
Moon water discovery : चंद्रयान-2 के डेटा से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ के मजबूत संकेत मिले हैं, जो भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए बड़ी उम्मीद हैं।

Moon water discovery : चंद्रयान-2 के डेटा से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ के मजबूत संकेत मिले हैं, जो भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए बड़ी उम्मीद हैं।

फरवरी में होने वाला अग्नि वलय सूर्य ग्रहण पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए खास होने जा रहा है। 17 फरवरी को जब चंद्रमा सूर्य के बीच आकर एक चमकदार अग्नि वलय बनाएगा, तब धरती के कई हिस्सों में लोग इस अद्भुत दृश्य को देखेंगे। लेकिन इस बार असली और सबसे भरोसेमंद जानकारी धरती से नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से आने वाली है। यह जानकारी भारत के सूर्य मिशन आदित्य एल-1 से मिलेगी। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का आदित्य एल-1 उपग्रह धरती से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर एक खास जगह पर तैनात है। यह जगह सूर्य और धरती के

फरवरी में होने वाला अग्नि वलय सूर्य ग्रहण पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए खास होने जा रहा है। 17 फरवरी को जब चंद्रमा सूर्य के बीच आकर एक चमकदार अग्नि वलय बनाएगा, तब धरती के कई हिस्सों में लोग इस अद्भुत दृश्य को देखेंगे। लेकिन इस बार असली और सबसे भरोसेमंद जानकारी धरती से नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से आने वाली है। यह जानकारी भारत के सूर्य मिशन आदित्य एल-1 से मिलेगी। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का आदित्य एल-1 उपग्रह धरती से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर एक खास जगह पर तैनात है। यह जगह सूर्य और धरती के

भारत का भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह सफलता नहीं बल्कि विफलता है। सोमवार को इसरो का PSLV-C62मिशन अपने तय लक्ष्य को पूरा नहीं कर सका। हालांकि इस असफलता के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। PSLV-C62 रॉकेट में भारत और कई देशों के कुल 16 उपग्रह लगे थे। इनमें डीआरडीओ का खास अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह ईओएस-एन1 भी शामिल था। रॉकेट ने शुरुआत में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन अंत में गड़बड़ी ने पूरे मिशन को रोक दिया। PSLV-C62 मिशन में क्या हुआ इसरो ने

भारत का भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह सफलता नहीं बल्कि विफलता है। सोमवार को इसरो का PSLV-C62मिशन अपने तय लक्ष्य को पूरा नहीं कर सका। हालांकि इस असफलता के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। PSLV-C62 रॉकेट में भारत और कई देशों के कुल 16 उपग्रह लगे थे। इनमें डीआरडीओ का खास अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह ईओएस-एन1 भी शामिल था। रॉकेट ने शुरुआत में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन अंत में गड़बड़ी ने पूरे मिशन को रोक दिया। PSLV-C62 मिशन में क्या हुआ इसरो ने

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक बड़ा झटका लगा है। देश की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का पीएसएलवी-सी62 मिशन तकनीकी खराबी के चलते विफल हो गया। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह लॉन्च हुए इस मिशन में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ द्वारा विकसित अत्यंत गोपनीय निगरानी उपग्रह अन्वेषा को अंतरिक्ष में स्थापित करना था। लेकिन रॉकेट के तीसरे चरण यानी पीएस3 स्टेज में आई तकनीकी दिक्कत ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। क्या हुआ श्रीहरिकोटा में आज सुबह दस बजकर अठारह मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी62 रॉकेट

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक बड़ा झटका लगा है। देश की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का पीएसएलवी-सी62 मिशन तकनीकी खराबी के चलते विफल हो गया। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह लॉन्च हुए इस मिशन में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ द्वारा विकसित अत्यंत गोपनीय निगरानी उपग्रह अन्वेषा को अंतरिक्ष में स्थापित करना था। लेकिन रॉकेट के तीसरे चरण यानी पीएस3 स्टेज में आई तकनीकी दिक्कत ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। क्या हुआ श्रीहरिकोटा में आज सुबह दस बजकर अठारह मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी62 रॉकेट

ISRO Launch LVM-3: भारत के अंतरिक्ष इतिहास में आज का दिन सिर्फ एक और लॉन्च की तारीख नहीं है, बल्कि यह उस आत्मविश्वास की घोषणा है जो अब भारत की वैज्ञानिक क्षमता में झलकने लगा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अपने सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 के जरिए एक बार फिर दुनिया को यह संदेश दिया है कि भारत अब केवल सीखने वाला देश नहीं, बल्कि अंतरिक्ष तकनीक का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। सुबह 8 बजकर 55 मिनट पर जब एलवीएम-3 ने उड़ान भरी, तो उसके साथ भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के नए सपने भी आसमान की

ISRO Launch LVM-3: भारत के अंतरिक्ष इतिहास में आज का दिन सिर्फ एक और लॉन्च की तारीख नहीं है, बल्कि यह उस आत्मविश्वास की घोषणा है जो अब भारत की वैज्ञानिक क्षमता में झलकने लगा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अपने सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 के जरिए एक बार फिर दुनिया को यह संदेश दिया है कि भारत अब केवल सीखने वाला देश नहीं, बल्कि अंतरिक्ष तकनीक का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। सुबह 8 बजकर 55 मिनट पर जब एलवीएम-3 ने उड़ान भरी, तो उसके साथ भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के नए सपने भी आसमान की

भारत का अंतरिक्ष से ‘सुरक्षा कवच’: ISRO ने लॉन्च किया नौसेना सैटेलाइट CMS-03 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रविवार को देश की अंतरिक्ष उपलब्धियों में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ा। शाम 5:26 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से CMS-03 (GSAT-7R) सैटेलाइट को ‘बाहुबली रॉकेट’ LVM3-M5 के ज़रिए सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। इसका वजन 4,410 किलोग्राम है और इसे जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित कर दिया गया है। बाद में यह जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में जाएगा, जहां यह अगले 15 वर्षों तक सेवाएं देगा। ‘बाहुबली’ रॉकेट की ताकत LVM3-M5, जिसे ‘बाहुबली रॉकेट’ के नाम से जाना जाता है, पहले

भारत का अंतरिक्ष से ‘सुरक्षा कवच’: ISRO ने लॉन्च किया नौसेना सैटेलाइट CMS-03 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रविवार को देश की अंतरिक्ष उपलब्धियों में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ा। शाम 5:26 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से CMS-03 (GSAT-7R) सैटेलाइट को ‘बाहुबली रॉकेट’ LVM3-M5 के ज़रिए सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। इसका वजन 4,410 किलोग्राम है और इसे जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित कर दिया गया है। बाद में यह जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में जाएगा, जहां यह अगले 15 वर्षों तक सेवाएं देगा। ‘बाहुबली’ रॉकेट की ताकत LVM3-M5, जिसे ‘बाहुबली रॉकेट’ के नाम से जाना जाता है, पहले