
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों धर्म और सत्ता को लेकर एक नई बहस छिड़ी हुई है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच चल रही इस बयानबाजी ने धार्मिक परंपराओं और राजनीतिक मर्यादाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां शंकराचार्य सनातन परंपरा की बात कर रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री कानून और व्यवस्था को सर्वोपरि मानते हैं। इस पूरे विवाद ने न केवल धार्मिक जगत बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। विवाद की शुरुआत कैसे हुई यह पूरा मामला माघ मेले से जुड़े एक प्रशासनिक विवाद से शुरू हुआ। माघ मेले

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों धर्म और सत्ता को लेकर एक नई बहस छिड़ी हुई है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच चल रही इस बयानबाजी ने धार्मिक परंपराओं और राजनीतिक मर्यादाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां शंकराचार्य सनातन परंपरा की बात कर रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री कानून और व्यवस्था को सर्वोपरि मानते हैं। इस पूरे विवाद ने न केवल धार्मिक जगत बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। विवाद की शुरुआत कैसे हुई यह पूरा मामला माघ मेले से जुड़े एक प्रशासनिक विवाद से शुरू हुआ। माघ मेले

Shankaracharya: माघ मेला, जो आध्यात्मिक साधना और धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है, इस बार अचानक एक विवाद के कारण सुर्खियों में आ गया। प्रयागराज के संगम में मौनी अमावस्या और माघ मेला के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 11वें दिन अचानक मेला छोड़ने का फैसला किया। यह पहला मौका है जब माघ मेला में आने के बावजूद किसी शंकराचार्य ने संगम में स्नान किए बिना ही विदा लिया। शंकराचार्य का विरोध और विदाई शंकराचार्य ने माघ मेले से अचानक विदा लेने का निर्णय मंगलवार देर रात अपने समर्थकों से चर्चा करने के बाद लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि

Shankaracharya: माघ मेला, जो आध्यात्मिक साधना और धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है, इस बार अचानक एक विवाद के कारण सुर्खियों में आ गया। प्रयागराज के संगम में मौनी अमावस्या और माघ मेला के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 11वें दिन अचानक मेला छोड़ने का फैसला किया। यह पहला मौका है जब माघ मेला में आने के बावजूद किसी शंकराचार्य ने संगम में स्नान किए बिना ही विदा लिया। शंकराचार्य का विरोध और विदाई शंकराचार्य ने माघ मेले से अचानक विदा लेने का निर्णय मंगलवार देर रात अपने समर्थकों से चर्चा करने के बाद लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि

Magh Mela: प्रयागराज माघ मेले का हर साल का सबसे बड़ा आकर्षण मौनी अमावस्या का स्नान होता है। लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर संगम नगरी में इकठ्ठा होते हैं। इस साल भी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कसी हुई थी। लेकिन इस बार मामला तब गरमा गया जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान से इंकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी से अखाड़े से संगम नोज की ओर जा रहे थे, तभी उनके शिष्यों और यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। इसके बाद उन्होंने स्नान करने से मना कर दिया।

Magh Mela: प्रयागराज माघ मेले का हर साल का सबसे बड़ा आकर्षण मौनी अमावस्या का स्नान होता है। लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर संगम नगरी में इकठ्ठा होते हैं। इस साल भी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कसी हुई थी। लेकिन इस बार मामला तब गरमा गया जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान से इंकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी से अखाड़े से संगम नोज की ओर जा रहे थे, तभी उनके शिष्यों और यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। इसके बाद उन्होंने स्नान करने से मना कर दिया।