नागपुर में नाट्य लेखक किशोर लालवानी के सिंधी नाटकों के संग्रह ‘बलिदान’ का हुआ विमोचन

Kishore Lalwani Balidan Book Launch: नागपुर में सिंधु स्मृति दिवस कार्यक्रम के दौरान नाट्य लेखक किशोर लालवानी के सिंधी नाटकों के संग्रह ‘बलिदान’ का विमोचन किया गया। इसमें सिंधु सम्राट डाहिरसेन, शहीद हेमू कालानी और संत कंवरराम के जीवन पर आधारित तीन नाटक शामिल हैं। कार्यक्रम में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख अतिथि उपस्थित रहे।
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सिंधु स्मृति दिवस पर ‘बलिदान’ नाटक संग्रह का विमोचन
Kishore Lalwani Balidan Book Launch: नागपुर में नाट्य लेखक किशोर लालवानी के सिंधी नाटकों के संग्रह ‘बलिदान’ का विमोचन किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद, नई दिल्ली तथा भारतीय सिंधू सभा सांस्कृतिक मंच, नागपुर के संयुक्त तत्वावधान में विभाजन की विभीषिका (सिंधु स्मृति दिवस) कार्यक्रम के अवसर पर हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सह संघचालक श्रीधरराव गाडगे ने की। प्रमुख अतिथियों में शदाणी दरबार तीर्थ, रायपुर के संत साईं उदयलाल, कंवरधाम अमरावती के साईं राजेशलाल, आरएसएस के महानगर संघचालक राजेश लोया, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य गिरीश व्यास तथा सदर विभाग नागपुर के संघचालक अनिल भारद्वाज शामिल रहे। विशेष अतिथि के रूप में भाजपा व्यापारी आघाड़ी, महाराष्ट्र के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र कुकरेजा तथा नगरसेविका प्रमिला मथरानी उपस्थित थीं। भारतीय सिंधू सभा के राष्ट्रीय संरक्षक घनश्याम कुकरेजा भी मंच पर मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। अतिथियों ने भगवान झूलेलाल, भारत माता, केशव बलिराम हेडगेवार और गुरुजी गोलवलकर के चित्रों पर माल्यार्पण किया।
तीन महान बलिदानियों के जीवन पर आधारित हैं संग्रह के नाटक
विमोचन के अवसर पर घनश्याम कुकरेजा ने कहा कि “बलिदान” संग्रह में किशोर लालवानी ने सिंधी समाज के तीन महान बलिदानियों सिंधु सम्राट डाहिरसेन, क्रांतिकारी शहीद हेमू कालानी और अमर शहीद संत कंवरराम के जीवन को नाट्य रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि इन तीनों नाटकों का देश के विभिन्न शहरों में कई बार मंचन हो चुका है, और अब पुस्तक रूप में प्रकाशित होने से अन्य नाट्य संस्थाओं को भी लाभ मिलेगा।
महाराष्ट्र राज्य सिंधी साहित्य अकादमी के पूर्व सदस्य तुलसी सेतिया ने कहा कि लालवानी हिंदी और सिंधी दोनों भाषाओं में निरंतर लेखन कर रहे हैं तथा अभिनेता, पटकथा और संवाद लेखक के रूप में सिंधी फिल्मों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
वीरेंद्र कुकरेजा ने कहा कि अन्य साहित्यिक विधाओं की तुलना में नाटककारों की संख्या कम है, क्योंकि नाटक लेखन कठिन कार्य है। उन्होंने लालवानी के सरल, सहज और बोधगम्य नाटकों की सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन संगीता दलवानी ने किया। लालवानी की यह पुस्तक अब सिंधी साहित्य और नाट्य जगत में नए संदर्भ ग्रंथ के रूप में उपयोग की जा सकेगी।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

