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नागपुर में मंदार मुळे को प्रतिष्ठित आईएसई यात्रा अनुदान

नागपुर में मंदार मुळे को प्रतिष्ठित आईएसई यात्रा अनुदान
Mandar Mule ISE Travel Grant 2026 Nagpur University: नागपुर में मंदार मुळे को प्रतिष्ठित आईएसई यात्रा अनुदान (Photo: RB / Jassi)

मंदार मुळे आईएसई यात्रा अनुदान 2026 नागपुर विश्वविद्यालय: नागपुर विश्वविद्यालय के औषधनिर्माणशास्त्र विभाग के मंदार महेंद्र मुळे को आईएसई (ISE) यात्रा अनुदान-2026 मिला। उन्होंने इटली के फोलिग्नो में आयोजित आईएसई (ISE) की 25वीं अंतरराष्ट्रीय परिषद में न्यूरोपैथिक दर्द के उपचार में अशोक के पत्ते और छाल के अर्क पर अपना शोध प्रस्तुत किया। उनके शोध को आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड से भी सहयोग मिला है।

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Asfi Shadab
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इटली में मंदार मुळे ने प्रस्तुत किया शोध

मंदार मुळे आईएसई यात्रा अनुदान 2026 नागपुर विश्वविद्यालय: नागपुर, 1 अक्टूबर। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के औषधनिर्माणशास्त्र विभाग के मंदार महेंद्र मुळे को इंटरनेशनल सोसायटी फॉर एथ्नोफार्माकोलॉजी आईएसई (ISE) की ओर से प्रतिष्ठित आईएसई यात्रा अनुदान-2026 प्रदान किया गया है। इस अवसर पर उन्होंने इटली के फोलिग्नो में 14 से 17 सितंबर 2026 के दौरान आयोजित आईएसई (ISE) की 25वीं अंतरराष्ट्रीय परिषद में अपना शोध प्रस्तुत किया।

मंदार मुळे ने “न्यूरोपैथिक दर्द के उपचार में अशोक के पत्ते और छाल के अर्क का कम्प्यूटेशनल, फार्माकोग्नॉस्टिकल और फार्माकोलॉजिकल मूल्यांकन” विषय पर शोध प्रस्तुत किया। यह शोध उन्होंने पीएचडी अध्ययन के दौरान अपने मार्गदर्शक डॉ. प्रकाश ईटणकर के मार्गदर्शन में पूरा किया। इस शोध को भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड एनएमपीबी (NMPB) की ओर से परियोजना क्रमांक आर एंड डी/एमएच-01/2021-22 (R&D/MH-01/2021-22) के अंतर्गत सहयोग प्राप्त हुआ है।

अशोक के पत्ते और छाल पर किया अध्ययन

मंदार वर्तमान में इंदिरा यूनिवर्सिटी, पुणे के स्कूल ऑफ फार्मेसी में फार्माकोग्नॉसी विषय के सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने शोध कार्य में मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए पीएचडी मार्गदर्शक डॉ. प्रकाश ईटणकर तथा नागपुर विश्वविद्यालय के औषधनिर्माणशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र काकडे के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही, स्कूल ऑफ फार्मेसी, इंदिरा यूनिवर्सिटी से मिले प्रोत्साहन और सहयोग के लिए भी आभार जताया।

इस प्रतिष्ठित मान्यता को भारतीय शोध क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह वैश्विक वैज्ञानिक मंच पर भारतीय शोधकर्ताओं की गुणवत्ता, समर्पण और बढ़ती उपस्थिति को भी रेखांकित करती है।

इस उपलब्धि पर कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर, प्र-कुलगुरु डॉ. अखिलेश पेशवे, कुलसचिव डॉ. विजय खंडाळ, विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र काकडे और डॉ. प्रकाश ईटणकर सहित विभाग के सभी शिक्षकों ने उन्हें अभिनंदन दिया।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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