Murshidabad News: फरक्का के जल मार्ग विकास परियोजना की जेटियों पर सुरक्षा की कमी, यात्रियों ने जताई दुर्घटना की आशंका

Farakka Jal Marg Vikas Project Jetty Safety: फरक्का के घोड़ाईपाड़ा घाट के पास जल मार्ग विकास परियोजना के तहत बनी जेटियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार मजबूत बैरिकेड और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से यात्रियों को खतरा है। आसपास पानी में फैली जलकुंभी से जलयानों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। यात्रियों ने जल्द सुरक्षा और सफाई की मांग की है।
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फरक्का की जेटियों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ी चिंता
Farakka Jal Marg Vikas Project Jetty Safety: मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का स्थित घोड़ाईपाड़ा घाट पर बनी जेटियों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार की पहल पर इनलैंड वाटरवेज़ अथॉरिटी ऑफ इंडिया आईडब्ल्यूएआई (IWAI) ने जलपथ यातायात को बेहतर बनाने और पर्यटन-आवागमन को सुगम करने के उद्देश्य से यहां ‘जल मार्ग विकास परियोजना’ के तहत कम्युनिटी जेटी का निर्माण कराया था। इन जेटियों से रोज़ाना सैकड़ों लोग और दोपहिया वाहन नदी पार करते हैं, लेकिन आम जनता को इसका पूरा लाभ मिल पा रहा है या नहीं, इस पर अब सवाल उठने लगे हैं।
मौके पर मौजूद रिपोर्टर की पड़ताल में सामने आया कि घोड़ाईपाड़ा घाट की इन जेटियों के आसपास कोई मजबूत आधुनिक बैरिकेड या हाई-सिक्योरिटी फेंसिंग नहीं लगाई गई है, जो यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। नाव या वेसल पर चढ़ते समय होने वाली धक्का-मुक्की में किसी भी वक्त बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इलाके के नियमित यात्री और साइकिल-मोटरसाइकिल लेकर नदी पार करने वाले लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं।



जलकुंभी हटाने और मजबूत बैरिकेड लगाने की मांग
इसके अलावा, जेटी से सटे जलक्षेत्र में कचुरीपाना और अन्य जलीय पौधों की भरमार से नौका परिचालन में भी गंभीर बाधा आ रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई यह परियोजना प्रशासनिक निगरानी और रख-रखाव के अभाव में अब आम लोगों के लिए मौत का जाल बनती जा रही है।
सजग नागरिकों और नियमित यात्रियों ने जेटियों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, नौका मार्ग को कचुरीपाना-मुक्त करने और यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। प्रशासन इस दिशा में क्या कदम उठाता है, यह देखना बाकी है।



रिपोर्ट: एकबाल, पश्चिम बंगाल

