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Dilip Ghosh: पश्चिम बंगाल में चुनाव को लेकर बीजेपी नेता दिलीप घोष का बड़ा बयान, कहा – अब बदलाव तय है

Dilip Ghosh BJP Statement in Kolkata: पश्चिम बंगाल में दिलीप घोष का बड़ा बयान, ममता बनर्जी पर साधा निशाना
Dilip Ghosh BJP Statement in Kolkata: पश्चिम बंगाल में दिलीप घोष का बड़ा बयान, ममता बनर्जी पर साधा निशाना (FB Photo)

Dilip Ghosh BJP Statement in Kolkata: बीजेपी नेता दिलीप घोष ने मतदाता सूची विवाद, केंद्रीय बलों की तैनाती और राज्यसभा नामांकन पर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ममता सरकार को बदलने के लिए तैयार है और इस बार बदलाव तय है।

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Dilip Ghosh BJP Statement in Kolkata: दिलीप घोष मॉर्निंग वॉक

एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची आज।

सूची निकलने तो दीजिए! सस्पेंस तो है। फिर प्रतिक्रिया।

सूची प्रकाशित होने जा रही है, अब भी तृणमूल की धमकी।

अब क्या, डर तो बहुत पहले से है… तीन महीने से दे रहे हैं। क्या हुआ? ममता बनर्जी ने मान लिया है कि एक करोड़ 20 लाख लोगों के नाम हटेंगे। हमने भी तो यही कहा था। तो देर से क्यों माना?

वही तो 2005 में संसद में उठाया था। पश्चिम बंगाल घुसपैठियों से भर गया है। इन्हें न हटाया तो बंगाल खत्म हो जाएगा। बीस साल बीत गए, क्या वे एक को भी बाहर कर पाईं! या तब ड्रामा कर रही थीं, या अब कर रही हैं? अब वे समझ गई हैं, वही यहां का खतरा था; अब वह संपत्ति बन गया है। उन्हीं के सहारे तीन बार सरकार बना दी, इस बार संभव नहीं।

तृणमूल के राज्यसभा में नामित राजीव कुमार।

सुनिए… जो 21 जुलाई वे मनाते हैं। शहीद दिवस के जो नायक गोली चलाए थे उन्हें उन्होंने विधायक बनाया, मंत्री बनाया।
और राजीव कुमार ने तो उनका साथ दिया है इतने सालों से। सभी अच्छे बुरे में। उन्हें तो पुरस्कार देना चाहिए। वही दे रही हैं।

मानेका गुरुस्वामी भी प्रत्याशी।

ठीक है। राज्यसभा में जिसे चाहें भेज सकती हैं। भेजा भी है। उन्होंने तो दूसरे राज्य के लोगों को पहले भी भेजा था, वहां क्या तृणमूल कांग्रेस शुरू हुई? नहीं हुई। पश्चिम बंगाल के लोग इतने दिन बोझ ढो रहे हैं, इस बार चुनाव में उतार देंगे।

दो चरणों में केंद्रीय बल।

आना शुरू हो गया है। राज्य में हिंसा शुरू हुई है, पूरे देश ने देखा। सोचा था कोर्ट में रोक देंगी। अदालत देख रही है पश्चिम बंगाल में क्या चल रहा है! यहां निर्वाचन आयोग, अदालत सबके लिए चुनौती है यहां शुद्ध मतदाता सूची बनाकर शांतिपूर्ण चुनाव कराना। इस बार वह होगा। क्योंकि पश्चिम बंगाल के लोग वही चाहते हैं।

बीजेपी के राज्यसभा प्रत्याशी कब?

हो जाएगा, सब प्रोसेसिंग में है। चुनाव से पहले ही घोषणा होगी।

48 घंटे बीत गए, हावड़ा में मुख्य आरोपी फरार।

48 घंटे देख रहे हैं आप? 48 दिन, महीने बीत गए कितने अपराधी पकड़े गए? हमारी पार्टी के 251 लोग मारे गए थे। एफआईआर की गई। कितने पकड़े गए?
पुलिस तो कई जगह एफआईआर लेना ही नहीं चाहती। इसलिए यहां कोई न्याय मिलने की उम्मीद नहीं। इसीलिए लोग बार-बार सेंट्रल फोर्स चाहते हैं, सेंट्रल एजेंसी चाहते हैं। फिर भी सरकार सहयोग नहीं करती, आरोपियों को छिपाती है। पूरे पश्चिम बंगाल में अपराध की बाढ़ आई है।

अब जांच करेगी सीआईडी।

सीआईडी को जिम्मेदारी देना मतलब जांच को दबा देना। यही हम इतने दिनों से देखते आ रहे हैं।

रंग से पहले ही रंग खेला, क्या संदेश।

फरवरी का आखिरी दिन आज। इतना कोहरा हुआ है। इतना घना कोहरा कि लोग गाड़ी नहीं चला पा रहे। कल भूकंप आ गया। मुझे लगता है पश्चिम बंगाल में एक भूकंप का इंतजार है, अप्रैल-मई में।

एसआईआर को लेकर फिर अदालत में राज्य।

देखिए सुप्रीम कोर्ट की बात उन्होंने ही पहले नहीं मानी। अदालत ने कहा था एसआईआर को केंद्र में सुरक्षा देनी होगी। सरकार उसके लिए दोषी है। अदालत ने उनका असली रूप देख लिया है। सुप्रीम कोर्ट क्यों, संयुक्त राष्ट्र (यूएन) जाने पर भी सरकार को नहीं बचा पाएंगी।

केंद्रीय बल देखते ही झाड़ू-पिटाई का निर्देश।

नहीं-नहीं ये सब डायलॉग। पहले कहा था न तृणमूल नेताओं को पेड़ से बांध दो। एसआईआर से पहले। बीएल ओ आए तो हाथ काट दो। खून की गंगा बहा देंगे… क्या कर पाए?

ये सब खोखली आवाजें हैं। तृणमूल में कोई दम नहीं। कुछ गुंडे और चमचे पुलिस के साथ चुनाव जीतने की कोशिश कर रहे हैं, यह संभव नहीं।

दोल और होली की शुभकामनाएं।

दोल अच्छा बीते। यह साल अच्छा बीते। पिछले साल हमने बहुत कष्ट सहे। 2025 में दुनिया बहुत संकट का सामना कर रही है। जितना लग रहा है 2026 अच्छा बीतेगा, खासकर पश्चिम बंगाल के लिए। नई खबर, नई सरकार आएगी। वही सबसे ज्यादा खुशी की बात है।

उत्सव पर एडहॉक बोनस राज्य का।

ये सब चुनाव से पहले लोगों का मन लेने की कोशिश करेंगे। लोग तो पिछले 15 साल नहीं भूले, पिछले पांच साल नहीं भूले। उसी से फैसला करेंगे। हजार भत्ते देने पर भी लोगों का मन नहीं पिघला पाएंगी।

परिवर्तन यात्रा।

यात्रा होगी तो समझ जाएंगे। मैं तो गांव-गांव घूम रहा हूं। लोगों ने मन बना लिया है इस बार परिवर्तन के लिए। और परिवर्तन यात्रा में हम उसका कुछ नमूना देख पाएंगे।


रिपोर्ट: एकबाल, पश्चिम बंगाल

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।