नागपुर में डीजे विरोधी जनचेतना मुहिम को न्यायालयीन कार्रवाई से मिला बल

नागपुर डीजे बंदी उच्च न्यायालय आदेश: नागपुर में तेज आवाज वाले डीजे और लेजर बीम लाइट के खिलाफ नागरिक मुहिम को न्यायालयीन कार्रवाई से बल मिला है। मुंबई उच्च न्यायालय ने ध्वनि प्रदूषण का स्वतः संज्ञान लिया। नागपुर खंडपीठ ने प्रतिबंध तोड़ने वाले गणेश मंडलों की अनुमति रद्द करने पर पुलिस से जवाब मांगा। 136 मंडलों ने डीजे नहीं बजाने का आश्वासन दिया है।
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नागपुर में डीजे और ध्वनि प्रदूषण पर बढ़ी नजर
नागपुर डीजे बंदी उच्च न्यायालय आदेश: नागपुर में त्योहारों के दौरान ध्वनि प्रदूषण, तेज डीजे और लेजर बीम लाइट के खिलाफ चल रही नागरिक मुहिम को अब न्यायालयीन कार्रवाई से बल मिला है। मुंबई हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से कानूनों के प्रभावी अमल की जानकारी मांगी है। नागपुर खंडपीठ ने भी प्रशासन से डीजे प्रतिबंध के पालन पर जवाब तलब किया।
यह मुहिम पूर्व विधायक एवं पूर्व महापौर संदीप जोशी के नेतृत्व में शुरू हुई थी। इसमें डीजे बंदी की मांग, हस्ताक्षर अभियान, प्रशासन को ज्ञापन और जनजागरण शामिल रहे। 13 सितंबर को लक्ष्मीभुवन चौक से शांतता मार्च निकाला गया, जिसमें सामाजिक संस्थाओं, चिकित्सकों और नागरिकों ने भाग लिया।
136 गणेश मंडलों ने डीजे नहीं बजाने का दिया आश्वासन
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि किसी धर्म, त्योहार या शोभायात्रा का विरोध नहीं है, बल्कि केवल अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण और लेजर बीम लाइट के इस्तेमाल का विरोध है। पारंपरिक वाद्य, ढोल-ताशे और भजन अपनाने की अपील की गई, जिसके बाद शहर के 136 गणेश मंडलों ने डीजे नहीं बजाने का आश्वासन पत्र दिया।
23 सितंबर की सुनवाई में नागपुर खंडपीठ ने पुलिस से पूछा कि प्रतिबंध तोड़ने वाले गणेश मंडलों की अनुमति रद्द क्यों नहीं की जाती। इससे पहले 21 सितंबर को मुंबई हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण पर स्वतः संज्ञान लिया था और कहा था कि उत्सवों पर आपत्ति नहीं, पर नागरिकों के अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए। 22 सितंबर की सुनवाई में भी सरकार से उपायों की जानकारी मांगी गई।
आगे यह देखना अहम होगा कि न्यायालयीन निर्देशों का सभी त्योहारों में समान रूप से कितना सख्ती से पालन होता है।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

