Plastic Currency Notes: भारत में आने वाले समय में करेंसी नोटों का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। जिस कागजी नोट को हम वर्षों से इस्तेमाल करते आ रहे हैं, उसकी जगह भविष्य में प्लास्टिक से बने नोट ले सकते हैं। दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में पॉलीमर यानी प्लास्टिक करेंसी नोट शुरू करने की संभावना पर विचार कर रहा है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी स्वीकार किया है कि केंद्रीय बैंक इस दिशा में अध्ययन कर रहा है। हालांकि उन्होंने साफ किया है कि फिलहाल यह योजना शुरुआती चरण में है और अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। फिर भी इस खबर ने लोगों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है कि क्या आने वाले वर्षों में भारतीय नोटों का रंग-रूप पूरी तरह बदल जाएगा।
🚨 The Reserve Bank of India is considering a pilot project for plastic currency notes in India.
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— Indian Tech & Infra (@IndianTechGuide) June 3, 2026
प्लास्टिक के नोट होंगे अधिक टिकाऊ
वर्तमान में भारत में चलने वाले सभी नोट विशेष कपास आधारित कागज से बनाए जाते हैं। ये नोट रोजमर्रा के इस्तेमाल में जल्दी गंदे हो जाते हैं, फट जाते हैं या खराब हो जाते हैं। इसके विपरीत पॉलीमर नोट एक विशेष प्रकार की प्लास्टिक सामग्री से बनाए जाते हैं, जो अधिक मजबूत और टिकाऊ होते हैं। पानी, नमी, धूल और बार-बार इस्तेमाल का इन पर बहुत कम असर पड़ता है। यही कारण है कि कई देशों ने कागजी नोटों की जगह प्लास्टिक नोटों को अपनाना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलीमर नोट सामान्य नोटों की तुलना में कई गुना अधिक समय तक चल सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में सबसे पहले आई थी प्लास्टिक की करेंसी
दुनिया में सबसे पहले प्लास्टिक करेंसी की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया ने की थी। इसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे कई देशों ने भी इस तकनीक को अपनाया। इन देशों के अनुभव बताते हैं कि पॉलीमर नोट न सिर्फ लंबे समय तक टिकते हैं, बल्कि उनकी नकल करना भी काफी मुश्किल होता है। इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स जोड़ना आसान होता है, जिससे नकली नोटों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। यही वजह है कि कई देश अब पारंपरिक कागजी नोटों से दूरी बना रहे हैं।
भारत के लिए प्लास्टिक के नोट कितने फायदेमंद
भारत जैसे विशाल देश में हर दिन करोड़ों नोट लोगों के हाथों से गुजरते हैं। मौसम, नमी और लगातार इस्तेमाल के कारण नोट जल्दी खराब हो जाते हैं, जिन्हें बदलने और नष्ट करने में सरकार को हर साल बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। अगर भविष्य में पॉलीमर नोट लागू होते हैं तो नोटों की उम्र बढ़ सकती है, छपाई का खर्च कम हो सकता है और नकली नोटों की समस्या से भी राहत मिल सकती है। हालांकि फिलहाल आरबीआई केवल इसके फायदे और चुनौतियों का अध्ययन कर रहा है। अंतिम फैसला आने तक देश में कागजी नोट ही प्रचलन में बने रहेंगे।