TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह! राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने छोड़े सभी पद, बीजेपी में जाने की अटकलें तेज

तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। इससे पहले भी पार्टी के कई नेता नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।
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Sushmita Dev: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इन दिनों लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और नेताओं के इस्तीफों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी है। ताजा घटनाक्रम में राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस सप्ताह टीएमसी छोड़ने वाली वह दूसरी राज्यसभा सांसद हैं, जिससे पार्टी में बढ़ते असंतोष की चर्चा तेज हो गई है।
दिल्ली: TMC की पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से उनके आवास पर मुलाकात की। pic.twitter.com/ANZcUyXQqs
— IANS Hindi (@IANSKhabar) June 10, 2026
भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज
53 वर्षीय सुष्मिता देव ने साल 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। उस समय उन्होंने जनसेवा और नई राजनीतिक पारी की बात कही थी। हालांकि अब उनके इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, सुष्मिता देव जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो सकती हैं। इन अटकलों को उस समय और बल मिला, जब इस्तीफा देने के बाद उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की।
कौन हैं सुष्मिता देव?
सुष्मिता देव असम के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष मोहन देव की बेटी हैं। वह कांग्रेस की महिला इकाई ‘ऑल इंडिया महिला कांग्रेस’ की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। राजनीति में उनकी पहचान एक प्रभावशाली महिला नेता के रूप में रही है। वह असम के सिलचर लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी रह चुकी हैं, जिसे उनके पिता का राजनीतिक गढ़ माना जाता था।
राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने भी दिया इस्तीफा
सुष्मिता देव से पहले सोमवार को राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने भी टीएमसी से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। इस्तीफे के साथ उन्होंने पार्टी और पश्चिम बंगाल सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए थे। लगातार दो वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे ने टीएमसी नेतृत्व को असहज स्थिति में ला दिया है।
बंगाल से दिल्ली तक बढ़ी बगावत
टीएमसी की मुश्किलें सिर्फ राज्यसभा तक सीमित नहीं हैं। हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी पार्टी के भीतर बड़ी बगावत देखने को मिली थी। बताया गया कि 58 तृणमूल विधायकों ने पार्टी नेतृत्व की पसंद को नजरअंदाज करते हुए अलग रुख अपनाया और विपक्ष के नेता पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में खड़े हो गए।
इसके अलावा लोकसभा में भी पार्टी को झटका लगा है। खबरों के मुताबिक, टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने की बात कही है। इन घटनाओं ने साफ संकेत दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
लगातार हो रहे इस्तीफों और बगावत की खबरों के बीच अब सभी की नजर ममता बनर्जी की अगली रणनीति पर टिकी है। आने वाले दिनों में पार्टी इस संकट से कैसे निपटती है, यह पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए अहम साबित हो सकता है।
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