
सीतामढ़ी में बारिश के बाद बिजली करंट से पूजा समिति सदस्य की मौत, लोगों में गहरा आक्रोश सीतामढ़ी के मेहसौल थाना क्षेत्र के प्रतापनगर मोहल्ले में बारिश के बाद हुए हादसे ने बिजली विभाग और नगर निगम की लापरवाही को उजागर किया। मोहल्ले में आयोजित माँ दुर्गा पूजा समिति के सदस्य विपुल की करंट लगने से मौत हो गई। हादसे का विवरण प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बारिश के बाद सड़क पर पानी भर गया था। इसी पानी में अचानक बिजली का करंट दौड़ने लगा। विपुल लगभग 10 मिनट तक करंट लगे पानी में तड़पते रहे। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने

सीतामढ़ी में बारिश के बाद बिजली करंट से पूजा समिति सदस्य की मौत, लोगों में गहरा आक्रोश सीतामढ़ी के मेहसौल थाना क्षेत्र के प्रतापनगर मोहल्ले में बारिश के बाद हुए हादसे ने बिजली विभाग और नगर निगम की लापरवाही को उजागर किया। मोहल्ले में आयोजित माँ दुर्गा पूजा समिति के सदस्य विपुल की करंट लगने से मौत हो गई। हादसे का विवरण प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बारिश के बाद सड़क पर पानी भर गया था। इसी पानी में अचानक बिजली का करंट दौड़ने लगा। विपुल लगभग 10 मिनट तक करंट लगे पानी में तड़पते रहे। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने

मां कात्यायनी का महत्व (Significance of Maa Katyayani): Shardiya Navratri 2025 के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है।ऋषि कात्यायन के घर में जन्म लेने के कारण इन्हें कात्यायनी कहा गया। मां कात्यायनी को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है। कहा जाता है कि उनकी उपासना करने से विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं और अच्छे जीवनसाथी का आशीर्वाद मिलता है। मां कात्यायनी सिंह पर सवार होती हैं, इनके चार हाथ होते हैं – एक में तलवार, दूसरे में कमल, तीसरे हाथ से आशीर्वाद देती हैं और चौथा हाथ

मां कात्यायनी का महत्व (Significance of Maa Katyayani): Shardiya Navratri 2025 के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है।ऋषि कात्यायन के घर में जन्म लेने के कारण इन्हें कात्यायनी कहा गया। मां कात्यायनी को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है। कहा जाता है कि उनकी उपासना करने से विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं और अच्छे जीवनसाथी का आशीर्वाद मिलता है। मां कात्यायनी सिंह पर सवार होती हैं, इनके चार हाथ होते हैं – एक में तलवार, दूसरे में कमल, तीसरे हाथ से आशीर्वाद देती हैं और चौथा हाथ

Manisha Devi News Patna: बिहार के पटना ज़िले के बाढ़ अनुमंडल के अथमलगोला प्रखंड के गंजपर गांव में इन दिनों आस्था और कौतूहल का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। गांव की महिला मनीषा देवी नवरात्रि के अवसर पर ऐसी तपस्या कर रही हैं, जिसने आसपास के इलाके में चर्चा और श्रद्धा दोनों को जन्म दिया है। मनीषा देवी बीते चार दिनों से iron nails के bed पर लेटी हुई हैं। उनके सीने पर एक पवित्र Kalash रखा है और वे बिना अन्न-जल यानी पूर्ण Nirjala fast का पालन कर रही हैं। Manisha Devi: तपस्या का संकल्प ग्रामीणों

Manisha Devi News Patna: बिहार के पटना ज़िले के बाढ़ अनुमंडल के अथमलगोला प्रखंड के गंजपर गांव में इन दिनों आस्था और कौतूहल का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। गांव की महिला मनीषा देवी नवरात्रि के अवसर पर ऐसी तपस्या कर रही हैं, जिसने आसपास के इलाके में चर्चा और श्रद्धा दोनों को जन्म दिया है। मनीषा देवी बीते चार दिनों से iron nails के bed पर लेटी हुई हैं। उनके सीने पर एक पवित्र Kalash रखा है और वे बिना अन्न-जल यानी पूर्ण Nirjala fast का पालन कर रही हैं। Manisha Devi: तपस्या का संकल्प ग्रामीणों

मां स्कंदमाता का महत्व (Significance of Maa Skandamata): Shardiya Navratri 2025 के पांचवें दिन (Shardiya Navratri 2025 Day 5) मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां को यह नाम उनके पुत्र कार्तिकेय (Skanda Kumar) की माता होने के कारण प्राप्त हुआ। मां स्कंदमाता की पूजा करने से संतान सुख, बुद्धि, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मां स्कंदमाता शेर पर सवार होती हैं और गोद में बाल रूप कार्तिकेय को धारण करती हैं। इनके चार हाथ होते हैं – दो हाथों में कमल, एक हाथ वरद मुद्रा और एक हाथ से कार्तिकेय को

मां स्कंदमाता का महत्व (Significance of Maa Skandamata): Shardiya Navratri 2025 के पांचवें दिन (Shardiya Navratri 2025 Day 5) मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां को यह नाम उनके पुत्र कार्तिकेय (Skanda Kumar) की माता होने के कारण प्राप्त हुआ। मां स्कंदमाता की पूजा करने से संतान सुख, बुद्धि, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मां स्कंदमाता शेर पर सवार होती हैं और गोद में बाल रूप कार्तिकेय को धारण करती हैं। इनके चार हाथ होते हैं – दो हाथों में कमल, एक हाथ वरद मुद्रा और एक हाथ से कार्तिकेय को

