Rashtra Bharat Logo

India Road Accident Trauma Care: सड़क हादसों में हर साल 1.77 लाख मौतें, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद राज्यों में ट्रॉमा केयर सिस्टम अधूरा

India Road Accident Trauma Care: सड़क हादसों में हर साल 1.77 लाख मौतें, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद राज्यों में ट्रॉमा केयर सिस्टम अधूरा
India Road Accident Trauma Care: सड़क हादसों में हर साल 1.77 लाख मौतें, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद राज्यों में ट्रॉमा केयर सिस्टम अधूरा ( Image - AI )
Updated:
·by
Priyanka C. Mishra
Priyanka C. Mishra
Share:

विषयसूची

9 प्रमुख उपाय लागू करने के दिए थे निर्देश

India Road Accident Trauma Care: भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में करीब 1.77 लाख लोगों की मौत होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से बड़ी संख्या में लोगों की जान समय पर और प्रभावी आपातकालीन चिकित्सा सुविधा मिलने पर बचाई जा सकती थी। हालांकि, सड़क हादसों में घायलों की जान बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुझाई गई व्यापक ट्रॉमा केयर व्यवस्था आज भी अधिकांश राज्यों में पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है।

पिछले नौ महीनों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करीब 1200 पन्नों के दस्तावेज बताते हैं कि देश के अधिकांश राज्यों में ट्रॉमा केयर सिस्टम अभी भी अधूरा है। अदालत ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों की जान बचाने के लिए नौ प्रमुख उपाय लागू करने के निर्देश दिए थे। इनमें सबसे अहम हैं-एकीकृत आपातकालीन नंबर 112, जीपीएस से लैस एम्बुलेंस, गुड समैरिटन कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, ट्रॉमा रजिस्ट्री और बचाव कार्य के लिए मानक प्रोटोकॉल। ये सभी व्यवस्थाएं हादसे के बाद के पहले 60 मिनट यानी ‘गोल्डन ऑवर’ में जीवन बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था सेवलाइफ फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी राज्यों में एक समान ट्रॉमा केयर सिस्टम लागू करने का निर्देश दिया था।

आठ राज्यों में होती हैं दो-तिहाई मौतें

अदालत में पेश दस्तावेजों के अनुसार, देश में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली हर तीन में से दो मौतें केवल आठ राज्यों-उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, बिहार और आंध्र प्रदेश-में होती हैं। इसके बावजूद इन राज्यों में भी आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी है।

इनमें से सात राज्यों ने अभी तक सभी आपातकालीन सेवाओं को 112 नंबर से पूरी तरह नहीं जोड़ा है, जबकि कर्नाटक ने इस संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।

गुड समैरिटन व्यवस्था भी अधूरी

सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वालों को पुलिस या अस्पताल की पूछताछ से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2016 में गुड समैरिटन दिशानिर्देश लागू किए थे। बाद में केंद्र सरकार ने मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत इन्हें कानूनी सुरक्षा भी दी। इसके तहत हादसे के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ में घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये तक का पुरस्कार देने का भी प्रावधान है।

इसके बावजूद, जिन आठ राज्यों में सबसे अधिक मौतें होती हैं, उनमें केवल महाराष्ट्र और कर्नाटक में ही गुड समैरिटन के लिए अलग शिकायत निवारण प्रणाली उपलब्ध है। कई राज्यों में ऐसी व्यवस्था अभी भी नहीं है।

ट्रॉमा रजिस्ट्री में भी पिछड़ रहे राज्य

विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रॉमा रजिस्ट्री किसी भी आधुनिक ट्रॉमा केयर सिस्टम की रीढ़ होती है। इसमें दुर्घटना स्थल से लेकर एम्बुलेंस, अस्पताल में इलाज और मरीज के डिस्चार्ज तक का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज किया जाता है। इससे इलाज की गुणवत्ता का मूल्यांकन और बेहतर नीतियां बनाने में मदद मिलती है।

हालांकि, सबसे अधिक मौत वाले आठ राज्यों में से केवल तमिलनाडु, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के पास ट्रॉमा रजिस्ट्री है। बाकी राज्य अभी भी मैनुअल रिकॉर्ड या अलग-अलग डेटाबेस पर निर्भर हैं।

एम्बुलेंस निगरानी व्यवस्था भी कमजोर

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से पूछा था कि क्या सभी सरकारी और निजी एम्बुलेंस जीपीएस से लैस हैं। राज्यों ने सकारात्मक जवाब तो दिया, लेकिन अधिकांश ने केवल सरकारी एम्बुलेंस का आंकड़ा प्रस्तुत किया। निजी एम्बुलेंस का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।

इसके अलावा, अधिकांश राज्यों ने एम्बुलेंस ट्रैकिंग डैशबोर्ड को सार्वजनिक नहीं किया है। इससे पीड़ित परिवार यह नहीं जान पाता कि निकटतम एम्बुलेंस वास्तव में समय पर भेजी गई या नहीं। केवल उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु ने सार्वजनिक ट्रैकिंग सुविधा उपलब्ध कराने की जानकारी दी है।

