ब्रज की होली केवल एक त्योहार नहीं, एक भाव है—एक ऐसा भाव जो फागुन के आते ही हवा में घुल जाता है। यहां रंग सिर्फ चेहरे पर नहीं लगते, वे मन की परतों तक उतर जाते हैं। यही कारण है कि मथुरा, वृन्दावन, बरसाना, नंदगांव और बल्देव की होली देखने के लिए हर साल देश-विदेश से लाखों लोग उमड़ पड़ते हैं। यहां होली खेली नहीं जाती-जी जाती है।