Shardiya Navratri 2025 Day 3: के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा शांति, साहस और वीरता की देवी मानी जाती हैं। उनके माथे पर अर्धचंद्र के आकार की घंटा जैसी आकृति होती है, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनकी आराधना से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में साहस तथा धैर्य की प्राप्ति होती है। मां चंद्रघंटा का महत्व (Significance of Maa Chandraghanta): Shardiya Navratri 2025 Day 3: मां चंद्रघंटा के स्वरूप में देवी सिंह पर सवार रहती हैं और उनके दस हाथों में

Shardiya Navratri 2025 Day 3: के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा शांति, साहस और वीरता की देवी मानी जाती हैं। उनके माथे पर अर्धचंद्र के आकार की घंटा जैसी आकृति होती है, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनकी आराधना से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में साहस तथा धैर्य की प्राप्ति होती है। मां चंद्रघंटा का महत्व (Significance of Maa Chandraghanta): Shardiya Navratri 2025 Day 3: मां चंद्रघंटा के स्वरूप में देवी सिंह पर सवार रहती हैं और उनके दस हाथों में

Shardiya Navratri 2025 Day 2 में भक्तों का ध्यान मां दुर्गा के दूसरे रूप मां ब्रह्मचारिणी पर केंद्रित रहता है। मां ब्रह्मचारिणी ज्ञान, संयम और तपस्या की देवी मानी जाती हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन उनकी पूजा करने से भक्तों को मानसिक स्थिरता, आत्म-संयम और ज्ञान की प्राप्ति होती है। मां ब्रह्मचारिणी का महत्व (Significance of Maa Brahmacharini):मां ब्रह्मचारिणी का अर्थ है “जो ब्रह्म की साधना में लीन रहती हैं।” उनके स्वरूप में उन्होंने कठोर तपस्या और योग साधना के माध्यम से जीवन में अनुशासन, संयम और आध्यात्मिक शक्ति की शिक्षा दी। उनके आशीर्वाद से जीवन में धैर्य और मानसिक

Shardiya Navratri 2025 Day 2 में भक्तों का ध्यान मां दुर्गा के दूसरे रूप मां ब्रह्मचारिणी पर केंद्रित रहता है। मां ब्रह्मचारिणी ज्ञान, संयम और तपस्या की देवी मानी जाती हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन उनकी पूजा करने से भक्तों को मानसिक स्थिरता, आत्म-संयम और ज्ञान की प्राप्ति होती है। मां ब्रह्मचारिणी का महत्व (Significance of Maa Brahmacharini):मां ब्रह्मचारिणी का अर्थ है “जो ब्रह्म की साधना में लीन रहती हैं।” उनके स्वरूप में उन्होंने कठोर तपस्या और योग साधना के माध्यम से जीवन में अनुशासन, संयम और आध्यात्मिक शक्ति की शिक्षा दी। उनके आशीर्वाद से जीवन में धैर्य और मानसिक

बांका (Banka), बिहार। नवरात्र और दशहरा के अवसर पर बिहार के बांका जिले का Tilidiha Durga Mandir आस्था का विशाल केंद्र बन जाता है। बदुआ नदी के पूर्वी तट पर स्थित यह प्राचीन शक्तिपीठ हर साल हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल और झारखंड से भी भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं। 400 साल पुराना इतिहास Banka Tilidiha Durga Mandir: मां तिलडीहा दुर्गा मंदिर का इतिहास लगभग 400 साल पुराना है। माना जाता है कि इसकी स्थापना वर्ष 1603 में राड़ी कायस्थ परिवार के हरबल्लव दास ने की

बांका (Banka), बिहार। नवरात्र और दशहरा के अवसर पर बिहार के बांका जिले का Tilidiha Durga Mandir आस्था का विशाल केंद्र बन जाता है। बदुआ नदी के पूर्वी तट पर स्थित यह प्राचीन शक्तिपीठ हर साल हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल और झारखंड से भी भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं। 400 साल पुराना इतिहास Banka Tilidiha Durga Mandir: मां तिलडीहा दुर्गा मंदिर का इतिहास लगभग 400 साल पुराना है। माना जाता है कि इसकी स्थापना वर्ष 1603 में राड़ी कायस्थ परिवार के हरबल्लव दास ने की

आज से शुरू हो चुका है Shardiya Navratri 2025, और मां दुर्गा के नौ रूपों में से प्रथम रूप मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्र के पहले दिन भक्त माँ शैलपुत्री की आराधना कर उन्हें रोली, अक्षत, सिंदूर, धूप, दीप और पुष्प अर्पित करते हैं। माँ शैलपुत्री को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन सफेद वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। Shardiya Navratri 2025, Day1, Maa Shailputri Vidhi: मां शैलपुत्री की पूजा का प्रारंभ कलश स्थापना से किया जाता है। कलश में जल, घी, चावल और सिक्के रखकर उसकी स्थापना कर देवी की शक्ति

आज से शुरू हो चुका है Shardiya Navratri 2025, और मां दुर्गा के नौ रूपों में से प्रथम रूप मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्र के पहले दिन भक्त माँ शैलपुत्री की आराधना कर उन्हें रोली, अक्षत, सिंदूर, धूप, दीप और पुष्प अर्पित करते हैं। माँ शैलपुत्री को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन सफेद वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। Shardiya Navratri 2025, Day1, Maa Shailputri Vidhi: मां शैलपुत्री की पूजा का प्रारंभ कलश स्थापना से किया जाता है। कलश में जल, घी, चावल और सिक्के रखकर उसकी स्थापना कर देवी की शक्ति