जलसंधारण से जलसमृद्ध और सूखामुक्त महाराष्ट्र की मजबूत नींव

Maharashtra Jalsandharan water conservation campaign: महाराष्ट्र में जलसंधारण के जरिए वर्षा का पानी रोकने, भूजल स्तर सुधारने और खेती को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। जलयुक्त शिवार अभियान 2.0 के तहत हजारों गांवों में काम किए गए हैं। 15 से 21 अगस्त तक जलसंधारण सप्ताह चल रहा है और 21 अगस्त को सभी 36 जिलों में ‘महा वॉकेथॉन 2026’ आयोजित होगा।
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जलसंधारण से मजबूत होगा महाराष्ट्र
Maharashtra Jalsandharan water conservation campaign: मुंबई। महाराष्ट्र में जल संकट और घटते भूजल स्तर को देखते हुए राज्य सरकार ने जलसंधारण अभियान को नई गति दी है। मृदा एवं जलसंधारण मंत्री संजय राठोड ने इस मुद्दे पर विशेष लेख जारी कर राज्य की स्थिति और आगे की रणनीति सामने रखी है।
राठोड के अनुसार, “पानी खेती की सांस और विकास का आधार है।” उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र का लगभग 82 प्रतिशत कृषि क्षेत्र वर्षा पर निर्भर है। राज्य में 241 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जलग्रहण विकास के लिए पात्र है, जिसमें से 182.47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मृदा एवं जलसंधारण कार्य पूरे हो चुके हैं।
जलयुक्त शिवार अभियान 2.0 के तहत 5,858 गांवों में 1.43 लाख से अधिक कार्य प्रस्तावित हैं, जिनमें से 1.24 लाख से अधिक कार्य पूरे हो चुके हैं। इससे कई गांवों में जलसाठा बढ़ा और कुओं के जलस्तर में सुधार हुआ है।
‘गादमुक्त बांध, गादयुक्त खेत’ योजना के तहत जलाशयों से गाद निकालकर खेतों में पहुंचाई जा रही है, जिससे जलसंग्रहण क्षमता और मिट्टी की गुणवत्ता दोनों बेहतर हो रही हैं।
जलयुक्त शिवार से बढ़ रहा जलसाठा
15 से 21 अगस्त 2026 तक ‘जलसंधारण सप्ताह’ और 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक ‘जलसंधारण अभियान’ चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 21 अगस्त को राज्य के सभी 36 जिलों में ‘महा वॉकेथॉन 2026—वॉक फॉर वॉटर’ का आयोजन किया गया है।
मंत्री राठोड ने नागरिकों से अपील की है कि वे संकल्प लें पानी रोकें, पानी जमीन में उतारें, मिट्टी बचाएं और हर बूंद का संरक्षण करें, ताकि जलसमृद्ध और सूखामुक्त महाराष्ट्र का निर्माण हो सके।
आगे क्या: अभियान 26 जनवरी 2027 तक जारी रहेगा, जिसमें जिलेवार कार्यों की प्रगति पर नजर रखी जाएगी।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

