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लोकसभा में प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास को सही रूप में समझना जरूरी

लोकसभा में प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास को सही रूप में समझना जरूरी
PM Modi Speech on Vande Mataram: लोकसभा में प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास को सही रूप में समझना जरूरी (Image: Screengrab - X/@narendramodi)

प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम् के इतिहास, अंग्रेजों की रोक और उसके राष्ट्रीय महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम् को बांटा और यह निर्णय देश की राजनीति को प्रभावित करता रहा। चर्चा के दौरान टीएमसी सांसद से हल्की नोकझोंक भी हुई, जिससे सदन में हल्का माहौल बना।

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Asfi Shadab
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लोकसभा में वंदे मातरम् को लेकर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम् के विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इस चर्चा के दौरान इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि वह भावना थी जिसने देश को एक साथ जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि आजादी से पहले कई ऐसे निर्णय लिए गए, जिनका असर देश की एकता और जनता के मन पर पड़ा।

वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व

प्रधानमंत्री ने बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम् को केवल एक गीत के रूप में नहीं, बल्कि एक भाव के रूप में रचा था। यह उस दौर का समय था, जब अंग्रेज भारत को बांटने की कोशिश कर रहे थे। अंग्रेज शासन को यह समझ आ गया था कि इस गीत ने देश के लोगों में एकजुटता की भावना को मजबूत किया है। इसलिए, अंग्रेज सरकार ने वंदे मातरम् पर कठोर पाबंदियां लगाने का प्रयास किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों ने इस गीत को गाने पर सजा दी, इसे छापने पर सजा दी, और वंदे मातरम् बोलने पर भी सजा दी जाती थी। उन्होंने कहा कि अगर एक गीत को इस तरह रोका जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि उसका प्रभाव कितना गहरा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् ने जन-मानस को नई शक्ति दी और स्वतंत्रता आंदोलन को तेज किया।

लोकसभा में प्रधानमंत्री और टीएमसी सांसद के बीच संवाद

चर्चा के दौरान एक रोचक घटना भी हुई। जब प्रधानमंत्री ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को बंकिम दा कहकर संबोधित किया, तो तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने उन्हें टोका। उन्होंने कहा कि बंकिम बाबू कहना चाहिए। इस पर प्रधानमंत्री ने हंसकर जवाब दिया और कहा कि वे बंकिम बाबू ही कहेंगे, और उन्होंने सांसद की भावनाओं का सम्मान भी किया। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि वे सांसद को दादा भी कह सकते हैं। इस तरह सदन में कुछ पल हल्की मुस्कान के भी रहे।

वंदे मातरम् पर पुराने राजनीतिक निर्णय

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में यह दावा भी किया कि कांग्रेस ने अतीत में वंदे मातरम् के मुद्दे पर समझौता किया। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए, मुस्लिम लीग के दबाव के कारण वंदे मातरम् के हिस्से अलग किए गए। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस उस समय मजबूती से खड़ी रहती, तो देश को यह विभाजनकारी स्थिति नहीं झेलनी पड़ती।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन्ना के विरोध के बाद कांग्रेस द्वारा किए गए निर्णयों ने देश की राजनीति को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस को नेहरू द्वारा लिखे गए पत्र में यह बात कही गई थी कि वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि मुसलमानों को परेशान कर सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह निर्णय सामाजिक सद्भाव के नाम पर लिया गया, लेकिन वास्तव में यह मुस्लिम लीग के दबाव के कारण हुआ।

आपातकाल और वंदे मातरम् की भूमिका

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आपातकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब देश पर आपातकाल थोपा गया और संवैधानिक अधिकारों को दबाया गया, तब भी वंदे मातरम् देशभर में खड़े होने की पहचान बन गया। उन्होंने कहा कि यह गीत लोगों को शक्ति देता रहा और उन्हें अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस देता रहा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भी वंदे मातरम् एक प्रेरणा का स्रोत है। यह केवल देशप्रेम का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह गीत लोगों को यह याद दिलाता है कि देशहित हमेशा सर्वोपरि होना चाहिए।

कांग्रेस की वर्तमान नीति पर टिप्पणी

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के अंत में कहा कि कांग्रेस की नीतियां आज भी उसी दिशा में चल रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें एमएमसी शब्द का प्रयोग करना पड़ा, जिसका अर्थ उन्होंने मुस्लिम-लीगी माओवादी कांग्रेस बताया। उन्होंने कहा कि यह शब्द कांग्रेस की वर्तमान राजनीतिक दिशा को दर्शाता है।

संसद में वातावरण

भाषण के दौरान कई बार सदन में हलचल हुई। विपक्ष ने बीच-बीच में आपत्ति भी जताई, लेकिन प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि इतिहास को सही रूप में समझना आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि देश की भावना को समझाना है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि वह ध्वनि है जिसने देश को कठिन परिस्थितियों में राह दिखाई।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।