सात राज्यों में एम्बुलेंस की रियल-टाइम निगरानी को 112 आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली से भी नहीं जोड़ा गया है। इससे बचाव कार्य में लगे वास्तविक समय का आकलन करना मुश्किल हो जाता है।

राज्यों की स्थिति

  •  देश में सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मौतें उत्तर प्रदेश में होती हैं। वर्ष 2024 में यहां 24,118 लोगों की जान गई। राज्य सरकार ने बताया कि अधिकांश आपातकालीन सेवाओं को 112 से जोड़ दिया गया है, जबकि 102 सेवा का एकीकरण अभी बाकी है। हालांकि, राज्य में अब तक केंद्रीकृत ट्रॉमा रजिस्ट्री विकसित नहीं हो सकी है।
  • तमिलनाडु ने दुर्घटनास्थल पर बचाव के लिए विस्तृत प्रोटोकॉल लागू करने और डिजिटल ट्रॉमा रजिस्ट्री होने का दावा किया है।
  • महाराष्ट्र ने बताया कि उसकी 108 एम्बुलेंस सेवा जीपीएस आधारित है।
  • मध्य प्रदेश ने कहा कि ट्रॉमा केयर नीति तैयार की जा चुकी है और गुड समैरिटन शिकायत प्रणाली विकसित की जा रही है।
  • वहीं कर्नाटक ने स्वीकार किया कि उसके पास ट्रॉमा रजिस्ट्री नहीं है।
  •  राजस्थान ने ट्रॉमा रजिस्ट्री के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार किए जाने की जानकारी दी, जबकि बिहार ने कहा कि ट्रॉमा डेटा अलग से दर्ज नहीं किया जाता।
  • आंध्र प्रदेश ने बताया कि उसने 108 एम्बुलेंस सेवा वर्ष 2005 में ही शुरू कर दी थी।

समय पर इलाज से बच सकती हैं हजारों जानें

India Road Accident Trauma Care: नीति आयोग और एम्स की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में दुर्घटनाओं से होने वाली लगभग 30 प्रतिशत मौतें केवल आपातकालीन चिकित्सा में देरी के कारण होती हैं।

ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुझाई गई ट्रॉमा केयर व्यवस्था को सभी राज्यों में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो हर साल हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है। बावजूद इसके, अदालत के निर्देशों के वर्षों बाद भी अधिकांश राज्यों में आवश्यक बुनियादी ढांचा और आपातकालीन चिकित्सा प्रणाली अभी अधूरी बनी हुई है।


Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Priyanka C. Mishra

Priyanka C. Mishra

प्रियंका सी. मिश्रा वरिष्ठ हिंदी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार लेखन, डिजिटल कंटेंट निर्माण, स्क्रिप्टिंग, रिपोर्टिंग और विश्लेषण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। वे सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों के साथ-साथ बॉलीवुड, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल जैसे विविध विषयों पर तथ्यपरक और शोध आधारित लेखन करती हैं। जटिल मुद्दों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करना उनकी विशेषता है, जिससे उनकी सामग्री व्यापक पाठक वर्ग के लिए सहज और विश्वसनीय बनती है। अनुभव : हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन, फीचर स्टोरी, विश्लेषणात्मक लेख और यूट्यूब स्क्रिप्टिंग में मजबूत पहचान बनाई है। विभिन्न समसामयिक और जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता उन्हें एक बहुमुखी कंटेंट विशेषज्ञ के रूप में स्थापित करती है। वर्तमान फोकस : वे समाचार, सोशल ट्रेंड्स, एंटरटेनमेंट, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर डिजिटल ऑडियंस के लिए जानकारीपूर्ण और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करती हैं। उनकी प्राथमिकता तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष प्रस्तुति और पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • समाचार लेखन और विश्लेषण : राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विषयों पर स्पष्ट और संतुलित रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण। • बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट : फिल्म, सेलिब्रिटी और मनोरंजन जगत से जुड़े ट्रेंड्स और अपडेट्स पर लेखन। • ज्योतिष और लाइफस्टाइल : ज्योतिष, स्वास्थ्य, रिलेशनशिप और दैनिक जीवन से जुड़े विषयों पर सरल एवं उपयोगी कंटेंट निर्माण। • यूट्यूब स्क्रिप्टिंग और डिजिटल कंटेंट : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक, ऑडियंस-केंद्रित और रिसर्च आधारित स्क्रिप्ट तैयार करने में विशेषज्ञता। • हिंदी कंटेंट निर्माण : सरल, प्रभावी और SEO-फ्रेंडली हिंदी कंटेंट तैयार करने का अनुभव। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष दृष्टिकोण और संवेदनशील लेखन शैली के कारण प्रियंका सी. मिश्रा ने पाठकों के बीच एक विश्वसनीय हिंदी कंटेंट राइटर और डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल के रूप में अपनी पहचान बनाई है। समाचार और डिजिटल मीडिया के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा विविध विषयों पर निरंतर लेखन अनुभव उनकी विशेषज्ञता और विश्वसनीयता को मजबूत बनाता है।