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Supreme Court India

Supreme Court Abortion Rights: रेप पीड़िताओं के गर्भपात अधिकार पर सख्त सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court Abortion Rights: रेप पीड़िताओं के गर्भपात अधिकार पर सख्त सुप्रीम कोर्ट

women rights India - 15 साल की पीड़िता के 30 हफ्ते के गर्भ मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने दर्द, मानसिक आघात और अधिकारों के बीच संतुलन की अहमियत बताई। एम्स ने मेडिकल जोखिमों का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट ने कहा-अंतिम फैसला पीड़िता का होना चाहिए। यह मामला अब देश में प्रजनन अधिकारों और कानून सुधार की बड़ी बहस बन गया है।

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Advocate Tanya Tiwari Clears Supreme Court AoR Exam: सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट तान्या तिवारी ने पास की AoR परीक्षा

Advocate Tanya Tiwari: तान्या तिवारी ने पास की एओआर परीक्षा, बनीं अधिकृत एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड, पूरी पृष्ठभूमि पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट तान्या तिवारी ने हासिल की एओआर परीक्षा में सफलता Advocate Tanya Tiwari Clears Supreme Court AoR Exam: एडवोकेट तान्या तिवारी ने भारत का सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठित एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर एक महत्वपूर्ण पेशेवर उपलब्धि हासिल की है। वह प्रसिद्ध वन्यजीव फोटोग्राफर वरुण ठक्कर की पत्नी हैं। इस योग्यता के साथ उन्हें देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था में वाद दायर करने और पक्षकारों का प्रतिनिधित्व करने का विशेष अधिकार प्राप्त हो गया है। एओआर परीक्षा, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित की जाती है, अपनी कठोरता और उच्च मानकों के लिए जानी जाती है। इसमें अभ्यर्थियों

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CJI Gavai Statement: पूर्व मुख्य न्यायाधीश का बड़ा बयान, नेताओं के दबाव पर तोड़ी चुप्पी

पूर्व मुख्य न्यायाधीश गवई का बयान: कभी नहीं झेला नेताओं का दबाव, कॉलेजियम व्यवस्था पारदर्शी

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने हाल ही में अपने कार्यकाल के दौरान के अनुभवों को साझा करते हुए कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता, कॉलेजियम व्यवस्था और न्यायिक सक्रियता जैसे विषयों पर उनके विचार न केवल महत्वपूर्ण हैं बल्कि देश की न्यायिक प्रणाली को समझने में भी मददगार साबित होते हैं। राजनीतिक दबाव का सवाल जब पूर्व मुख्य न्यायाधीश गवई से सीधे तौर पर यह पूछा गया कि क्या उन्हें कभी कार्यकारी अधिकारियों या राजनीतिक नेताओं की तरफ से किसी प्रकार का दबाव झेलना पड़ा, तो उनका जवाब बेहद स्पष्ट था। उन्होंने

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CJI Justice Surya Kant: सुप्रीम कोर्ट में शपथ ग्रहण के बाद पहले दिन की कार्यवाही

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का शपथ ग्रहण के बाद पहला दिन: न्यायपालिका में नए अध्याय की शुरुआत

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का पहला दिन: न्यायपालिका में नई दिशा 24 नवंबर, 2025 को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत ने शपथ ग्रहण किया। राष्ट्रपति भवन में शपथ लेने के बाद उन्होंने सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहाँ उन्होंने महात्मा गांधी एवं डॉ. बी.आर. आंबेडकर की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित किए। इस अवसर पर न्यायपालिका में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ और न्यायपालिका में पारदर्शिता एवं अनुशासन को लेकर उनके दृष्टिकोण का परिचय मिला। पहले दिन की सुनवाई और निर्णय जस्टिस सूर्यकांत ने मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपने पहले दिन में दो

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CJI Gavai: न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर बेबाक विचार और सरकारी दबाव पर स्पष्टीकरण

न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की स्पष्ट चेतावनी

भारत की न्यायपालिका पर जनमत और भ्रम: सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश ने खोले कई राज अब तक न्यायपालिका को लेकर जनमानस में अनेक धारणाएँ, आरोप और प्रश्न उठते रहे हैं। विशेषकर सरकारों के बदलते दौर में यह चर्चाएँ और तेज हो जाती हैं। ऐसे समय में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद से हाल ही सेवानिवृत्त हुए जस्टिस बी.आर. गवई के बयान ने न्यायिक स्वतंत्रता, न्यायिक आचरण और नियुक्तियों के जटिल ढांचे पर अहम रोशनी डाली है। उनका स्पष्ट कहना कि न्यायालय में फैसले किसी पक्ष विशेष को देखकर नहीं, बल्कि कानून और साक्ष्यों के आधार पर होते हैं, वर्तमान

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Supreme Court Verdict: सजा छिपाने पर अब रद्द होगी उम्मीदवारी – सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Supreme Court Verdict: सजा छिपाने पर रद्द होगी उम्मीदवारी, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय

