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न्यायपालिका को लेकर खुली चर्चा, नागपुर में न्यायमूर्ति अभय ओक का व्याख्यान 22 अगस्त को

न्यायपालिका को लेकर खुली चर्चा, नागपुर में न्यायमूर्ति अभय ओक का व्याख्यान 22 अगस्त को
Justice Abhay Oka Judiciary Lecture: न्यायपालिका को लेकर खुली चर्चा, नागपुर में न्यायमूर्ति अभय ओक का व्याख्यान 22 अगस्त को (Photo: RB / Jassi)

Justice Abhay Oka Judiciary Lecture: नागपुर में डॉ. दांडे फाउंडेशन 22 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभय ओक का व्याख्यान आयोजित करेगा। विषय होगा कि क्या न्यायपालिका को आलोचना से ऊपर माना जाना चाहिए। वनामती सभागृह में होने वाले कार्यक्रम में न्यायपालिका की जवाबदेही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, न्यायालय की अवमानना और न्यायिक कामकाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।

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Asfi Shadab
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न्यायपालिका की जवाबदेही पर नागपुर में होगी चर्चा

Justice Abhay Oka Judiciary Lecture: नागपुर: सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभय ओक शनिवार, 22 अगस्त को शाम 5.30 बजे नागपुर के वनामती सभागृह में एक व्याख्यान देंगे। व्याख्यान का विषय है  ‘इज द ज्यूडिशियरी ए होली काऊ?’ यानी ‘क्या न्यायपालिका को पवित्र गाय माना जाए और उस पर कोई आलोचना नहीं होनी चाहिए?’ इसका आयोजन डॉ. दांडे फाउंडेशन कर रहा है।

फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. पिनाक दांडे ने बताया कि न्यायमूर्ति अभय ओक सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं। वे मुंबई उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायमूर्ति रह चुके हैं और कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति भी रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय से सेवानिवृत्ति के दिन उन्होंने 10 मामलों में निर्णय देकर एक अलग रिकॉर्ड बनाया था। वे स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक निर्णयों के लिए जाने जाते रहे हैं।

न्यायमूर्ति अभय ओक 22 अगस्त को देंगे व्याख्यान

डॉ. दांडे के अनुसार, यह व्याख्यान मद्रास उच्च न्यायालय की हाल की उन टिप्पणियों के बाद आयोजित किया जा रहा है, जिनमें कहा गया था कि न्यायाधीशों या न्यायपालिका को ‘होली काऊ’ मानने की जरूरत नहीं है, और न्यायपालिका में भी भ्रष्टाचार संभव है तथा उसे नागरिकों की सम्मानजनक प्रतिक्रिया व सार्वजनिक जांच का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। इन टिप्पणियों के बाद न्यायिक क्षेत्र में व्यापक चर्चा शुरू हुई है, जिसे तर्कसंगत दिशा देने के उद्देश्य से यह व्याख्यान रखा गया है।

व्याख्यान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की जवाबदेही, न्यायालय की अवमानना और उसकी कार्यप्रणाली जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। डॉ. दांडे ने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है, लेकिन उसकी कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर स्वस्थ सार्वजनिक चर्चा भी जरूरी है।

व्याख्यान 22 अगस्त की शाम वनामती सभागृह, नागपुर में आयोजित होगा।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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