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झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बिहार विधानसभा चुनाव से खुद को किया अलग, राजद और कांग्रेस पर लगाया धोखे का आरोप

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बिहार विधानसभा चुनाव से खुद को किया अलग, राजद और कांग्रेस पर लगाया धोखे का आरोप
JMM Bihar Election: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बिहार चुनाव से खुद को किया अलग, राजद और कांग्रेस पर लगाया धोखे का आरोप
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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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झारखंड मुक्ति मोर्चा ने लिया बिहार चुनाव से अलग होने का निर्णय

गिरिडीह। बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र महागठबंधन और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बीच दरार स्पष्ट रूप से दिख रही है। झामुमो ने स्वयं को बिहार चुनाव से पूरी तरह अलग कर लिया है और इस कदम के लिए उसने राजद तथा कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने प्रेसवार्ता में स्पष्ट किया कि बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो की भागीदारी नहीं होगी।

महागठबंधन में झामुमो का अलगाव

सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो के साथ राजनीतिक चालबाजी की गई। पार्टी ने महागठबंधन का हिस्सा बनने के बावजूद उसे उचित हिस्सेदारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि 2015 में झामुमो ने राजद को मदद प्रदान की थी और 2020 के चुनाव में राजद ने झामुमो को तीन सीटें देने का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ।

उन्होंने आगे कहा कि 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में झामुमो ने राजद, कांग्रेस और वाम दलों के साथ मिलकर गठबंधन धर्म का पालन किया था। बिहार चुनाव में इस गठबंधन के प्रति विश्वासघात किया गया और यह झामुमो के लिए आहत करने वाला कदम साबित हुआ।

झामुमो और राजद-कांग्रेस विवाद

सोनू ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व ने मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सात अक्टूबर को पटना में राजद के शीर्ष नेतृत्व से वार्ता की थी। वार्ता में झामुमो को पांच सीटें देने की सहमति बनी थी, लेकिन महागठबंधन में इसे शामिल नहीं किया गया। सोनू ने कहा, “इस तरह के राजनीतिक व्यवहार का खामियाजा उन ताकतों को भुगतना पड़ेगा, जिन्होंने झामुमो को आहत किया।”

सोनू ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरी स्थिति में जितना दोषी राजद है, उतना ही जिम्मेदार कांग्रेस भी है क्योंकि उसने इस मामले में मौन साध रखा।

झारखंड की राजनीति पर संभावित असर

झामुमो का बिहार विधानसभा चुनाव से अलग होना केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगा। मंत्री सोनू ने संकेत दिया कि इसका असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है। संगठन महागठबंधन की गतिविधियों की समीक्षा कर झामुमो और झारखंड के हितों के अनुरूप रणनीति बनाएगा।

यह संभावना जताई जा रही है कि आगामी समय में झारखंड की राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव देखे जा सकते हैं। सोनू ने कहा कि पार्टी संगठन के निर्णय राज्य की राजनीति में संतुलन बनाने के लिए निर्णायक साबित होंगे।

भविष्य की रणनीति और संगठन का दृष्टिकोण

झामुमो ने स्पष्ट किया कि पार्टी बिहार चुनाव में भाग नहीं लेकर अपनी साख और गठबंधन के प्रति सिद्धांतों को बनाए रखना चाहती है। यह निर्णय संगठन और मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार लिया गया है। झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह और जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा भी प्रेसवार्ता में उपस्थित थे।

संगठन ने संकेत दिया है कि आगामी दिनों में वह महागठबंधन और अन्य राजनीतिक दलों के क्रियाकलापों का विश्लेषण करेगा और झारखंड के हितों के अनुरूप निर्णय लेगा।

इस घटनाक्रम के बाद बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की स्थिति प्रभावित हो सकती है। वहीं झारखंड में राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने लिया बिहार चुनाव से अलग होने का निर्णय

गिरिडीह। बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र महागठबंधन और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बीच दरार स्पष्ट रूप से दिख रही है। झामुमो ने स्वयं को बिहार चुनाव से पूरी तरह अलग कर लिया है और इस कदम के लिए उसने राजद तथा कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने प्रेसवार्ता में स्पष्ट किया कि बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो की भागीदारी नहीं होगी।

महागठबंधन में झामुमो का अलगाव

सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो के साथ राजनीतिक चालबाजी की गई। पार्टी ने महागठबंधन का हिस्सा बनने के बावजूद उसे उचित हिस्सेदारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि 2015 में झामुमो ने राजद को मदद प्रदान की थी और 2020 के चुनाव में राजद ने झामुमो को तीन सीटें देने का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ।

उन्होंने आगे कहा कि 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में झामुमो ने राजद, कांग्रेस और वाम दलों के साथ मिलकर गठबंधन धर्म का पालन किया था। बिहार चुनाव में इस गठबंधन के प्रति विश्वासघात किया गया और यह झामुमो के लिए आहत करने वाला कदम साबित हुआ।

झामुमो और राजद-कांग्रेस विवाद

सोनू ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व ने मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सात अक्टूबर को पटना में राजद के शीर्ष नेतृत्व से वार्ता की थी। वार्ता में झामुमो को पांच सीटें देने की सहमति बनी थी, लेकिन महागठबंधन में इसे शामिल नहीं किया गया। सोनू ने कहा, “इस तरह के राजनीतिक व्यवहार का खामियाजा उन ताकतों को भुगतना पड़ेगा, जिन्होंने झामुमो को आहत किया।”

सोनू ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरी स्थिति में जितना दोषी राजद है, उतना ही जिम्मेदार कांग्रेस भी है क्योंकि उसने इस मामले में मौन साध रखा।

झारखंड की राजनीति पर संभावित असर

झामुमो का बिहार विधानसभा चुनाव से अलग होना केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगा। मंत्री सोनू ने संकेत दिया कि इसका असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है। संगठन महागठबंधन की गतिविधियों की समीक्षा कर झामुमो और झारखंड के हितों के अनुरूप रणनीति बनाएगा।

यह संभावना जताई जा रही है कि आगामी समय में झारखंड की राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव देखे जा सकते हैं। सोनू ने कहा कि पार्टी संगठन के निर्णय राज्य की राजनीति में संतुलन बनाने के लिए निर्णायक साबित होंगे।

भविष्य की रणनीति और संगठन का दृष्टिकोण

झामुमो ने स्पष्ट किया कि पार्टी बिहार चुनाव में भाग नहीं लेकर अपनी साख और गठबंधन के प्रति सिद्धांतों को बनाए रखना चाहती है। यह निर्णय संगठन और मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार लिया गया है। झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह और जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा भी प्रेसवार्ता में उपस्थित थे।

संगठन ने संकेत दिया है कि आगामी दिनों में वह महागठबंधन और अन्य राजनीतिक दलों के क्रियाकलापों का विश्लेषण करेगा और झारखंड के हितों के अनुरूप निर्णय लेगा।

इस घटनाक्रम के बाद बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की स्थिति प्रभावित हो सकती है। वहीं झारखंड में राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।

Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।