बीड में डीजे बजा तो सीधे एफआईआर, आखिर गणेश विसर्जन पर पुलिस ने क्यों कसा शिकंजा?

अनंत चतुर्दशी पर शहर में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण, यातायात और भीड़ नियंत्रण पर विशेष नजर रखी है।
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1,759 गणेश मंडलों को नोटिस, संभाजीनगर में भी सख्ती
महाराष्ट्र में शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के मौके पर गणेश विसर्जन की मिरवणुकाएं निकाली जा रही हैं। इस बीच मराठवाड़ा के बीड और छत्रपति संभाजीनगर में प्रशासन ने डीजे और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। बीड में विसर्जन मिरवणुकी के दौरान डीजे और साउंड सिस्टम पर पूरी तरह रोक लगाई गई है, जबकि छत्रपति संभाजीनगर में भी डीजे को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण रखने के साथ-साथ भीड़ के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
बीड में जिला प्रशासन और पुलिस ने 1,759 गणेश मंडलों को नोटिस जारी किए हैं। प्रशासन ने डीजे और साउंड सिस्टम का इस्तेमाल नहीं करने के निर्देश दिए हैं। नियम तोड़ने पर साउंड सिस्टम जब्त करने और संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की चेतावनी दी गई है। गणेश मंडलों से डीजे की जगह हलगी, ढोल-ताशा और पारंपरिक वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल करने की अपील की गई है। प्रशासन के निर्देशों के मुताबिक सीमित आवाज में एक स्पीकर के इस्तेमाल की व्यवस्था भी रखी गई है। अधिकारियों का कहना है कि गणेश विसर्जन और मिरवणुकाओं पर रोक नहीं है, बल्कि तेज आवाज वाले इलेक्ट्रॉनिक साउंड सिस्टम से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
करीब 4 हजार पुलिसकर्मी, ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी
बीड में सुरक्षा व्यवस्था भी काफी व्यापक रखी गई है। जिले में करीब 4 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मिरवणुकाओं पर नजर रखने के लिए एआई ड्रोन और हाईटेक सीसीटीवी का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले करीब 250 लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डीजे प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसका मकसद विसर्जन के दौरान किसी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा होने से रोकना है।
संभाजीनगर में स्थिति थोड़ी अलग
छत्रपति संभाजीनगर में डीजे को लेकर शुरुआत में स्थिति थोड़ी अलग थी। गणेश विसर्जन के दौरान ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी पुलिस ने सख्ती की है। शहर में 28 नॉइज़ लेवल मीटर के जरिए मिरवणुकाओं में आवाज की जांच की जा रही है। बाहर के जिलों से आने वाले डीजे को शहर में प्रवेश से रोकने के लिए प्रमुख प्रवेश मार्गों पर जांच की जा रही है। लाउडस्पीकर के लिए दो टॉप और दो बेस की सीमा रखी गई है।
मुख्य विसर्जन मार्ग पर बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। मिरवणुकाओं की निगरानी के लिए पुलिस के अधिकृत ड्रोन तैनात रहेंगे। इसके अलावा बम निरोधक दल, दामिनी पथक और अन्य विशेष टीमें भी गश्त करेंगी। किसी भी अप्रिय घटना की सूचना देने के लिए नागरिकों से 112 पर संपर्क करने की अपील की गई है।
संभाजीनगर में भारी पुलिस बंदोबस्त
विसर्जन को शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए छत्रपति संभाजीनगर में 2,434 पुलिसकर्मियों के साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा एसआरपीएफ, रैपिड एक्शन फोर्स और 500 होमगार्ड भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हैं। पुलिस की निगरानी के लिए अधिकृत ड्रोन और कमांड कंट्रोल सेंटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। शहर में बड़ी संख्या में सार्वजनिक और घरेलू गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन होना है। इसलिए पुलिस का ध्यान केवल डीजे पर नहीं, बल्कि भीड़ नियंत्रण, यातायात, महिला सुरक्षा, संदिग्ध गतिविधियों और विसर्जन स्थलों की व्यवस्था पर भी है।
महापालिका ने गणेश विसर्जन के लिए 21 स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें प्राकृतिक जलस्रोतों के साथ कृत्रिम तालाब भी शामिल हैं। पर्यावरण अनुकूल विसर्जन को बढ़ावा देने के लिए मूर्ति और निर्माल्य संकलन की अलग व्यवस्था की गई है। महापालिका के करीब 1,450 कर्मचारी और 153 वाहन विसर्जन व्यवस्था में लगाए गए हैं।
आखिर डीजे पर इतनी सख्ती क्यों?
- इसका सबसे बड़ा कारण ध्वनि प्रदूषण है। गणेश विसर्जन के दौरान बड़े साउंड सिस्टम और अत्यधिक तेज आवाज को लेकर नागरिकों की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। इसी व्यापक मुद्दे पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी हाल में ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।
- हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार सार्वजनिक उत्सवों और मिरवणुकाओं में ध्वनि सीमा का पालन जरूरी है। साउंड सिस्टम इस्तेमाल करने वाले आयोजकों को ध्वनि की निगरानी के लिए डेसिबल मीटर लगाने और निर्धारित सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- अदालत ने लेजर लाइट, अत्यधिक तेज प्रकाश वाली बीम और सार्वजनिक स्थानों पर पटाखों के इस्तेमाल को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। यानी डीजे पर कार्रवाई केवल बीड का स्थानीय फैसला नहीं है। पूरे महाराष्ट्र में इस गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण और मिरवणुकी में इस्तेमाल होने वाले तेज आवाज तथा प्रकाश उपकरणों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
लोगों और गणेश मंडलों की प्रतिक्रिया क्या है?
- डीजे पर प्रतिबंध को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं है। एक वर्ग तेज आवाज के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करता है। उसका कहना है कि विसर्जन मिरवणुकाओं में अत्यधिक तेज आवाज से बुजुर्गों, बच्चों, मरीजों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है।
- दूसरी तरफ कई गणेश मंडल पूरी तरह डीजे बंद करने के बजाय निर्धारित ध्वनि सीमा के भीतर इस्तेमाल की अनुमति देने के पक्ष में हैं।
- महाराष्ट्र के अन्य शहरों में भी मंडल प्रतिनिधियों ने कहा है कि वे नियमों का पालन करने को तैयार हैं, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध को लेकर उनकी आपत्ति है।
- पुणे के कुछ मंडल प्रतिनिधियों ने भी कहा था कि वे निर्धारित स्पीकर सीमा और ध्वनि मानकों का पालन करने के पक्ष में हैं, लेकिन डीजे और पारंपरिक ढोल-ताशा पर पूरी रोक से सहमत नहीं हैं।
- वहीं नागरिकों के एक वर्ग ने तेज आवाज वाले डीजे के खिलाफ खुलकर अभियान चलाया है। पुणे में सैकड़ों नागरिकों ने डीजे की तेज आवाज के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए पूर्ण प्रतिबंध की मांग की थी।
- कुछ गणेश मंडल प्रतिनिधियों ने इसके जवाब में कहा कि मंडलों को निशाना बनाने के बजाय सभी आयोजनों में ध्वनि नियम समान रूप से लागू किए जाने चाहिए।

