
Ola Uber Strike: भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को अक्सर भविष्य का इंजन कहा जाता है। मोबाइल ऐप, कैशलेस भुगतान और मिनटों में सेवा—यह सब देखने में जितना आकर्षक है, उसकी ज़मीनी हकीकत उतनी ही कठोर भी है। आज 7 फरवरी को ओला, उबर, रैपिडो और पोर्टर जैसे प्लेटफॉर्म्स से जुड़े लाखों ड्राइवरों की देशव्यापी हड़ताल ने इसी हकीकत को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है। सुबह से ही दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में “नो कैब अवेलेबल” का संदेश आम हो गया। कहीं किराया सामान्य से तीन गुना दिखा तो कहीं यात्रियों को मजबूरन ऑटो, बस या

Ola Uber Strike: भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को अक्सर भविष्य का इंजन कहा जाता है। मोबाइल ऐप, कैशलेस भुगतान और मिनटों में सेवा—यह सब देखने में जितना आकर्षक है, उसकी ज़मीनी हकीकत उतनी ही कठोर भी है। आज 7 फरवरी को ओला, उबर, रैपिडो और पोर्टर जैसे प्लेटफॉर्म्स से जुड़े लाखों ड्राइवरों की देशव्यापी हड़ताल ने इसी हकीकत को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है। सुबह से ही दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में “नो कैब अवेलेबल” का संदेश आम हो गया। कहीं किराया सामान्य से तीन गुना दिखा तो कहीं यात्रियों को मजबूरन ऑटो, बस या

देश भर में क्विक कॉमर्स कंपनियों द्वारा दस मिनट में सामान पहुंचाने के वादे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। डिलीवरी बॉय और गिग वर्कर्स लगातार इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। अब केंद्र सरकार ने इस मामले में बड़ा फैसला लेते हुए प्रमुख फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को दस मिनट की डिलीवरी की प्रतिबद्धता खत्म करने का निर्देश दिया है। इस फैसले का स्वागत करते हुए राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने इसे गिग वर्कर्स की बड़ी जीत बताया है। राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया राघव चड्ढा ने

देश भर में क्विक कॉमर्स कंपनियों द्वारा दस मिनट में सामान पहुंचाने के वादे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। डिलीवरी बॉय और गिग वर्कर्स लगातार इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। अब केंद्र सरकार ने इस मामले में बड़ा फैसला लेते हुए प्रमुख फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को दस मिनट की डिलीवरी की प्रतिबद्धता खत्म करने का निर्देश दिया है। इस फैसले का स्वागत करते हुए राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने इसे गिग वर्कर्स की बड़ी जीत बताया है। राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया राघव चड्ढा ने

Gig Workers: हर ऑर्डर के साथ दौड़ती सांसें, हर मिनट के साथ बढ़ता दबाव और हर देरी पर रेटिंग गिरने का डर—बीते कुछ वर्षों में 10 मिनट डिलीवरी का चलन सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि गिग वर्कर्स के लिए एक अदृश्य जोखिम बन चुका था। अब सरकार ने इस दबाव को पहचानते हुए बड़ा कदम उठाया है। श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के हस्तक्षेप के बाद क्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट ने अपने सभी ब्रांड से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा दिया है। त्वरित डिलीवरी के नाम पर गिग वर्कर्स पर थोपी गई समय-सीमा की अनिवार्यता को हटाने का फैसला उसी

Gig Workers: हर ऑर्डर के साथ दौड़ती सांसें, हर मिनट के साथ बढ़ता दबाव और हर देरी पर रेटिंग गिरने का डर—बीते कुछ वर्षों में 10 मिनट डिलीवरी का चलन सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि गिग वर्कर्स के लिए एक अदृश्य जोखिम बन चुका था। अब सरकार ने इस दबाव को पहचानते हुए बड़ा कदम उठाया है। श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के हस्तक्षेप के बाद क्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट ने अपने सभी ब्रांड से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा दिया है। त्वरित डिलीवरी के नाम पर गिग वर्कर्स पर थोपी गई समय-सीमा की अनिवार्यता को हटाने का फैसला उसी