
Magh Mela: प्रयागराज माघ मेले का हर साल का सबसे बड़ा आकर्षण मौनी अमावस्या का स्नान होता है। लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर संगम नगरी में इकठ्ठा होते हैं। इस साल भी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कसी हुई थी। लेकिन इस बार मामला तब गरमा गया जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान से इंकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी से अखाड़े से संगम नोज की ओर जा रहे थे, तभी उनके शिष्यों और यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। इसके बाद उन्होंने स्नान करने से मना कर दिया।

Magh Mela: प्रयागराज माघ मेले का हर साल का सबसे बड़ा आकर्षण मौनी अमावस्या का स्नान होता है। लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर संगम नगरी में इकठ्ठा होते हैं। इस साल भी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कसी हुई थी। लेकिन इस बार मामला तब गरमा गया जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान से इंकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी से अखाड़े से संगम नोज की ओर जा रहे थे, तभी उनके शिष्यों और यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। इसके बाद उन्होंने स्नान करने से मना कर दिया।

प्रयागराज में आयोजित माघ मेला में बुधवार की शाम एक बार फिर आग लगने की घटना सामने आई है। सेक्टर 4 तुलसी मार्ग पर स्थित बड़े ब्रह्म छोटे ब्रह्म आश्रम में अचानक भड़की आग ने आधा दर्जन टेंट को पूरी तरह से जलाकर राख कर दिया। इस हादसे में लाखों रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई और तीन अग्निशमन कर्मी घायल हो गए। यह घटना लगातार दूसरे दिन माघ मेला क्षेत्र में आग लगने की खबर है, जिससे प्रशासन और श्रद्धालुओं में चिंता बढ़ गई है। घटना का विवरण बुधवार की शाम माघ मेला के सेक्टर 4 तुलसी मार्ग पर

प्रयागराज में आयोजित माघ मेला में बुधवार की शाम एक बार फिर आग लगने की घटना सामने आई है। सेक्टर 4 तुलसी मार्ग पर स्थित बड़े ब्रह्म छोटे ब्रह्म आश्रम में अचानक भड़की आग ने आधा दर्जन टेंट को पूरी तरह से जलाकर राख कर दिया। इस हादसे में लाखों रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई और तीन अग्निशमन कर्मी घायल हो गए। यह घटना लगातार दूसरे दिन माघ मेला क्षेत्र में आग लगने की खबर है, जिससे प्रशासन और श्रद्धालुओं में चिंता बढ़ गई है। घटना का विवरण बुधवार की शाम माघ मेला के सेक्टर 4 तुलसी मार्ग पर

Magh Mela 2026: प्रयागराज की धरती एक बार फिर आस्था, परंपरा और अनुशासन का अद्भुत दृश्य पेश कर रही है। पौष पूर्णिमा के साथ माघ मेला 2026 की विधिवत शुरुआत हो चुकी है और संगम तट पर श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान करने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच रहे हैं। माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण है। इसे देखते हुए प्रशासन ने इस बार सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर विशेष तैयारी

Magh Mela 2026: प्रयागराज की धरती एक बार फिर आस्था, परंपरा और अनुशासन का अद्भुत दृश्य पेश कर रही है। पौष पूर्णिमा के साथ माघ मेला 2026 की विधिवत शुरुआत हो चुकी है और संगम तट पर श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान करने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच रहे हैं। माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण है। इसे देखते हुए प्रशासन ने इस बार सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर विशेष तैयारी

Magh Mela 2026: प्रयागराज की धरती एक बार फिर आस्था, संयम और साधना की गवाह बनने जा रही है। माघ मास में हर साल लगने वाला माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम पर आयोजित यह मेला कुंभ का छोटा रूप माना जाता है, जहां लाखों श्रद्धालु आत्मशुद्धि और मोक्ष की कामना लेकर पहुंचते हैं। माघ मेला 2026 भी इसी आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ शुरू होने जा रहा है, जिसमें देश के कोने-कोने से साधु-संत, कल्पवासी और आम श्रद्धालु शामिल होंगे। माघ मेले की आत्मा

Magh Mela 2026: प्रयागराज की धरती एक बार फिर आस्था, संयम और साधना की गवाह बनने जा रही है। माघ मास में हर साल लगने वाला माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम पर आयोजित यह मेला कुंभ का छोटा रूप माना जाता है, जहां लाखों श्रद्धालु आत्मशुद्धि और मोक्ष की कामना लेकर पहुंचते हैं। माघ मेला 2026 भी इसी आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ शुरू होने जा रहा है, जिसमें देश के कोने-कोने से साधु-संत, कल्पवासी और आम श्रद्धालु शामिल होंगे। माघ मेले की आत्मा

Magh Mela 2026: गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम तट पर लगने वाला माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और व्यवस्थाओं की एक बड़ी परीक्षा भी होता है। प्रयागराज में 3 जनवरी से शुरू हो रहा माघ मेला 2026 इस बार कई मायनों में खास रहने वाला है। बीते वर्ष महाकुंभ के सफल आयोजन के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त वृद्धि की संभावना को देखते हुए सरकार और प्रशासन ने इस बार पहले से कहीं अधिक व्यापक तैयारी की है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने माघ मेला के लिए 3800

Magh Mela 2026: गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम तट पर लगने वाला माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और व्यवस्थाओं की एक बड़ी परीक्षा भी होता है। प्रयागराज में 3 जनवरी से शुरू हो रहा माघ मेला 2026 इस बार कई मायनों में खास रहने वाला है। बीते वर्ष महाकुंभ के सफल आयोजन के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त वृद्धि की संभावना को देखते हुए सरकार और प्रशासन ने इस बार पहले से कहीं अधिक व्यापक तैयारी की है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने माघ मेला के लिए 3800