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TMC को एक और झटका! राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बरेक ने दिया इस्तीफा, पार्टी में बढ़ी हलचल

TMC को एक और झटका! राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बरेक ने दिया इस्तीफा, पार्टी में बढ़ी हलचल
टीएमसी को एक और झटका! राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बरेक ने दिया इस्तीफा, पार्टी में बढ़ी हलचल (File Photo)

तृणमूल कांग्रेस को एक सप्ताह के भीतर तीसरा बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बरेक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। लगातार हो रहे इस्तीफों से राज्यसभा में टीएमसी की संख्या घट गई है। वहीं पार्टी में बढ़ती बगावत और कांग्रेस में संभावित विलय की अटकलों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

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Dipali Kumari
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West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए राजनीतिक चुनौतियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। कांग्रेस में संभावित विलय की चर्चाओं और पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष की खबरों के बीच आज गुरुवार को टीएमसी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बरेक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। खास बात यह है कि एक सप्ताह के भीतर राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले वह पार्टी के तीसरे सांसद हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

एक के बाद एक इस्तीफा

इससे पहले वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रे और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव भी अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। सुष्मिता देव ने 10 जून को राज्यसभा सदस्यता छोड़ दी थी। लगातार हो रहे इस्तीफों के कारण राज्यसभा में टीएमसी की संख्या घटकर 10 रह गई है। पहले पार्टी के 13 सदस्य उच्च सदन में थे। ऐसे में विपक्षी राजनीति में टीएमसी की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में कुछ और सांसदों के इस्तीफे की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लगातार सामने आ रही अटकलों ने टीएमसी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।

सुष्मिता देव भाजपा में होगी शामिल ?

पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा पहले भी होती रही है। सुखेंदु शेखर रे ने अपने इस्तीफे से पहले राज्य सरकार की कार्यशैली, भ्रष्टाचार के आरोपों और स्वास्थ्य तथा शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे। वहीं सुष्मिता देव ने अपने इस्तीफे के पीछे की वजह सार्वजनिक नहीं की, लेकिन बाद में उनकी असम के मुख्यमंत्री से मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया।

टीएमसी के सामने चुनौतियां

इधर, लोकसभा में भी टीएमसी के सामने चुनौतियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। कई सांसदों के असंतुष्ट होने की खबरें सामने आ रही हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि कुछ सांसद भविष्य की रणनीति को लेकर अलग रुख अपना सकते हैं। हालांकि इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

वहीं पार्टी के भीतर बगावत का सिलसिला विधानसभा स्तर तक भी पहुंच चुका है। चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कुछ नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इसके बाद कई विधायकों के असंतोष की खबरें सामने आईं, जिससे संगठनात्मक स्थिति पर भी असर पड़ा है।

कांग्रेस और टीएमसी का विलय!

इस बीच कांग्रेस और टीएमसी के संभावित विलय की अटकलें भी लगातार चर्चा में हैं। हालांकि दोनों दलों ने सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी योजना से इनकार किया है। बावजूद इसके, हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में टीएमसी के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।