
Delhi Pollution: दिल्ली में शनिवार की सुबह कुछ अलग नहीं, बल्कि पहले से कहीं अधिक परेशान करने वाली साबित हुई। मौसम की ठंडक के साथ घना कोहरा और हवा में घुला ज़हरीला स्मॉग जब एक साथ दिखाई दिया, तो यह साफ संकेत था कि राजधानी की हवा फिर से खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें आम हो गईं। शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 387 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी के अंतिम छोर पर है और ‘गंभीर’ स्तर को छूने के करीब है। राजधानी की

Delhi Pollution: दिल्ली में शनिवार की सुबह कुछ अलग नहीं, बल्कि पहले से कहीं अधिक परेशान करने वाली साबित हुई। मौसम की ठंडक के साथ घना कोहरा और हवा में घुला ज़हरीला स्मॉग जब एक साथ दिखाई दिया, तो यह साफ संकेत था कि राजधानी की हवा फिर से खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें आम हो गईं। शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 387 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी के अंतिम छोर पर है और ‘गंभीर’ स्तर को छूने के करीब है। राजधानी की

जानलेवा बन रहा वायु प्रदूषण नई दिल्ली। आधुनिक जीवन शैली और औद्योगिकीकरण के चलते वायु प्रदूषण अब केवल एक पर्यावरणीय चिंता नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव डालने वाला प्रमुख कारक बन चुका है। नई “स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2025” रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों की संख्या हर साल लाखों तक पहुँच रही है। यह सिर्फ फेफड़ों की बीमारियों का कारण नहीं है, बल्कि हृदय रोग, स्ट्रोक और अन्य गंभीर गैर-संचारी रोगों का भी मुख्य स्रोत बन गया है। वायु प्रदूषण कैसे बनता है मौत का कारण? सूक्ष्म कण और उनका

जानलेवा बन रहा वायु प्रदूषण नई दिल्ली। आधुनिक जीवन शैली और औद्योगिकीकरण के चलते वायु प्रदूषण अब केवल एक पर्यावरणीय चिंता नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव डालने वाला प्रमुख कारक बन चुका है। नई “स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2025” रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों की संख्या हर साल लाखों तक पहुँच रही है। यह सिर्फ फेफड़ों की बीमारियों का कारण नहीं है, बल्कि हृदय रोग, स्ट्रोक और अन्य गंभीर गैर-संचारी रोगों का भी मुख्य स्रोत बन गया है। वायु प्रदूषण कैसे बनता है मौत का कारण? सूक्ष्म कण और उनका