हुए।
देशभर के पारंपरिक वैद्यों की जानकारी जुटाई जाएगी
कुलगुरु डॉ. क्षीरसागर ने बताया कि ग्लोबल अलायंस फॉर ट्रेडिशनल हेलर्स एडवांसमेंट यानी ‘गाथा’ के जरिए देशभर के पारंपरिक वैद्यों और उनकी उपचार पद्धतियों की जानकारी जुटाई जाएगी। उन्होंने कहा कि तकनीक को वैद्यों तक पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से स्वयंसेवकों की मदद उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि पारंपरिक प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य इस ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और व्यवस्थित तरीके से संरक्षित करना है।

वेबसाइट और एआई की मदद से सुरक्षित होगा पारंपरिक ज्ञान
इम्मव्हर्स एआई एवं भारतीय जीपीटी के संस्थापक आर. रामकृष्णन ने कहा कि वेबसाइट, मोबाइल ऐप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से देशभर के वैद्यों, औषधीय पौधों और पारंपरिक उपचार विधियों से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस जानकारी को बौद्धिक संपदा के रूप में सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाएगा, ताकि पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित किया जा सके।

औषधीय पौधों और पारंपरिक उपचार पर जोर
राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ. अरविंद रानडे ने कहा कि भारत औषधीय वनस्पतियों के मामले में समृद्ध है। उन्होंने पारंपरिक उपचार पद्धतियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जरूरत बताई। विश्व स्वास्थ्य संगठन के तकनीकी अधिकारी डॉ. जी. गीताकृष्णन ने पारंपरिक वैद्यों के सम्मान और उनके पीढ़ियों पुराने ज्ञान को सुरक्षित रखने पर जोर दिया। कार्यक्रम में आयुर्वेद जड़ी-बूटी शब्दकोश का विमोचन किया गया। इसके साथ ही ‘गाथा’ मोबाइल ऐप और वेबसाइट भी लॉन्च की गई। बैठक के दौरान अलग-अलग सत्रों में पारंपरिक उपचार पद्धतियों के संरक्षण और उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने को लेकर चर्चा की गई। कार्यक्रम में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय महामंत्री विवेकानंद पाई, नागपुर फार्माकॉन फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. पुष्पहास बल्लाळ, आयुष मंत्रालय के सलाहकार डॉ. मनोज नेसारी और वरिष्ठ वैद्य निर्मलकुमार अवस्थी सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र
एडिट: शिंकी सिंह

