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ED रेड के बाद बंगाल में सियासी उबाल, आज सड़क पर उतरेंगी ममता; दिल्ली में अमित शाह के घर के बाहर हल्लाबोल

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आई-पैक पर ईडी की छापेमारी के बाद पश्चिम बंगाल में सियासी टकराव तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे बदले की राजनीति बताते हुए विरोध रैली का ऐलान किया है। वहीं दिल्ली में टीएमसी सांसदों ने गृह मंत्री के कार्यालय के बाहर धरना दिया है।

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Dipali Kumari
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ED Raid I-PAC: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर केंद्र और राज्य के आमने-सामने खड़े होने की तस्वीर पेश कर रही है। राजनीतिक सलाहकार संस्था आई-पैक (I-PAC) के कोलकाता स्थित कार्यालय और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी ने न केवल प्रशासनिक हलकों में हलचल मचाई, बल्कि सियासी माहौल को भी अचानक गरमा दिया है। इस कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिस तरह सड़कों पर उतरने का फैसला किया, उसने इस पूरे घटनाक्रम को एक सामान्य जांच से आगे बढ़ाकर राजनीतिक संघर्ष का रूप दे दिया है।

ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि यह कार्रवाई किसी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति और आंतरिक ढांचे को कमजोर करने की कोशिश है। यही वजह है कि यह मामला अब केवल ईडी की रेड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकतंत्र, संघीय ढांचे और एजेंसियों की भूमिका पर बहस का मुद्दा बन गया है।

I-PAC पर छापेमारी और मुख्यमंत्री की त्वरित प्रतिक्रिया

गुरुवार को जैसे ही ईडी की टीम ने कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित आई-पैक के कार्यालय और प्रतीक जैन के आवास पर तलाशी शुरू की, राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। कुछ ही घंटों के भीतर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं प्रतीक जैन के आवास पर पहुंच गईं। कोलकाता पुलिस आयुक्त के वहां पहुंचने के कुछ मिनट बाद मुख्यमंत्री का अचानक वहां पहुंचना इस बात का संकेत था कि राज्य सरकार इस कार्रवाई को कितनी गंभीरता से ले रही है।

ममता बनर्जी लगभग 20–25 मिनट तक वहां रहीं और बाहर निकलते समय उनके हाथ में हरे रंग का एक फोल्डर देखा गया। इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी तृणमूल कांग्रेस से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज, हार्ड डिस्क और चुनावी रणनीति से संबंधित डेटा जब्त करने की कोशिश कर रही थी।

विरोध रैली का ऐलान, सड़क पर उतरने की तैयारी

ईडी की कार्रवाई के विरोध में ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में एक बड़ी रैली का नेतृत्व करने का ऐलान किया है। यह रैली जादवपुर 8बी बस स्टैंड से हाजरा क्रॉसिंग तक निकाली जाएगी, जिसकी लंबाई पांच किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है। मुख्यमंत्री ने आम लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं से इसमें बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।

ममता का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ तृणमूल कांग्रेस की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की है। उनके मुताबिक, केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों को डराया जा रहा है।

‘बदले की राजनीति’ का आरोप और अमित शाह पर निशाना

ममता बनर्जी ने इस पूरी कार्रवाई को सीधे तौर पर बदले की राजनीति करार दिया है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला करते हुए कहा कि संवैधानिक एजेंसियों का इस तरह उपयोग लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को अपने गृह मंत्री पर नियंत्रण रखना चाहिए।

मुख्यमंत्री के इस बयान ने साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को केवल राज्य तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इसे राष्ट्रीय बहस का रूप देने की तैयारी में है।

आई-पैक और तृणमूल कांग्रेस का संबंध

आई-पैक केवल एक राजनीतिक परामर्श संस्था नहीं है, बल्कि वह तृणमूल कांग्रेस के आईटी और मीडिया संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। विधानसभा चुनावों से लेकर संगठनात्मक रणनीति तक, आई-पैक का प्रभाव बंगाल की राजनीति में साफ दिखाई देता है। यही वजह है कि इस संस्था पर ईडी की कार्रवाई को तृणमूल कांग्रेस सीधे तौर पर अपने चुनावी ढांचे पर हमला मान रही है।

विपक्ष का पलटवार और संवैधानिक सवाल

इस पूरे मामले पर विपक्ष ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पर केंद्रीय एजेंसियों के कामकाज में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त का ईडी रेड के दौरान वहां पहुंचना न केवल अनैतिक है, बल्कि जांच प्रक्रिया में सीधा दखल भी है।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि आखिर एक निजी राजनीतिक परामर्श फर्म के पास किसी पार्टी के आंतरिक दस्तावेज क्यों मौजूद थे।

दिल्ली में टीएमसी सांसदों का धरना

कोलकाता की सियासी गर्मी अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है। तृणमूल कांग्रेस के आठ सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया है। इन सांसदों में डेरेक ओ’ब्रायन, महुआ मोइत्रा, शताब्दी रॉय, साकेत गोखले और अन्य नेता शामिल हैं।

टीएमसी सांसदों का कहना है कि ईडी की रेड केंद्र सरकार के इशारे पर कराई गई है ताकि पार्टी के चुनावी अभियान को नुकसान पहुंचाया जा सके।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।