महाराष्ट्र में डिजिटल खनिज प्रबंधन की बड़ी पहल, अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए नई प्रणाली लागू

Maharashtra digital mineral management ILMS 2.0: महाराष्ट्र में खनिज प्रबंधन के लिए आईएलएमएस 2.0 डिजिटल प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत खनिज की खरीद, बिक्री, उत्पादन और परिवहन की जानकारी ऑनलाइन दर्ज होगी। परिवहन वाहनों में जीपीएस अनिवार्य किया गया है और खदानों की सैटेलाइट से निगरानी होगी। कोयले को भी प्रणाली में शामिल किया गया है और इसे जीएसटी विभाग से जोड़ने का काम जारी है।
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खनिज कारोबार की डिजिटल निगरानी होगी मजबूत
Maharashtra digital mineral management ILMS 2.0: नागपुर: महाराष्ट्र सरकार ने खनिज प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के लिए ‘आईएलएमएस 2.0’ नामक नई डिजिटल प्रणाली लागू की है। इससे खनन, परिवहन और भंडारण से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं अब ऑनलाइन दर्ज होंगी, जिससे अवैध खनिज कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और खनिज एवं खनिकर्म मंत्री शंभूराज देसाई के निर्देश पर विभाग ने यह अत्याधुनिक प्रणाली अपनाई है। खदान से खनिज निकलने से लेकर उसकी बिक्री और उपयोग तक की पूरी जानकारी अब ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी।
वाहनों में जीपीएस अनिवार्य
खनिज परिवहन करने वाले हर वाहन में जीपीएस लगाना जरूरी होगा। मार्ग तय रहेगा और रास्ता बदलने या संदिग्ध गतिविधि पर सिस्टम तुरंत अलर्ट भेजेगा। खनिज उतारने के बाद रसीद मोबाइल पर मिलेगी, और केवल पंजीकृत व्यक्ति ही खरीद कर सकेगा।
जीपीएस और सैटेलाइट से खदानों और वाहनों पर रहेगी नजर
लौह अयस्क, मैंगनीज, बॉक्साइट और चूना पत्थर पहले से इस प्रणाली में थे। अब वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड डब्ल्यूसीएल (WCL) के सहयोग से कोयले को भी जोड़ा गया है। करीब 65 प्रतिशत कोयला वॉशरीज, व्यापारी और बिजली परियोजनाएं इससे जुड़ चुकी हैं, जिससे कोयला चोरी पर भी नियंत्रण आने की उम्मीद है।
सैटेलाइट से निगरानी
हर खदान का सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर जियो-फेंसिंग मैप बनाया गया है, जिससे खनन क्षेत्र से बाहर ट्रांजिट पास जारी नहीं हो सकेगा। भविष्य में इसे राजमार्गों के टोल नाकों से जोड़कर ‘पैसिव ट्रैकिंग’ शुरू करने का प्रस्ताव है।
अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्र और भूविज्ञान एवं खनिकर्म संचालनालय के महानिदेशक डॉ. टी.आर.के. राव के मार्गदर्शन में यह प्रणाली विकसित की गई है। इसे जीएसटी विभाग से जोड़ने का काम भी चल रहा है, जिससे राजस्व नुकसान कम होगा।
आने वाले समय में इस प्रणाली के टोल नाकों से जुड़ने पर निगरानी और सख्त हो जाएगी।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

