राष्ट्रीय पोषण माह पर नागपुर में विद्यार्थियों के लिए पोषण शिक्षा कार्यक्रम

नागपुर स्कूल में राष्ट्रीय पोषण माह कार्यक्रम: नागपुर के वाल्मीकि हिंदी माध्यम स्कूल में राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर पोषण शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यार्थियों को संतुलित आहार, स्वस्थ खान-पान और नियमित शारीरिक गतिविधि की जानकारी दी गई। पथनाट्य, संतुलित थाली चित्र गतिविधि और वृद्धि मापन के माध्यम से पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाई गई। विद्यार्थियों को फल, सब्जियां, दाल, दूध और साबुत अनाज के महत्व की जानकारी दी गई।
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विद्यार्थियों को संतुलित आहार की जानकारी
नागपुर स्कूल में राष्ट्रीय पोषण माह कार्यक्रम: नागपुर, 22 सितंबर। राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के पदव्युत्तर शैक्षणिक गृहविज्ञान विभाग की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के अंतर्गत 17 सितंबर को गांधी नगर स्थित वाल्मीकि हिंदी माध्यम स्कूल में पोषण शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व से अवगत कराना तथा स्वस्थ खान-पान की आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर के मार्गदर्शन और विभाग प्रमुख डॉ. वंदना धवड के नेतृत्व में विशेष जनजागृति सत्र लिया गया। अन्न विज्ञान एवं पोषणशास्त्र विषय के एमएससी विद्यार्थियों ने पथनाट्य के माध्यम से संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी जानकारी दी।
इसके बाद ‘माय प्लेट, माय हेल्थ : स्कूली विद्यार्थियों के लिए रचनात्मक पोषण शिक्षा कार्यशाला’ आयोजित हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने स्वस्थ एवं संतुलित थाली के चित्र बनाए। साथ ही ‘वृद्धि मूल्यांकन उपक्रम’ के तहत विद्यार्थियों की ऊंचाई, वजन और मध्य-ऊपरी बांह की परिधि मापी गई।

पोषण और स्वस्थ खान-पान के लिए किया जागरूकता कार्यक्रम
विद्यार्थियों को ताजे फल-सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और दूध के सेवन का महत्व बताया गया, वहीं जंक फूड और शर्करा युक्त पेय पदार्थों से होने वाले नुकसान की भी जानकारी दी गई। इस दौरान पोषण संबंधी पोस्टर व चार्ट भी प्रदर्शित किए गए।
कार्यक्रम में स्कूल की मुख्याध्यापिका वंदना महाजन, प्रभारी श्रीमती गावंडे, डॉ. शुभदा जांभुळकर, डॉ. प्राजक्ता नांदे और श्रीमती मीनाक्षी सुरपांडे उपस्थित रहीं। संचालन कु. शिरीन रहमान ने किया।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, ऐसे जनजागृति कार्यक्रम आगे भी विभिन्न स्कूलों में आयोजित किए जाते रहेंगे।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

