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गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला, सोनम वांगचुक को रिहा करने का आदेश

गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला, सोनम वांगचुक को रिहा करने का आदेश
गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला, सोनम वांगचुक को रिहा करने का आदेश (Pic Credit- X @MeghUpdates)

Sonam Wangchuk: लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को करीब 170 दिन बाद रिहा किए जाने का फैसला लिया गया है। लेह में 2025 की हिंसा के बाद उन्हें NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। तब से वे जोधपुर जेल में बंद थे। उनकी रिहाई की खबर से समर्थकों में खुशी है।

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Sonam Wangchuk: लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने उन्हें रिहा करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद उनके समर्थकों और पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच खुशी की लहर देखी जा रही है।

170 दिनों बाद रिहा होंगे सोनम वांगचुक

दरअसल,  लद्दाख प्रशासन ने 24 सितंबर 2025 को लेह में भड़की हिंसा के मामले में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर आरोप लगाते हुए 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया था। इसके बाद से वे जोधपुर जेल में बंद हैं। उस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 150 से अधिक लोग घायल हुए थे। अब करीब साढ़े पांच महीने यानी लगभग 170 दिन बाद उनकी रिहाई होने जा रही है।

सोनम वांगचुक लद्दाख से जुड़े पर्यावरणीय और संवैधानिक मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे थे। उनका कहना था कि लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए वहां विशेष सुरक्षा और संवैधानिक प्रावधान जरूरी हैं। इसी मांग को लेकर वे और उनके समर्थक शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे।

कौन है सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक सिर्फ एक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि एक जाने-माने इंजीनियर, शिक्षक और नवाचार के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने लद्दाख में शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई अहम पहल की हैं। उनके बनाए ‘आइस स्तूप’ जैसे प्रोजेक्ट दुनिया भर में चर्चा का विषय रहे हैं, जो पहाड़ी इलाकों में पानी की समस्या से निपटने का अनोखा तरीका माना जाता है।

लद्दाख को लेकर उनकी प्रमुख मांगों में क्षेत्र को संवैधानिक सुरक्षा देना और पर्यावरण की रक्षा के लिए सख्त कानून लागू करना शामिल रहा है। उनका कहना है कि अगर समय रहते इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो लद्दाख का नाजुक पर्यावरण गंभीर खतरे में पड़ सकता है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।