न्यायपालिका का ऐतिहासिक निर्णय Supreme Court Verdict: भारतीय लोकतंत्र की पारदर्शिता और ईमानदारी को बनाए रखने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई उम्मीदवार अपने नामांकन पत्र में पिछली सजा या दोषसिद्धि की जानकारी छिपाता है, तो उसकी उम्मीदवारी स्वतः रद्द मानी जाएगी। यह फैसला न केवल चुनावी प्रक्रिया को शुद्ध करने का प्रयास है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन पूरी जानकारी के आधार पर कर सके। मामला क्या था? यह मामला मध्य प्रदेश के भीकनगांव नगर परिषद की पूर्व

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Supreme Court Dog Feeding Ban: सुप्रीम कोर्ट सरकारी इमारतों में कुत्तों को खिलाने पर रोक लगाने की तैयारी में, राज्यों को मिली चेतावनी

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, सरकारी दफ्तरों में कुत्तों को खाना खिलाने पर लगेगी रोक, राज्यों को दी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: सरकारी दफ्तरों में कुत्तों को खिलाने पर लग सकती है रोक देश की सर्वोच्च अदालत ने आवारा कुत्तों से जुड़ी बढ़ती घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए सोमवार को महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह सरकारी इमारतों में कुत्तों को खाना खिलाने की प्रथा पर रोक लगाने जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि कई बार सरकारी कर्मचारी खुद इन कुत्तों को बढ़ावा देते हैं, जिससे समस्या और गहराती जा रही है। एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों के पालन पर जोर जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया

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Supreme Court Highlights – सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले और निर्देश, आज के प्रमुख न्यायिक घटनाक्रम

Supreme Court Highlights: सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले, वकील-क्लाइंट गोपनीयता से लेकर स्ट्रे डॉग्स और उमर खालिद की जमानत तक

सुप्रीम कोर्ट में आज का दिन कई बड़े फैसलों के नाम शुक्रवार का दिन देश की सर्वोच्च अदालत में कई महत्वपूर्ण निर्णयों और निर्देशों से भरा रहा। सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की स्वतंत्रता और गोपनीयता की रक्षा से लेकर नागरिक अधिकारों, शिक्षा, और संवैधानिक जिम्मेदारियों तक कई अहम टिप्पणियां कीं। नीचे आज (31 अक्टूबर 2025) के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य घटनाक्रम और फैसलों की प्रमुख झलकियां दी जा रही हैं — वकील-क्लाइंट गोपनीयता पर बड़ा फैसला सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय में कहा कि जांच एजेंसियां बिना वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति के किसी वकील को पूछताछ के लिए नहीं

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Supreme Court Contempt Case – CJI पर जूता फेंकने की घटना में SC ने कार्रवाई से इनकार किया, सीजेआई पर जूता फेंकने वाले वकील पर नहीं होगी ग्रुप पर कार्रवाई

Supreme Court: सीजेआई पर जूता फेंकने वाले वकील पर अवमानना कार्रवाई से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार, कहा– “ऐसे घटनाक्रम को स्वयं मरने दें”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा — “घटना को प्राकृतिक रूप से समाप्त होने दें” सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस वकील के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने से इनकार कर दिया जिसने इस महीने की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ नहीं बल्कि न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की अदालत में जूता फेंकने का प्रयास किया था।न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि यद्यपि यह घटना अदालत की मर्यादा के विपरीत है, लेकिन इस पर किसी प्रकार की सजा देना अब “अनावश्यक प्रसिद्धि” देना होगा। पीठ ने कहा, “यदि हम अवमानना नोटिस जारी करते हैं, तो यह

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Lethal Injection vs Hanging

“फांसी या लीथल इंजेक्शन: सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र से पूछा — क्या समय के साथ दंड की पद्धति नहीं बदलनी चाहिए?”

मानवीय दंड की मांग पर सर्वोच्च न्यायालय में गूंजती बहस नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय में इस समय एक अत्यंत संवेदनशील और नैतिक प्रश्न पर बहस जारी है—क्या भारत में मृत्युदंड पाए कैदियों को फांसी की बजाय लीथल इंजेक्शन (घातक इंजेक्शन) का विकल्प दिया जाना चाहिए? इस प्रश्न ने न्यायालय और सरकार दोनों के सामने एक नैतिक व संवैधानिक विमर्श खड़ा कर दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से यह मांग की गई है कि फांसी की प्रक्रिया न केवल अमानवीय है बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन और सम्मानजनक मृत्यु के अधिकार का भी उल्लंघन करती है। अदालत ने

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Supreme Court Shoe Attack

सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की घटना: CJI गवै ने कहा “आश्चर्यचकित, पर यह अब भूला हुआ अध्याय है”

Supreme Court Shoe Attack: सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की घटना पर CJI गवै की प्रतिक्रिया सुप्रीम कोर्ट में हुई असाधारण घटना नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अक्टूबर 6, 2025 को हुई जूता फेंकने की घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। मुख्य न्यायाधीश भारत रत्न बी. आर. गवै ने बुधवार को इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस अप्रत्याशित कृत्य से “आश्चर्यचकित” थे, लेकिन अब इसे “भूला हुआ अध्याय” माना जाता है। घटना का विवरण घटना उस समय हुई जब CJI गवै न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन के साथ बैठकर मामलों की सुनवाई कर

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